भाजपा की बैटिंग हो तो विपक्ष ही नहीं, मीडिया भी करने लगता है फील्डिंग

जब भाई कन्हैया ने गुरु गोविन्द सिंह जी के सामने धर्म सेवा के लिए खुद को पेश किया और सेवा की आज्ञा माँगी, तो गुरु जी उन्हें कहा कि तुम युद्ध में घायलों को पानी पिलाना।

उसने सहर्ष यह आज्ञा मान ली। बाद में गुरु जी के कुछ सैनिकों ने शिकायत की जिस आदमी को अपने घायलों को पानी पिलाने के लिए कहा, वह तो दुश्मनों के सैनिकों को भी पानी पिला रहा हैं।

तब गुरु जी ने उस बंदे को बुला कर पूछा तो उसने हाथ जोड़ कर कहा, आपने घायलों को पानी पिलाने के लिए कहा, न कि अपने पराये को, सो मैं आपका हुक्म कैसे टाल सकता हूँ?

यह सुन कर गुरु साहिब ने उसे गले लगाया और बाकी लोगों को इससे प्रेरणा लेने की सलाह दी।

सिख संगठनों द्वारा रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में या केरल फ्लड के दौरान लंगर सेवा करने के लिए अनेक मित्रों द्वारा आलोचना की गई थी।

इस मामले में असहमत होते हुए भी मैंने इसलिए विरोध नहीं किया क्योंकि कई बार देखा गया है कि तात्कालिक समय बहस करने की अपेक्षा बाद में शांति से उसी विषय पर बात की जाए तो नतीजा अलग होता हैं।

मेरी असहमति का कारण मात्र यह है कि सिखिज़्म में लंगर चलाना, खासकर किसी आपदा में लंगर चलाना सामान्य फ़र्ज़ माना जाता है। दूसरा यह कि लंगर गुरुद्वारों से भी चलाया जा सकता और किसी संगठन के माध्यम से या निजी तौर से भी। लंगर सेवा में यह नहीं देखा जाता कि खाने वाले किस धर्म के हैं।

अतीत में सिक्खों की मुगलों संग लड़ाइयां एक बात हैं लेकिन इस आधार पर लंगर चलाना नहीं रोका जा सकता। क्योंकि यह परंपरा के महान कद के सामने पूर्वाग्रह का तुच्छ सा प्रतीक भर है, जिसकी तुलना नहीं की जा सकती। वहां सिक्ख संगठन न भी जाते तो मिशनरी पहुचती, इसे रोका नहीं जा सकता है।

अब जैसे ही सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर राष्ट्रवादियों ने सिक्ख संगठन के खिलाफ मोर्चा खोला वैसे ही दूसरा पक्ष सक्रिय हो गया! व्हाट्सएप पर ऐसे वीडियो शेयर होने लगे जिसमें मुस्लिमों द्वारा सिक्खों की जम कर प्रशंसा की जा रही हो या ऐसे वीडियो जिसमें हिन्दुओं द्वारा सिक्खों के लंगर चलाने के खिलाफ आलोचना की जा रही हो। यानी ऐसा बैक ग्राउंड बनाना जिसमें हिन्दुओं को संगदिल घोषित किया जा सके।

इसी कड़ी में रविश कुमार ने भी बहती गंगा में डुबकी लगा दी। बँगला साहिब गुरुद्वारा पर एक प्रोग्राम बना कर सिक्खों के लंगर चलाने की तारीफें कर दी और उसी समय रामलीला मैदान पर धरना दे रहे लोगों से कहलवाया कि कैसे उन्हें गुरुद्वारों से लंगर पानी मिल रहा हैं। या कैसे वहाँ बाहर से आकर एक्जाम/ इंटरव्यू की तैयारी करने वाले भी गुरुद्वारों में लंगर खा कर दिन गुजार रहे हैं।

यानी अपनी तरफ से ऐसा माहौल बनाना जैसे कि मुस्लिमों की मदद सिक्ख कर रहे हैं और हिन्दुओं को बुरा लग रहा हैं क्योंकि हिन्दू साम्प्रदायिक होते हैं या ऐसा कि इस सरकार में कैसी असहिष्णुता बढ़ गई हैं। स्वभाविक हैं ऐसे प्रोग्राम NRI विदेशों में खूब प्रचारित करेंगे।

तो भाइयों, इस लड़ाई में जिस पिच पर भाजपा बैटिंग कर रही है वहां कैच पकड़ने के लिए समस्त विपक्ष ही नहीं मीडिया भी फील्डिंग में लगी हुई है, इसलिए तात्कालिक लाभ को न देखते हुए दीर्घकालिक नुकसान पर भी आंकलनलन कर लेना चाहिए। भाजपा से दूरी बनवाने के लिए सिक्खों को यथासंभव भड़काने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा है।

ना आरक्षण चाहिए, ना अलग प्रदेश! सबकुछ अपने स्वालंबन से पाने की ज़िद!

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