डेंगू : तथ्य और भ्रांतियां, कुछ वैज्ञानिक सत्यापित तथ्य

1. डेंगू में प्लेटलेट्स की कमी मृत्यु का कारण नहीं होतीं।

2. डेंगू के सभी मरीजों में प्लेटलेट्स कम नहीं होतीं।

3. जिन मरीजों में कम होती हैं, ऐसा आरम्भ के 5 दिनों में होता है। फिर वे स्वतः बढ़ती जाती हैं।

अतः आप बेरी का पत्ता, आम का पत्ता, केले का पत्ता, पपीते का पत्ता कुछ भी विश्वास के साथ लेंगे तो आपको लगने लगेगा कि उसी से बढ़ी हैं।

4. इस मौसम में मेडिकल कॉलेज में हमने, बहुत से डेंगू मरीज़ देखे, उनमें से किसी को कोई दवा नहीं दी प्लेटलेट्स बढ़ाने की, सबके प्लेटलेट्स सामान्य हो गए। पुष्टि के लिये कुछ मरीज़ मेरी लिस्ट में भी हैं।
तो वे हमारे छूने से नहीं स्वतः ठीक हुए थे। उनके शरीर ने उन्हें ठीक किया था।

5. भारत सरकार, WHO, यूनिसेफ जैसी संस्थाओं की recommendations को सुना और माना करो। जो कि रेडियो, फिल्मों के बीच के एड्स, अखबारों में जागरूकता के लिए आती हैं। उसके अत्तिरिक्त जो भी होता है वह धारणा, भ्रम हो सकता है।

6. प्राकृतिक चिकित्सा, जड़ी बूटी, आयुर्वेद का बहुत महत्व है किंतु, यह अंधे हो कर नहीं किया जा सकता। लॉजिक्स देखने होंगे। साथ ही प्राकृतिक चिकित्सा के आगमन से लाखों वर्ष पूर्व से प्रकृति हमें स्वतः बचाती रही है। स्वतः ठीक होना भी आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा अथवा एलोपैथी के ख़िलाफ़ नहीं।

बहुत सी बीमारियों को समय के साथ हमारा शरीर स्वतः ठीक कर लेता है। किसी भी पद्धति के चिकित्सक का काम मात्र इस प्रक्रिया को सहयोग देना (supportive treatment) एवं स्थिति खराब तो नहीं हो रही, इस पर नज़र रखना है।

डेंगू में मृत्यु शॉक से (पानी रक्त में कम होने से) होती है, प्लेटलेट्स की वजह से नहीं। अतः प्लेटलेट्स का हौआ ही क्यों। यदि कोई दवा, कोई पत्ता, कोई दूध, प्लेटलेट्स बढ़ाता भी है (हालांकि यह सत्यापित नहीं) तब भी वह मरीज़ की मृत्यु की संभावना को कम नहीं करता क्योंकि डेंगू में मृत्यु का प्रमुख कारण शॉक है, न कि प्लेटलेट्स का कम होना।

प्लेटलेट्स पर फोकस, शॉक की मॉनिटरिंग और मैनेजमेंट से लोगों का, हेल्थ पर्सनल का ध्यान हटाता है एवं ट्रीटमेंट कॉस्ट को बढ़ाता है।

लोग डर से बड़े शहर भागने लगने लगते हैं और शुरुआती फ्लूइड मैनेजमेन्ट नज़रअंदाज़ हो जाता है।

7. कोई भी शोधकार्य एक मरीज़, दो मरीज़ की रैंडम रिपोर्ट के आधार पर नहीं होता क्योंकि बहुत से कारक outcome तय करते हैं। इसे सही ढंग से करने के लिए double blind randomized control trial की आवश्यकता होती है।

किसी भी बड़ी मेडिकल शोध संस्था, जर्नल, WHO protocol ने किसी भी प्लेटलेट्स बढ़ाने के दावे वाली दवा को न तो apporoove किया है, न ही रिकमेंड किया है।

8. गलत धारणाओं से बहुत सी जानें जाती हैं जिनका कोई डेटा नहीं होता। इस मौसम में मेरे क्षेत्र में रहने वाले एक 16 वर्षीय बच्चे की मृत्यु यूँ हुई। बहुत देर से लेकर पहुंचे मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल।

9. हमारे देश मे प्रकाशित होने वाले अधिकांश मेडिकल शोध एवं यहां किये जाने वाले मेडिकल शोध मात्र डिग्री लेने अथवा cv बेहतर करने के लिए होते हैं। जिनमें डेटा से मैनीपुलेशन होता है और सही methodology का समावेश नहीं होता।

मेडिकल रिसर्च अलग से एक बड़े कैरियर के रूप में यहां नहीं उभरा है। कुछ शोधपत्र पैसे लेकर प्रकाशित कर दिए जाते हैं। बहुत से शोधपत्र मात्र एक दूसरे की नकल होते हैं

मेरे स्वयं के काफी शोधपत्र हैं मेरे pg स्टूडेंट्स के साथ विभिन्न विषयों पर अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में। लेकिन मुझे पता है वे उस स्तर के नहीं कि उनकी जानकारियों को व्यवहारिक बनाया जाए। अतः इक्का दुक्का शोधपत्र के लिंक्स की जगह WHO प्रोटोकॉल, National Guidelines का इस्तेमाल, इलाज और लोगों की जागरूकता बढ़ाने में किया जाना चाहिए।

क्योंकि बहुत से लोग बकरी के दूध, पपीती से ठीक हो जाते हैं। (क्योंकि वे स्वतः ठीक होने ही थे) इस वज़ह से बाकी सभी भी यही मान रहे होते हैं ।

डेंगू मात्र उदाहरण है।

बच्चों के दांत निकलने से दस्त होते हैं।

कुछ सूंघ लेने से स्वाइन फ्लू नहीं होता।

मेरा टायफॉइड ठीक नहीं होता।

जैसी अनेकों भ्रांतियां समाज में हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से भारत के स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति पर दुष्प्रभाव डालती हैं।

भ्रांतियां बनती चली जाती हैं समय रहते उन्हें तथ्यों के साथ चैलेंज न करने पर।

अधिकांश लोग जो दिख रहा है उसके परे नहीं देख पाते क्योंकि वे इस फील्ड के नहीं।

मेरा प्रयास बस यही है।

इसका उद्देश्य किसी भी धारणा, व्यक्ति, समूह, पद्धति को कम आँकना या उलाहना देना नहीं।

उद्देश्य मात्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण के लिए प्रेरित करना है।

मैं मंशा के स्तर पर हर हेल्थ प्रोफेशनल की बेहद रिस्पेक्ट करता हूँ। वे अनभिज्ञ हो सकते हैं किसी खास तथ्य से, मैं भी हो सकता हूँ। किन्तु सबका उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना ही है।

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