अरे बेशर्मों, कुछ तो शर्म करो

आप क्या यह जानते हैं कि जिस चारा घोटाले के 4 मामलों में सज़ा पाकर आजकल लालू यादव को जेल में अपने दिन गुजारने पड़ रहे हैं उस चारा घोटाले की सम्पूर्ण जांच करनेवाले CBI अधिकारी का नाम यूएन बिस्वास था।

उस समय यूएन बिस्वास CBI में ज्वाइंट डायरेक्टर थे। उन्होंने जांच पूरी होने के बाद अपनी जांच रिपोर्ट CBI को सौंप दी थी। लेकिन CBI ने जब अदालत में चार्जशीट दाखिल की तो उसमें से लालू यादव का नाम ही गायब कर दिया था।

ऐसा इसलिये हुआ था क्योंकि CBI ने अदालत के समक्ष यूएन बिस्वास की रिपोर्ट प्रस्तुत ही नहीं की थी। इसके बजाय उनके वरिष्ठ अधिकारी रंजीत सिन्हा द्वारा गढ़ी गयी एक रिपोर्ट को CBI ने अदालत के सामने प्रस्तुत किया था।

CBI द्वारा की जा रही इतनी बड़ी ठगी और धोखाधड़ी को देख स्वयं यूएन बिस्वास ने ही न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर CBI द्वारा की जा रही इस धोखाधड़ी से न्यायालय को अवगत कराया था।

इसपर न्यायालय ने तत्कालीन CBI निदेशक को बुरी तरह फटकारते हुए यूएन बिस्वास से उनकी रिपोर्ट मांग ली थी जिसे उन्होंने सीधे न्यायालय को सौंप दिया था।

कल्पना करिए कि यदि यूएन बिस्वास ने यदि उस समय अदम्य नैतिक साहस का परिचय नहीं दिया होता तो क्या होता?

जिस समय लालू को बचाने के लिए CBI यह शर्मनाक खेल खेल रही थी उस समय केंद्र में कांग्रेस के इशारों पर नाचने वाली भाजपा विरोधी संयुक्त मोर्चा की लंगड़ी-लूली खिचड़ी सरकार थी, जो कांग्रेस के 146 सांसदों के निर्णायक समर्थन के सहारे ही चल रही थी।

उल्लेख यह भी ज़रूरी है कि उस समय जिस रंजीत सिन्हा ने लालू को बचाने के लिए मनमानी रिपोर्ट गढ़ी थी, उसी रंजीत सिन्हा को 2012 में राहुल-सोनिया-मनमोहन की तिकड़ी वाले कांग्रेसी यूपीए की सरकार ने CBI का डायरेक्टर बनाकर सम्मानित और पुरुस्कृत किया था।

15 हज़ार निर्दोष नागरिकों का नरसंहार करनेवाले भोपाल गैस कांड की जांच जिस CBI के तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर बीआर लाल ने की थी उन्होंने सार्वजिनक रूप से बताया था कि उस नरसंहार के मुख्य जिम्मेदार वॉरेन एंडरसन के फरार होने के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हत्यारे एंडरसन के प्रत्यर्पण की कोशिश करने से CBI को रोक दिया था, और CBI द्वारा गिरफ्तार किए गए शेष अभियुक्तों के प्रति नरम रवैया अपनाने का आदेश दिया था।

इसके परिणामस्वरूप 15 हज़ार लोगों की मौत का जिम्मेदार होने के अपराध में CBI द्वारा गिरफ्तार किसी भी अपराधी को 2 वर्ष से अधिक की सज़ा नहीं हुई थी। याद दिलाना बहुत ज़रूरी है कि बीआर लाल ने जिस कांग्रेस सरकार का उल्लेख किया था उस कांग्रेस सरकार के प्रधानमंत्री राहुल गांधी के बाप राजीव गांधी ही थे।

आजकल CBI डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच चल रहा विवाद ना तो इतना गम्भीर है, ना ही इतना शर्मनाक।

इसलिए वर्मा अस्थाना विवाद पर चिल्ला रहे बेशर्मों कुछ तो शर्म करो। क्योंकि ऐसे कांग्रेसी कुकर्मों की सूची बहुत लम्बी है इसलिए ऐसे कुछ अन्य उदाहरणों वाली एक और लेख लिखूंगा।

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