हाँ मैं एक संन्यासी हूँ : साध्वी प्रज्ञा

मेरे बच्चे मुझे खींच रहे थे… मम्मा सुलाने चलो ना… हमें अकेले डर लग रहा है कमरे में… मम्मा…. और मैं जैसे पत्थर की मूरत सी बैठी थी… लग रहा था मेरा पूरा शरीर घावों से भर गया है… इतना अधिक कि अब उसमें संवेदना भी नहीं बची…. कुछ जीवंत था तो बस ये दो … Continue reading हाँ मैं एक संन्यासी हूँ : साध्वी प्रज्ञा