क्या भारत में सिर्फ 17 करोड़ ही हैं हिन्दू !

राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा या मोदी को गाली देता हुआ हिन्दू कितना क्यूट लगता है!

कल ही किसी ने कहा मंदिर नहीं तो वोट नहीं। मतलब वोट डालने ही नहीं जाएंगे। क्योंकि भाजपा के अलावा किसी और को वोट दे नहीं सकते, और मंदिर नहीं बना तो भाजपा को भी वोट नहीं देंगे।

वोट नहीं दोगे तो फायदा किसका होगा? अल्टीमेटली एकजुट विपक्ष मज़बूत हो जाएगा, हो सकता है चुनाव भी जीत जाए।

तब मुंह से ज़बान गायब हो जाएगी, जिस मुंह से आज ‘राम राम राम’ निकल रहा है, या जिस उंगली से ‘राम राम राम’ लिख रहे हो सोशल मीडिया पर वो उंगली भी गायब हो जाएगी।

भावनाओं को आज व्यक्त करने की जो आज़ादी है उसे डर से अपने मन में ही दबा कर बैठना पड़ेगा। फिर 5 साल ये सोचेंगे कि मंदिर कब बनेगा!

उसके बाद 5 साल और निकल जाएंगे… ऐसे ही 10 साल निकल जाएंगे, फिर हम सोचेंगे कि चलो बदलाव लाते हैं।

अब 10 साल बाद पता नहीं मोदी जी राजनीति में होंगे या नहीं, तो योगी को पीएम बनाया जाएगा। कुल मिला के 10 साल चुप चाप काट देंगे लेकिन अभी जरा सा सब्र नहीं है.

राम मंदिर के लिए लोग आज जितना उग्र हैं उतना ही 2004 में भी हो जाते? उतना ही 2007 में हो जाते? उतना ही 2009 में भी हो जाते? उतना ही 2012 में हो जाते?

2014 में तो मान लिया कि मंदिर के लिए वोट दिए थे… पर कितने वोट??? 17 करोड़… बस? क्या सिर्फ 17 करोड़ हिन्दू है? नहीं न? तो फिर बाकी हिन्दुओं ने वोट क्यों नहीं दिया? उनकी प्राथमिकताएं क्या थीं?

ढांचा गिराने पर साथ देने वाली सरकार को ही उखाड़ दिया और ऐसा उखाड़ कि 2017 में सरकार बन पाई। और उखाड़ने वाले कौन थे? अच्छा उखाड़ा तो उखाड़ा लेकिन बिठाया किसको? मुलायम को, वही जिसने राम भक्तों पर गोलियां चलवाई।

मुलायम को बिठाने कोई बाहर से लोग नहीं आए थे, यही हिन्दू ही थे, यूपी के हिन्दू। इनमें कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने भावनात्मक दुख के कारण वोट देना जरूरी ही नहीं समझा और अल्टीमेटली राम भक्तों पर गोली चलवाने वालों को सत्ता पर बिठा दिया… एक बार नहीं, 3 बार।

राम के खिलाफ कोर्ट में लड़ने वाला कौन? एक हिन्दू।

हिन्दुओं का एक बड़ा वर्ग किसी न किसी स्वार्थ के राम मंदिर नहीं चाहता, इसमें नेता इत्यादि शामिल हैं।

आज का युवा, जो अच्छे नामी गिरामी स्कूल कॉलेजों से पढ़ कर निकलता है, उससे पूछो राम मंदिर चाहिए? तो कहेगा हम लोग वहां स्कूल कॉलेज या अस्पताल नहीं बनवा सकते क्या? हिन्दू मुस्लिम को लड़ना ज़रूरी है?

राम मंदिर पर तारीख आगे बढ़ाने वाला जज, कांग्रेस सीएम का हिन्दू पुत्र लेकिन हम गाली देंगे मोदी को, भाजपा को वोट नहीं देंगे।

मै क्यों बार बार कहता हूं कि हमको खुद के गिरेबान में झांक के पूछना चाहिए कि हम कहां खड़े हैं? इसीलिए। राम मंदिर न बन पाने की वजह भी कोई और नहीं हम ही हैं। हम चाहे लाख मोदी या भाजपा को गरिया लें लेकिन सच्चाई ये है कि हम स्वार्थी हैं, लालची हैं। कोई फ़्री लैपटॉप या आटा दाल चावल देगा तो उसकी सरकार बनवा देंगे, चाहे वो राम भक्तों का हत्यारा ही क्यों न हो!

मोदी या भाजपा मंदिर नहीं बनाएगी, मंदिर हमको आपको संगठित हो कर ही बनाना पड़ेगा, हां… मोदी/ योगी/ भाजपा सरकार हमारी मदद करेगी। लॉ एंड ऑर्डर मेनटेन करेगी।

मेरा सिर्फ इतना ही कहना है, मोदी पर भरोसा किया है तो उसको बनाए रखिए। मोदी नहीं बनवाएगा तो कोई और भी नहीं बनवाएगा। और हिन्दू इतना संगठित नहीं है कि स्वयं मंदिर बनवा सके।

सब्र कीजिए, मंदिर वहीं बनेगा और बहुत जल्द बनेगा। आवाज़ उठाई है तो अब इसको दबने नहीं देना है हम लोगों को. विपक्ष द्वारा बुने गए जाल में नहीं फंसिए, विपक्ष ने इसको भाजपा का राजनैतिक मुद्दा बना दिया है, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि इससे भाजपा को लाभ होता है।

सभी हिन्दुओं की प्राथमिकता अलग अलग हैं। अगर प्राथमिकताओं को क्रमवार रखा जाए तो इतना यकीन के साथ कह सकता हूं कि 17 करोड़ के अलावा बाकी सारे हिन्दुओं की प्राथमिकताओं में राम मंदिर होगा लेकिन पहले नंबर पर नहीं होगा.

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