टोंटी चोर काँग्रेस!

2014 में तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने बताया कि राफेल डील वे प्रलंबित छोड रहे हैं क्योंकि भारत के खज़ाने में उसके लिए पर्याप्त धन था ही नहीं!

ध्यान रहे, कई लाख करोड रुपयों के कर्जे माल्या, मोदी-चोकसी इत्यादि धन्नासेठों को दिलवा कर कांग्रेस अब खाली डिब्बा बजा-बजा कर खुद के निर्धन होने का राग अलाप रही थी!

ये वही सरकार थी जिसने राजस्व संग्रहण के कई उपाय अपने नेताओं और चेले-चपाटों के निजी लाभ के लिए जान बूझ कर गंवाए थे।

ऊपर से 150000 करोड़ रुपयों के ऑइल बाण्ड्स जारी कर पेट्रोलियम उत्पाद तेल कंपनियों से लागत से कम कीमत पर बिकवाए थे, ताकि जनता समझे, मनमोहन सिंह बडे सूरमा अर्थशास्त्री हैं, सब कुछ बगैर जनता को कष्ट दिए सम्हाल लेते हैं।

2G, 3G और कोयला खदाने आवंटन घोटाले मूलतः संभावित सरकारी राजस्व की हानि कर के इन संसाधनों को अपने चहेते लोगों में बंटवाने की कवायद थी।

प्रफुल्ल पटेल ने एअर इंडिया से कई अरब रुपए के फालतू विमान खरीद के अनुबंध करवा कर अच्छी खासी चलती कंपनी को कर्ज के ढेर के नीचे दबाया, और साथ ही साथ एअर इंडिया के सबसे अधिक लाभकारी रूट्स निजी कंपनियों को दे दिए!

खुद राजमाता और युवराज ने कांग्रेस के बुजुर्गों से मिलकर नैशनल हेराल्ड की संपत्ति कौड़ियों के दाम अपने नाम कर ली!

कुल मिलाकर कांग्रेसी 2014 आते आते ऐसी लूट खसोट में जुड गए थे जैसे उन्हें पता था कि वे इस बार सत्ता गँवाने वाले है, और उनके गैरजिम्मेदाराना निर्णयों के परिणाम वे खुद नहीं, बल्कि आगामी भाजपा सरकार भुगतेगी। इसलिए वे पहले से ही भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी करने में जुट गए थे।

थोडा गंदा उदाहरण दें तो यह कांग्रेसी हरकत ऐसी थी जैसे कोई पाखाने जा कर बाद में जान बूझ कर फ्लश न करे, ताकि बाद में इस्तेमाल करनेवाले को परेशानी हो!

यह वही मानसिकता है जो सालभर पहले सरकारी आवास छोडते हुए विदेशी विद्या विभूषित अखिलेश यादव ने टोंटियाँ, लाइट गोले चुरा कर, टाइल्स तोडकर दर्शाई थी। लेकिन इससे तुलनात्मक रूप से कई करोड गुना अधिक गंभीर!

मोदी जी के आने पर उनको यह गंद साफ करनी पडी!

घटते कच्चे तेल के दामों के साथ पेट्रोल की कीमतों को कम न करा कर उस बढे राजस्व से तेल कंपनियों के कर्जे चुका दिए। तेल के स्ट्रैटिजिक रिज़र्व बनाए।

कांग्रेसियों को यह बात समझ में नहीं आती हो, ऐसा कतई नहीं है। पर उनका रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। वे बस कच्चे तेल के दाम के अनुपात में पेट्रोल के दाम घटाने के लिए चिल्ला रहे थे।

नोटबंदी से अर्थव्यवस्था के सारे छुपे रुस्तम ऐसे बाहर निकल आए जैसे दिवाली के सफाई में तिलचट्टे निकल आते हैं! इसका परिणाम टैक्स बेस बढने में हुआ, जिससे सरकारी राजस्व कई गुना बढा। राहुल गांधी और कांग्रेस इस के विरोध में फटी जेब दिखाने की टुच्ची राजनीति करते रह गए।

जीएसटी का प्रस्ताव कांग्रेस के कार्यकाल का था। लेकिन तथाकथित अर्थशास्त्र विद्वान मनमोहन सिंह और सर्व शास्त्र पंडित चिदंबरम इस उसके क्रियान्वयन तक ले नहीं जा पाए। कारण सारे राज्यों को एकसाथ ला कर आम सहमति बनाकर उनको इस के लिए मनाना, और इस विषय की हजारों पेचीदगियों को सुलझाना टेढ़ी खीर थी।

मोदीजी ने जीएसटी लागू करवाया। कांग्रेसी प्रतिक्रिया? छोटे व्यापारी के नाम पर हुआं हुआं करना! छोटा व्यापारी पहले से ही जीएसटी से मुक्त था। पर कांग्रेसी विरोध के चलते राजनीतिक दबाव में कई फालतू रियायतें देनी पडी जो आज जीएसटी की कमियां बन उभरी हैं।

मोदी कार्यकाल में ही 3G और कोयला खदानों के पुनः आवंटन में जो रकम खड़ी की गई वह राफेल डील से कई गुना अधिक है। लेकिन क्या कारण है कि मोदीजी यह कर पाए, लेकिन कांग्रेस नहीं?

मैं एक अंतिम उदाहरण दे कर रुकता हूँ।

आज राफेल डील लगभग 60 हजार करोड़ रुपए की है। कांग्रेस के कार्यकाल में इससे कई गुना अधिक का ऋण व्यापारी और उद्योगपति दबाकर बैठे हुए थे। पर भुगतान कोई नहीं कर रहा था। कारण? सरकारी संलिप्तता!

मोदीजी के IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) लाने के साथ ही स्पष्ट हो गया कि अब पैसा डकार कर आराम से नहीं रह सकेगा कोई! एक एक कर कंपनियाँ छिन जाने के डर से भुगतान के लिए राजी हो गई।

वसूली का अंदाज आप इस से लगा लीजिए कि 54 हजार करोड़ रुपए एक अकेली एस्सार स्टील वापस कर रही है। यह रकम आज के राफेल डील का 90 प्रतिशत है!

आज के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में एक तरफ पारिवारिक व्यापार की तरह चलाई जानेवाली क्षेत्रीय पार्टियाँ हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस है जो अपने स्वार्थ के लिए एकत्रित आपराधिक प्रवृत्ति के दुष्टों का एक गिरोह है जिसको देश के प्रति कोई लगाव नहीं है। “अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता” उनका घोषवाक्य है!

इसलिए मुझे आज राष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर मोदीजी के अतिरिक्त ऐसा कोई व्यक्ति नजर नहीं आता जो देश के हितों के प्रति न केवल सजग है, समर्पित है, बल्कि उनकी रक्षा के लिए समर्थ भी है।

इसी कारणवश मेरी आप से विनती है कि अपना घर टोंटीचोरों को किराए पर न चढाएं, कांग्रेसी कबाड़ियों के हाथों में न दें। मोदीजी ने इन पांच वर्षों में साफसफाई तो कर ही दी है, अगले पांच सालों में वे उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देंगे।

नेशनल हेराल्ड – तिगुनी परेशानी!

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