सबरीमला : अब जो कट्टरता आ रही हैं, वे इस देश में बैठे सौतेलों की देन है

बहुत सालों पहले की बात है, मेरे एक रिश्तेदार की पत्नी की असमय मृत्यु हो गयी। एक दस-ग्यारह साल का बेटा था उनका, बेहद मधुर स्वभाव वाला। पिता ने पारिवारिक दबाव और पुत्र को माँ देने के मोह में शादी कर ली।

सौतेली माँ ने जिस दिन कदम रखा, उस दिन से उस बच्चे की नर्क की शुरुआत हो गयी। नयी माँ उसे खाना नहीं देती अक्सर। मार कई बार इतनी पड़ती कि वह हदस से बेहोश हो जाता।

पिता ने शादी तो पुत्रमोह के चक्कर में की पर दो रातों बाद ही पत्नीमोह में पड़ गया। अतः हस्तक्षेप नहीं करता। कभी दबे जबान में करता तो पत्नी प्यार से उंगलियाँ फिरा कर समझा देती कि वह तो बस बच्चे को सुधार रही है।

पड़ोसियों को दिखा तो उन्होंने बच्चे को खाना देना शुरू किया। वे यथासम्भव उसका ख्याल रखने की कोशिश करते। पर उस सौतेली माँ को यह भी नागवार गुजरा। उसने उस लड़के को जंजीर में बांध कर रखना शुरू कर दिया। एक -एक निवाले के लिये उस लड़के को चुभते शब्द और अपमान पीना पड़ता था। पड़ोसियों ने सौतेली माँ को भी समझाने की कोशिश की पर वह उल्टा उन्हीं पर चढ़ बैठती।

धीरे -धीरे बच्चा बड़ा हुआ। हर दिन अपमानित हुआ। और एक दिन चारा काटने वाला गंडासा उठाया और उस माँ के छोटे-छोटे टुकड़े किये प्यार से।

सनातन आज उस लड़के की तरह है । बार-बार अपमानित और अपने हक से वंचित।

सबरीमाला पर सरकार पिता की भांति रीढ़विहीन बैठी है। धर्म (पुत्र) के मोह में कुर्सी लेकर अब सत्ता(पत्नी) के मोह में आँखों पर पट्टी बांधी हुयी।

मैरी स्वीट और फातिमा जैसी माएँ हैं जिन्हें लग रहा है कि वे लड़के अस्तित्व को, आत्मसम्मान को कुचल देंगी। वे कह रही हैं कि वे तो बस सुधार लाना चाहती हैं।

पर एक दिन आप हिंदुओ को उस लड़के की तरह ही विक्षिप्तता तक पहुँचा देंगी। तब विस्फोट होगा।

जैसे उस लड़के के कृत्य देख कर समाज हिल गया वैसे ही जब हथियार उठेंगे तो देश हिलेगा। हम अपनी मधुरता खो देंगे।

पर आत्मसम्मान के साथ हर बार समझौता करने के बाद मधुरता खोना अपरिहार्य है, हर इंसान-हर समुदाय के लिये।

अब जो कट्टरता आ रही हैं, वे इस देश में बैठे इन सौतेलों की देन है, काटे जायेंगे ये भी एक दिन।

मेरे जैसे बहुत से लोग पड़ोसी की तरह हैं, जिन्होंने कभी इन सौतेलों को प्यार से समझाया कभी चिल्ला कर विरोध किया और हर बार अनसुने कर दिये गये।
फिर हमने अपनी आँखों के सामने सनातन की मधुरता को नष्ट होते देखा और उसका मातम मनाया।

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