मेकिंग ऑफ मोदी की तो कहानी है, छोटे मोटे तो बस उछलकूद करते रहते हैं

मोदी बनना सरल नहीं। ऐसा नहीं हुआ कि जादू की छड़ी हिली, हवा में बन्दा प्रकट हुआ, शू शट करके कांग्रेसी मोनोपोली को चीर कर आगे बढ़ा और पीएम बन गया।

याद करिए गुजरात का समय, केशुभाई पटेल ग्रुप आदि की बातें चलती थीं। राष्ट्रीय भविष्य की कोई सूचना उस वक्त तक नहीं थी। एक अनजान से व्यक्ति का राज्य के परिदृश्य में आना और अपना स्थान बनाना। बाकी खेल तो बाद की मेहनत है। चरित्र और निष्ठा चाहिए होती है। संसाधन चाहिए होता है। संघ का बैकअप तो रहा।

आपको क्या लगता है? कांग्रेसी मोनोपोली राष्ट्रीय परिदृश्य पर किसी को चांस देगी भी? देश आजादी के पहले और बाद में तक उनके हाथ में रहा है। इसका मतलब समझते हैं आप? पूर्ण नियंत्रण। ऐसा नियंत्रण जो संवैधानिक कार्य प्रणाली के अंदर तक विचार रूप में पल्लवित हो रहा हो और जनता की आदत उसके अनुसार बनती गयी हो। गंभीरता से सोचा जाए तो राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे तो किसी को आने ही नहीं दिया जाएगा।

रीजनल पार्टीज से गठबंधन की बात भूल जाइए। वो तो अपने अपने लाभ को कांग्रेस से जुड़े हैं। उनकी मजबूरी हो चुकी है। पर उन्हीं में से भी, कांग्रेस कभी किसी को आगे आने नहीं देगी।

क्या विकल्प लगता है मोदी का? जीरो। मेकिंग ऑफ मोदी की तो कहानी है। सामने सामने दिखा है। कोई और ऐसा दिखता है जिसकी वाणी में ओज तेज हो या जो सत्तर साल के बने एक फॉर्मेट को तोड़कर आगे आ सके? प्रश्न ही नहीं है। छोटे मोटे जो उछलकूद करते रहते हैं, शायद उनको भी अंदाज नहीं होगा कि चरित्र की गंभीरता का कीमत राष्ट्र को भविष्य से चुकानी पड़ती है।

अच्छा पीएम मिल गया तो राष्ट्र आगे चलेगा।
एक शोपीस मिल गया तो आगे के दस बीस साल गए काम से।

कोई नहीं है परिदृश्य में भारत की विपक्ष राजनीति में, जिसके बारे में कहा जा सके, हाँ, ये ठोस व्यक्तिव है, चरित्र है, गंभीरता है, चलो ये विकल्प बन सकता है। जो आएगा उसके भी पीछे सात आठ साल का समय होगा कि काबिलियत दिखा सके। ऐसा फिलहाल कोई नहीं।

और ऐसे में, पूरे देश को निर्णय लेने में कठिनाई नहीं आएगी। जनता पर इतना थोड़ा विश्वास कर लेने का अधिकार बन जाता है। हालांकि निजी तौर पर जनता की इतनी उपयोगिता दुर्भाग्य से नहीं माना जाना चाहिए, मेरे कहने से नहीं, वो इतना फोकस नहीं होते हैं या दृष्टि नहीं होती है कि दूरगामी भविष्य का अनुमान लगा सकें या कोई विजन को लेकर चलने पर परिणाम को उस दिशा में ठोसरूप से धकेलें।

अपन तो मोदी जी से बड़े प्रसन्न हैं। और इन दूसरे विपक्ष के नेताओं को देखकर तो विश्वास और अधिक बढ़ जाता है कि नेता हो तो मोदी जैसा हो।

मैं मोदी जी जैसी दिव्यात्मा का हमेशा अखंड भक्त रहूंगा

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