इन आस्तीनी सांपों की बिलबिलाहट देखकर बहुत संतुष्ट होगी अटलजी की आत्मा

स्वयं को छुट्टी पर भेजे जाने और अपने खिलाफ जांच को रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आलोक वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बेआबरू होकर वापस लौटना पड़ा है।

उसको छुट्टी पर भेजने और उसकी करतूतों की जांच करने के सरकार के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है। उसकी मदद के लिए प्रशांत भूषण द्वारा दायर की गई ऐसी ही याचिका का भी यही हश्र हुआ है।

लेकिन आज के फैसले ने अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा की तिकड़ी के मुंह पर भी कालिख पोती है। यह तिकड़ी पिछले 3 दिनों से NDTV, INDIA TODAY सरीखे न्यूज चैनलों पर सुबह दोपहर शाम बैठकर राफेल और आलोक वर्मा को लेकर राहुल गांधी द्वारा अलापे जा रहे फूहड़, अभद्र, अश्लील आरोपों को राहुल गांधी के पालतू चाकर की तरह गा और दोहरा रही थी।

ऐसा करते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ इस तिकड़ी की तिलमिलाहट बिलबिलाहट देखने लायक होती थी।

मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस तिकड़ी की यह तिलमिलाहट, बिलबिलाहट देखकर स्व. अटल जी की आत्मा अत्यन्त सुखी, संतुष्ट और प्रसन्न हो रही होगी। नौजवान पीढ़ी के मित्र सम्भवतः मेरी बात का मर्म नहीं समझें इसलिए स्पष्ट करता हूं।

ध्यान रहे कि यह तिकड़ी अटल जी की सरकार में कैबिनेट मंत्री की कुर्सी पर काबिज़ रही थी। लेकिन अटल जी की मर्जी से नहीं बल्कि जग कुख्यात हो चुके ‘फूफा’ की ज़हरीली ज़िद के कारण।

अपने उस सरगना के नेतृत्व में अपनी करतूतों से इस तिकड़ी ने अटल की की नाक में दम किस तरह किया था, यह सच उस दौर की राजनीति और मीडिया के गलियारों में खुलकर गूंजता था। 2004 में अटल जी की सत्ता से विदाई में इस तिकड़ी की करतूतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

दरअसल यह तिकड़ी अटल जी की सरकार और भाजपा की आस्तीन में पल रहे सांपों के समान ही थी। अपनी बात को एक तथ्य से और अधिक स्पष्ट किये देता हूं।

अटल जी ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि उनके सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे यह धूर्त कश्मीर पाकिस्तान को दे देने और अफ़ज़ल गुरु, याकूब मेमन सरीखे आतंकवादियों की सज़ा ए मौत माफ कर देने की मांग खुलेआम करने वाले, भारतीय सेना को गालियां देनेवाले देशघाती प्रशांत भूषण के कंधे से कंधा मिलाकर भाजपा की सरकार की जड़ें खोदने, उसमें ज़हर भरने का का काम करेंगे।

आप मित्रों ने कभी सोचा कि 2G, कोलगेट, कॉमनवेल्थ, थोरियम समेत लाखों करोड़ के यूपीए के घोटालों के खिलाफ जांच की मांग को लेकर अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा या शत्रुघ्न सिन्हा उसी तरह CBI, CVC, CAG या सुप्रीम कोर्ट तक कभी क्यों नहीं गए जिस तरह आजकल राफेल के लिए इन सभी जगह के चक्कर लगा रहे हैं?

इस सवाल का जवाब इस तिकड़ी को देना ही होगा.?

जरा ध्यान दीजिए और याद करिये कि 2004 से 2014 तक चले कांग्रेसी यूपीए के सर्वकालीन सर्वाधिक भ्रष्ट शासनकाल के खिलाफ शौरी-सिन्हा-सिन्हा की यह तिकड़ी कितनी बार धरने पर बैठी थी?

इस तिकड़ी ने मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और उनकी उस महाभ्रष्ट यूपीए सरकार के खिलाफ कितनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी?

लेकिन स्व. अटल जी की आत्मा आज यह देखकर अत्यन्त सुखी, संतुष्ट और प्रसन्न होगी कि अपनी सरकार और संगठन (भाजपा) की आस्तीनों में पलते रहे जो सांप उनको बार बार, लगातार डसते रहे उन सांपों के फनों को नरेन्द्र मोदी ने बहुत निर्ममता से कुचला है और उनके विषदंतों को बहुत निर्दयता से तोड़ा है। इसीलिये ये सांप अब तिलमिला बिलबिला रहे हैं।

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