हंसराज हंस के सूफी गायन से गूंज उठी भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियां

दो दिवसीय नर्मदा महोत्सव के समापन पर बिखरे कला और संस्कृति के रंग

संगमरमरी सौंदर्य के लिए विश्वविख्यात भेड़ाघाट में दो दिवसीय नर्मदा महोत्सव के समापन पर लोक नृत्यों और सूफी गायन का श्रोताओं और कला रसिकों ने जमकर लुत्फ उठाया।

शरद पूर्णिमा के चंद्रमा की अमृत किरणों से नहाई भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों का सौंदर्य भी आज प्रकृति-प्रेमियों के लिए अद्भुत नजारा पेश कर कर रहा था।

नर्मदा महोत्सव के दूसरे दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध हंसराज हंस का सूफी गायन था।

परम्परागत रूप से नर्मदा पूजन के बाद शुरू हुए दूसरे दिन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज मोती शिवहरे के निर्देशन में नवरंग कथक कला केन्द्र के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत देवी वंदना नृत्य से हुआ।

संगीत नाटक अकादमी की ओर से चन्द्रमोहन ठाकुर द्वारा साथी कलाकारों के साथ प्रस्तुत हिमाचल प्रदेश के सिरमौरी नाटी नृत्य ने दर्शकों को झूमने मजबूर कर दिया।

हंसराज हंस के गायन का श्रोताओं को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा। सूफी गायकी के क्षेत्र में अलग पहचान बनाने वाले हंस ने गायन की शुरूआत अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज की अकीदत में “राखो मेरी लाज गरीब नवाज” प्रस्तुत कर की।

उन्होंने सूफियाना अंदाज में गज़लें भी पेश की और श्रोताओं के मन-मस्तिष्क को झंकृत कर दिया। फिल्म कच्चे धागे के गीत “इश्क दी गली विच कोई-कोई लंगदा” ने श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। उनके द्वारा पंजाबी अंदाज में प्रस्तुत किए गए गीतों ने भी श्रोताओं और कला रसिकों का दिल जीत लिया।

महोत्सव के दूसरे दिन शरद पूर्णिमा पर रंगबिरंगी आतिशबाजी भी दर्शकों के बीच आकर्षण का केन्द्र रही। आज महोत्सव के पहले दिन की अपेक्षा कहीं ज्यादा कला रसिक गीत-संगीत और लोक नृत्यों का लुत्फ उठाने भेड़ाघाट पहुंचे थे।

नर्मदा महोत्सव के दूसरे और समापन दिवस के कार्यक्रमों के मुख्य अतिथि पश्चिम मध्य रेल मण्डल के महाप्रबंधक अजय विजयवर्गीय थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संभागायुक्त आशुतोष अवस्थी ने की। इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती छवि भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक अमित सिंह, अतिरिक्त महाधिवक्ता आर.के. वर्मा एवं मण्डल रेल प्रबंधक मनोज सिंह भी मौजूद थे।

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