शुरू हो गए कपड़े फटना, दीपावली से पहले उस हुड़दंगी होली का नज़ारा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल द्वारा चुने गए अधिकारियों ने CBI मुख्यालय की कमान सम्भाल ली है। इसे टीम डोभाल भी कह सकते हैं आप।

सरकार द्वारा छुट्टी पर भेज दिये गए CBI चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को आज CBI मुख्यालय के दरवाज़े पर ही रोक दिया गया।

दोनों अधिकारियों के कमरे और कम्प्यूटरों को टीम डोभाल सवेरे से खंगाल रही है। बड़ी संख्या में दिल्ली में डटे CBI अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर कर दिया गया है।

आज सवेरे सवेरे सबको चौंकाते हुए सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई इस कार्रवाई पर CBI चीफ आलोक वर्मा के पक्ष में प्रशांत भूषण, अरुण शौरी, काँग्रेस और ‘द वायर’ वेबसाइट ने खुलकर अपनी छाती कूटनी शुरू कर दी है। उससे इस जंग के असली कारणों तथा उन कारणों के ज़िम्मेदारों के कपड़े फटने शुरू हो गए हैं। यह जिम्मेदार देश के सामने बहुत जल्दी नंगे होनेवाले हैं।

प्रशांत भूषण, काँग्रेस और ‘द वायर’ वेबसाइट की करतूतों और कुकर्मों के बारे में कुछ लिखना तो सूरज को दिया दिखाने समान होगा।

लेकिन कुछ ही दिन पहले एक पंचतारा होटल की 11वीं मंजिल पर बने कमरे में अरुण शौरी और प्रशांत भूषण के साथ हुई CBI चीफ आलोक वर्मा की सीक्रेट मीटिंग का सच क्योंकि उजागर हो चुका है। इसलिए CBI चीफ को उस मीटिंग का कारण और एजेंडा बताना ही होगा।

CBI चीफ आलोक वर्मा के पक्ष में आज सवेरे से ही सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपनी छाती कूटने में सबसे आगे अरुण शौरी के विषय में भी यह याद दिलाना बहुत जरूरी है कि एनडीए सरकार में अडवाणी का प्रियपात्र होने के कारण शौरी साहब को एक नया मंत्रालय (विनिवेश मंत्रालय) गठित कर उसका मंत्री बनाया गया था।

इस मंत्रालय को काम सौंपा गया था घाटे वाले सरकारी उपक्रमों को बेचने का। मंत्रालय संभालते ही शौरी साहब ने कमाल दिखाना शुरू किया था। उदयपुर स्थित उस भव्य सरकारी होटल लक्ष्मी विलास पैलेस को केवल 7.52 करोड़ में ‘दिल्ली’ के एक घराने को बेच डाला था जिस लक्ष्मी विलास पैलेस होटल की केवल जमीन मात्र की कीमत उस समय की सरकारी दरों (सर्किल रेट) के अनुसार 151 करोड़ रूपए थी।

इसी तरह मुंबई के जिस सेंटूर एयरपोर्ट होटल को शौरी साहब के विभाग ने केवल 83 करोड़ में फिर से ‘दिल्ली’ के ही एक मशहूर घराने को बेच दिया था, उसे केवल 5 महीने बाद ही उस घराने ने 115 करोड़ रूपए में ‘सहारा’ परिवार को बेच कर 32 करोड़ मुनाफा कमा डाला था। तब यह चर्चा खूब गर्म रही थी कि 115 करोड़ की रकम तो कागज़ी सौदे की है, इस रकम के अलावा नंबर दो में 150 करोड़ और वसूले गए हैं।

इन सब मामलों को यूपीए सरकार में CBI को सौंपा भी गया था। लेकिन 10 वर्षों तक CBI खामोश ही रही। लेकिन मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सत्ता संभालने के बाद सरकारी सम्पत्तियों की ऐसी खुली लूट से सम्बंधित CBI की फाइलों की धूल झाड़कर उन्हें खोला जाने लगा।

परिणामस्वरूप इस कार्रवाई की चपेट में उदयपुर के उस लक्ष्मी विलास पैलेस होटल की सरकारी लूट भी आ गई। शौरी साहब के उस समय के सर्वाधिक निकट और विश्वस्त नौकरशाह सिपहसालार रहे प्रदीप बैजल के खिलाफ 29 अगस्त 2014 को CBI ने केस भी दर्ज़ कर लिया था।

मुझे तो उम्मीद थी कि दीपावली के कुछ पहले ही यह लोग नंगे होंगे लेकिन ससुरों ने आज ही से अपने कपड़े खुद ही फाड़ने प्रारम्भ कर दिए हैं। अब तो यह लग रहा है कि दीपावली से पहले उस हुड़दंगी होली का नज़ारा दिखने लगेगा जहां कपड़े फाड़े जाते हैं।

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