वामपंथ : रक्तपात करके भी बुद्धिजीवी बने रहने की कला

भारत में कम्युनिस्ट के अलग अलग धड़े अपने वर्चस्व के लिए भी खूनी लड़ाई करते आए हैं… ये लड़ाई अक्सर ऐसे परिदृश्य और ऐसे मामलों की आड़ में खेली गई कि लोगों का ध्यान नहीं गया।

कम्युनिस्टों के वर्चस्व की लड़ाई में हज़ारों आम लोग मारे जा चुके हैं… ये सारे धड़े एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं… आज इनके तरीके और इन लड़ाइयों में अपना योगदान देकर भी बुद्धिजीवी बने रहने की ललित कला रचने वालों को उजागर किया जाएगा।

नन्दीग्राम याद है?… नहीं याद तो बताते हैं… पश्चिमी बंगाल में जब मुख्यमंत्री थे बुद्धदेब भट्टाचार्य तब CPI(M) की सरकार ने इंडोनेशिया के सलीम ग्रुप के साथ पश्चिम बंगाल में उद्योग लगाने के लिए करार किया।

दूसरों पर उद्योगपतियों से सांठ गाँठ का आरोप लगाने वाले कम्युनिस्टों ने सलीम ग्रुप को फायदा पहुँचाने के लिए किसी औद्योगिक इलाके में जगह देने की जगह उनके लिए एक SEZ (स्पेशल इकॉनोमिक ज़ोन) की स्थापना की घोषणा की, जिससे सलीम ग्रुप अगले 7 वर्षों तक सारे tax benefit लेते हुए आराम से काम करे।

इसके लिए बड़ी रकम ताक पर थी… माओवादी संगठनों ने भी लेवी का डिमांड किया जिसको CPI(M) ने ठुकरा दिया…

नन्दीग्राम में SEZ के लिए ज़मीन अधिग्रहण किया गया… वहां के रहने वालों ने भूमि रक्षा समिति के बैनर तले इसका विरोध किया, उचित मुआवज़ा और बसने की जगह को लेकर सरकार को ज्ञापन दिया।

इस विरोध का फायदा उठाते हुए माओवादियों ने एक संगठन बनाया ‘भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी’ यानी कि BUPC… इस BUPC को समर्थन देने के लिए मेधा पाटकर, अरुंधति रॉय, महाश्वेता देवी, कबीर सुमन आदि ने दिसम्बर 2006 से ही नन्दीग्राम में डेरा डाल दिया और कई अन्य आने जाने लगे। इन लोगों ने माओवादियों को पूरी तरह से पटकथा तैयार करके दी… SEZ के विरोध को अब माओवादियों ने अपने हाथ में ले लिया।

इधर CPI(M) सरकार को इस सारे मामले का पता था… उन्होंने तैयारी कर ली… फरवरी 2007 में नंदीग्राम को आंदोलनकारियों से खाली कराने के लिए CPI(M) सरकार ने 3000 से ऊपर हथियारबन्द पुलिसकर्मी उतारे।

असल में वो पुलिसकर्मी नहीं बल्कि CPI(M) की पालतू गुण्डा आर्मी ‘हर्मद बाहिनी’ के लोग थे… हर्मद बाहिनी के जवाब में माओवादियों ने दण्डकारण्य से लड़ाके बुला लिए।

अब नंदीग्राम में खूनी संघर्ष शुरू हुआ… सैकड़ों लोगों की जान चली गई… सरकारी आंकड़ों में 14 लोग मृत दिखाए गए… लेकिन 2012 के नन्दीग्राम की एक दिन के यात्रा में 57 गायब लोगों के बारे में वहां के लोगों ने खुद बताया।

खूनी लड़ाई के बाद माओवादी छिप चुके थे… कई दिनों तक हर्मद बहिनी के लोगों ने पूरे इलाके की घेराबंदी करके रखी… पुलिस के भेस में इनके चेक पोस्ट थे… महीनों तक किसी को आने नहीं दिया गया।

लड़ाई के समय प्रेस और चैनल वालों को मार पीट के भगा दिया गया था… 2 चैनल के लोगों को बंधक बनाकर 4 दिन बाद पीट पीट कर छोड़ा गया… इसके बाद किसी प्रेस/ रिपोर्टर/ चैनल की हिम्मत नहीं हुई उधर जाने की।

इस मामले पर तब के पश्चिम बंगाल के गवर्नर गोपाल कृष्ण गाँधी ने रिपोर्ट भेजी थी… फॉरेंसिक रिपोर्ट में साफ़ था कि चलाई गई गोलियाँ सरकारी नहीं थी और बहुत सारी गोलियाँ प्रतिबन्धित हथियारों से चलाई गई थी जो तस्करी के जरिए भारत में लाए गये होंगे।

इस लड़ाई में 3200 के ऊपर आम गांववासियों को वहां से खुद से भागना पड़ा और कई वर्षों तक अपने ही घर से निष्कासित जीवन जीना पड़ा… इनको वापस नहीं लौटने के लिए दोनों तरफ से धमकी थी… BUPC और हर्मद बाहिनी दोनों ने फरमान जारी किया था कि जो आएगा वो मरेगा।

कुछ माह बाद सब ऊपर ऊपर से शांत होने के बाद नवम्बर में जब कुछ नंदीग्राम वासी लौटे तो उनको BUPC और हर्मद बहिनी ने पकड़ पकड़ के मारा… BUPC इसलिए मारती थी क्योंकि ये लोग अच्छे मुआवज़े और जगह मिलने पर SEZ के लिए जमीन देने को राज़ी हो जाते और माओवादी अपने लेवी छोड़ नहीं सकते थे… हर्मद बाहिनी इसलिए मारती थी कि वो इन सबको BUPC का समर्थक मानती थी।

सैकड़ों आम नंदीग्राम वासी इन दोनों की जंग में मारे जा चुके थे… उस समय की CPI(M) सरकार के सहयोगी Revolutionary Socialist Party के अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री क्षितिज गोस्वामी ने कहा था कि पहले दिन ही 50 लाशों को ढोकर ले जाते उन्होंने खुद देखा था… लेकिन फिर भी वो सरकार के साथ बने रहे… जाहिर है कि बड़ा पैसा दांव पर था।

BUPC समर्थक गैंग – मेधा पाटकर, अरुंधति रॉय, अपर्णा सेन, ऋतुपूर्णों घोष, सुवाप्रसन्ना, बिभास चक्रबोर्ती, महाश्वेता देवी आदि बुद्धिजीवी…

हर्मद बाहिनी के आका – पूरा CPI(M,) बुद्धदेब भट्टाचार्य, इंद्रजीत बनर्जी, सीताराम येचुरी, बिमान बोस आदि कम्युनिस्ट नेता…

सबरीमाला प्रकरण में मुझे वही दिख रहा है… पिनरई विजयन ने पुलिस के नाम पर कम्युनिस्ट गैंग की ‘हर्मद बाहिनी’ जैसा गैंग खड़ा कर रखा है… जबकि बुद्धिजीवी माओवादी गैंग अयप्पा स्वामी के मंदिर में घुसकर उसको अपवित्र करने की कोशिश कर रहा है… आम हिन्दू लोगों पर दोनों का अत्याचार हो रहा है।

अराजकता इनकी खाद है, दंगे इनका विटामिन और लाशें इनका पौष्टिक आहार!

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