लाल-अस्सलाम का नारी देह चिंतन

ऊपर तस्वीर है कठुआ रेप केस में विरोध प्रदर्शनों के हीरो, तथाकथित सोशल एक्टिविस्ट जम्मू के तालिब हुसैन की, जिसने बीते 27 अप्रैल को जेएनयू की एक छात्रा का दिल्ली के बाटला हाउस इलाके के एक फ्लैट में बेरहमी से बलात्कार किया।

बलात्कार की शिकार लड़की के मुताबिक तालिब हुसैन जिसे जेएनयू में कठुआ रेप केस के चलते ‘Anti Rape Crusader’ के तौर पर जाना जाता है और स्थापित किया गया है। जिसे जेएनयू, एएमयू समेत कई बार कठुआ रेप केस औऱ गुज्जर-बक्करवाल समाज की सामाजिक हालात पर भाषण के लिए बुलाया जाता रहा है।

उसे 27 मार्च को जेएनयू में भाषण के लिए बुलाया गया था। पीड़िता जेएनयू छात्रा भी कार्यक्रम आयोजकों में से एक थी। जिसके बाद आरोपी ने पीड़िता लगातार संपर्क बनाये रखा। जिसमें आरोपी हमेशा पर्सनल इश्यू पर बातचीत पर ज़्यादा ज़ोर देता था। कई बार पीड़िता से निकाह के बारे में भी सवाल पूछता रहता था।

27 अप्रैल को जेएनयू कैंपस में एबीवीपी द्वारा ‘In the name of Love’ की स्क्रीनिंग के विरोध में पीड़िता समेत काफी लेफ्ट विंग के छात्र पुलिस स्टेशन में विरोध दर्ज कराने पहुंचे हुए थे।

पीड़िता के मुताबिक उस समय बलात्कारी तालिब हुसैन ने पीड़िता को 40 बार कॉल किया और जेएनयू कैंपस के गेट पर बुलाया। जहां वह पीड़िता का इंतज़ार रहा था। जब लड़की तालिब के पास पहुंची तो वो उसको लेकर बाटला हाउस की तंग गलियों में बने एक अपार्टमेंट में ले गया। जहां पर रेप विरोधी आंदोलनों के इस लाल-अस्सलामी हीरो ने पीड़िता के साथ ज़बरदस्ती बलात्कार किया।

पीड़िता के मुताबिक वह दर्द से चीखती रही, लेकिन वहशत में पागल यह बलात्कारी कामरेड ये कहते हुए रेप करता रहा कि वो उससे निकाह करेगा। पीड़िता के मुताबिक रेप के कई दिनों तक उसे शारीरिक दर्द झेलना पड़ा।

रेप के बाद भी आरोपी ने पीड़िता से संपर्क बनाये रखा जिसकी वजह से पीड़िता छात्रा पर इस बलात्कारी का खौफ ऐसा है कि पीड़िता ने अपनी तरफ से आरोपी का नाम उज़ागर नहीं किया है।

लेकिन संकेतों में उसने बलात्कारी की पहचान को उजागर करने के भरपूर आधार दे दिए हैं। मालूम हो कि बलात्कारी तालिब हुसैन इस बलात्कार से पहले भी रेप के आरोप में गिरफ्तार हो चुका है और फिलहाल बेल पर बाहर है।

यह है वामपंथियों का नारी-विमर्श और महिला-सरोकार। बलात्कार के केस में जेल जा चुका, ज़मानत पर बाहर घूमते एक वहशी दरिंदे को कठुआ जैसे मामले में बलात्कार के खिलाफ कथित आंदोलन में नायक बनाया जाता है और जेएनयू में न्योता देकर एक कामरेड लड़की का ही बलात्कार कराने का अवसर मुहैया कराया जाता है।

इसे #MeToo में निपटाने की कोशिश भी न करना साथी… यह बलात्कार है, बलात्कार! समझे न! और फिर तुम्हें ये क्यों नहीं समझ आएगा… क्योंकि तुम तो बलात्कार के खिलाफ कथित आंदोलनों में एक ज़मानती बलात्कारी को नायक गढ़ते हो, फिर उसे वामपंथी नारी-विमर्श के तहत जेएनयू की एक कामरेडन का बलात्कार करने का अवसर देते हो।

मुझ गरीब राष्ट्रवादी, कम्युनल का क्या साथी… हम तो बलात्कार से पीड़ित एक कामरेडन के साथ भी उसके न्याय की लड़ाई में एक हाथ तिरंगा, दूजे हाथ भगवा उठा लेते हैं।

सुन रहे हो न मानवता के बलात्कारी साथी!

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