रविश बाबू, कौन सी जांच चल रही थी राफेल में?

CBI की शीर्ष लीडरशिप पर मचे घमासान पर सरकार/ PMO ने कड़ी कार्यवाही करते हुए दोनों टॉप अधिकारियों को पदमुक्त कर छुट्टी पर भेज दिया है…

इसके साथ ही एक कनिष्ठ अधिकारी नागेश्वर राव को कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है… तब तक के लिए, जब तक कि नए Director की नियुक्ति नहीं हो जाती।

इधर महान पत्रकार रविश कुमार का छाती पीट, कुर्ता फाड़ रुदाली गायन चालू है… रात के 12 बजे दिल्ली पुलिस ने बूट पहन के संविधान रौंद दिया… हाय! सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा तो राफेल के दस्तावेज़ जुटा रहे थे…

रविश बाबू… कौन सी जांच चल रही थी राफेल में?

किसके आदेश पर जांच कर रहे थे डायरेक्टर वर्मा?

सौदा तो दो सरकारों के बीच हुआ है… दस्तावेज़ या तो रक्षा मंत्रालय (Defense Ministry) में हैं या फिर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में… वर्मा जी किसके आदेश/ इशारे पर ये दस्तावेज़ जुटा रहे थे?

बाकी दस्तावेज तो Dasaault और फ्रांस सरकार के पास हैं! उनसे दस्तावेज़ जुटा रहे थे?

किस हैसियत से जुटा रहे थे?

निजी हैसियत से या फिर CBI के Director की हैसियत से?

दो सरकारों के बीच हुए करार/ सौदे के दस्तावेज़ क्या फ्रांस सरकार या Dassault कंपनी यूँ ही थमा देगी वर्मा जी को…

किसी राज्य में कोई अदना सा कांड हो जाए तो भी CBI या केंद्र सरकार अपनी मर्ज़ी से कोई जांच नही कर सकती जब तक कि संबंधित राज्य सरकार CBI जांच के लिए आवेदन न करे या अनुमति न दे…

CBI, PMO के अधीन एक विभाग है, CAG या चुनाव आयोग की माफ़िक़ कोई संवैधानिक Autonomous Constitutional Body नहीं। CBI, गृह मंत्रालय (MHA) और PMO के आदेश के बिना एक कदम भी नहीं उठा सकती… वो कोई Supreme Court भी नहीं है कि स्वतः संज्ञान ले के किसी मामले की जांच शुरू कर दे, दस्तावेज़ जुटाने शुरू कर दे…

तो बाबू रविश कुमार जी, मेरे जैसा एक अदना सा आदमी ये सामान्य बातें जानता है और इतने सवाल कर रहा है… आप तो NDTV जैसे चैनल के प्रधान संपादक हैं, आपके पास तो पूरा legal cell है, कानून के जानकारों की भारी भरकम टीम है… आपने ये सवाल क्यों नहीं पूछे?

किसके इशारे पर, किसके लिए राफेल के दस्तावेज़ जुटा रहे थे डायरेक्टर आलोक वर्मा?

रविश जी, मोदी सरकार के खिलाफ फ़र्ज़ी मामले बना के विपक्ष की भूमिका अदा करना बंद कीजिये… जो असली मुद्दा है उसे उठाइये।

वो देखिए Bishop Franco Mulakkal ने जमानत पर रिहा होते ही एक एक कर गवाहों को निपटाना शुरू कर दिया।

कल Nun Rape केस के एक मुख्य गवाह की हत्या हो गयी और इधर आप एक ऐसे घोटाले के दस्तावेज जुटा रहे जो हुआ ही नहीं!

शुरू हो गए कपड़े फटना, दीपावली से पहले उस हुड़दंगी होली का नज़ारा

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