विकास पागल हो गया है या वर्ल्ड बैंक संघी हो गया है!

आज के दिन को दिन कांग्रेस के लिए इतिहास का सबसे शर्मनाक दिन कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

आज जहां एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने काँग्रेस नेता और देश के प्रथम गृहमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बनवा कर देश को सौंप दी, जिसको देख कर काँग्रेसी ईर्ष्या के मारे जल-भुन गए हैं।

वही दूसरी तरफ काँग्रेसियों के जले पर नमक छिड़कती हुई वर्ल्ड बैंक से एक रिपोर्ट भी आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (Ease of doing business) रैंकिंग में पिछले साल के 100वें स्थान से आज 23 स्थान की लंबी छलांग लगाते हुए 77वें स्थान पर आ गया।

10 वर्षों तक भारत के प्रधानमंत्री रहे अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को यह खबर विचलित कर सकती है, क्योंकि उनके हिसाब से एक ‘चाय वाले’ ने देश की अर्थव्यवस्था तबाह कर दी है। लेकिन फिर भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से देश के लिए अच्छी खबरें आ रही हैं। अब अगर अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह की बात में दम था तो ये चमत्कार कैसे हो रहा है?

भारत के दलाल मीडिया चैनल और पत्रकारों ने भी कई दिनों से खूब गदर मचाया हुआ है, ‘हाय दैया भारत का रुपया डॉलर में मुकाबले कमज़ोर हो गया, हाय दैया पेट्रोल/ डीज़ल का दाम बढ़ गया… ब्ला ब्ला ब्ला…

EoDB (Ease of doing business) रैंकिंग में 23 स्थान का सुधार जिन 6 मानदंडों पर हुआ है, वो इस प्रकार हैं…

1. कंस्ट्रक्शन परमिट्स देने की सूची में भारत पिछले वर्ष 181वें स्थान पर था और आज 2018 में भारत 52वें स्थान पर आ गया है, मतलब एक वर्ष में 129 स्थान का सुधार हुआ है।

2. ट्रेडिंग एक्रॉस बॉर्डर की सूची में भारत पिछले वर्ष 146वें स्थान पर था और आज 80वें स्थान पर आ गया है, मतलब एक वर्ष में 66 स्थान का सुधार हुआ है।

3. स्टार्टिंग अ बिज़नेस की सूची में भारत पिछले वर्ष 156वें स्थान पर था और आज 137वें स्थान पर आ गया है, मतलब एक वर्ष में 19 स्थान का सुधार हुआ है।

4. गेटिंग क्रेडिट की सूची में भारत पिछले साल 29वें स्थान पर था और आज 22वें स्थान पर आ गया है, मतलब एक वर्ष में 7 स्थान का सुधार हुआ है।

5. गेटिंग इलेक्ट्रिसिटी की सूची में भारत पिछले साल 29वें स्थान पर था और आज 24वें स्थान पर आ गया है, मतलब एक वर्ष में 5 स्थान का सुधार हुआ है।

6. इंफोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट्स की सूची में भारत पिछले साल 164वें स्थान पर था और आज एक स्थान के सुधार के साथ 163वें स्थान पर आ गया है।

वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट ने फर्ज़ी अर्थशास्त्री के खोखले दावों की पोल खोल दी है। मोदी नीति को समझना कबाड़ियों के बस का नहीं है।

जो हमने दास्ताँ ‘उनकी’ सुनाई, ‘आप’ क्यों रोए?

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