समय के साथ बदलिए और उभरते हुए भारत में नए अवसरों का लाभ उठाइए

जब सेलफोन शुरू शुरू में आया था तो मोबाइल कंपनियों को सबसे बड़ा लाभ SMS से होता था। अधिकतर लोग टेक्स्ट करते थे और कंपनियां अच्छा खासा पैसा बना लेती थीं।

फिर व्हाट्सएप आ गया। अब कोई भी SMS नहीं करता और व्हाट्सएप पर मैसेज भेजने पर किसी भी सेलफोन कंपनी या व्हाट्सएप को कोई आमदनी नहीं होती।

दूसरा उदाहरण लीजिये। पहले म्यूजिक रिकॉर्ड होते थे, कैसेट्स होते थे, फिर सीडी और डीवीडी और इनके रेंटल स्टोर। अब सब समाप्त।

जब मैं पहली बार विदेश गया था तो हर गली चौराहे पर दर्जनों ट्रैवल एजेंट्स होते थे। अब पता नहीं कहां है।

कुछ ही वर्षों पहले कैमरे में फिल्म पड़ती थी, फिर उसे आप कहीं डेवेलप और प्रिंट करवाने ले जाते थे। अब ना तो फिल्म है और ना डेवेलप और प्रिंट करने वाली दुकानें हैं। कोडक, फूजी और कोनिका फोटो रोल बनाने वाली कम्पनिया दिवालिया हो गई। डिजिटल कैमरे आए। पता नहीं कहां गायब हो गए। अधिकतर लोग अब सेल फोन से फोटो लेते हैं।

भारत का बाज़ार इनवर्टर और जेनरेटर के मॉडल से भर गया था। 12 से 16 घंटे बिजली गायब रहती थी। अब प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद बिजली नियमित रूप से आने लगी तो एकाएक इनके बाजार में मंदी आ गयी। दुकानदार माथे पर हाथ रखकर बैठे हुए हैं।

अमेरिका में पहला शॉपिंग माल वर्ष 1956 में खुला और अगले 50 वर्षों में लगभग डेढ़ हजार शॉपिंग मॉल खुल गए। 2007 पहला वर्ष था जब एक भी शॉपिंग मॉल अमेरिका में नहीं खुला। पिछले 10 वर्षों में 20% से अधिक शॉपिंग मॉल बंद हो गए हैं। देखते-देखते विश्व में खिलौने की सबसे बड़ी रिटेल चेन ToysRus, कपड़ों की रिटेल चेन J C Penny और घरेलू यंत्रों की चेन Sears दिवालिया हो गयी।

समाचार पत्रों को ले लीजिए। कुछ वर्ष पहले उनकी अधिकतम आमदनी क्लासीफाइड विज्ञापनों से होती थी जैसे कि घर को किराए पर उठाना, घर बेचना, वैवाहिक विज्ञापन, नौकरी की तलाश और नौकरी का ऑफर, ऐसे बहुत से विज्ञापनों से समाचार पत्र भरे रहते थे।

अब ऐसे सारे विज्ञापन गायब हो गए। Shaadi dot com आ गया। लेकिन इसके बावजूद अच्छे समाचार पत्रों की आय बढ़ गई और उनके पाठक बढ़ गए है। कैसे? डिजिटल सब्सक्रिप्शन की आमदनी और वेबसाइट पर विज्ञापन के डिस्प्ले से होने वाली आमदनी।

कुछ ही वर्ष पहले चोरी के वीडियो कैसेटस और डीवीडी के कारण ऐसा लग रहा था कि सिनेमा उद्योग का खात्मा हो जाएगा। सब लोग घर में फिल्में देख लेते थे या फिर बाद में नेट से फिल्म देखना शुरू कर दिया।

भारत में ‘हम आपके हैं कौन’ फिल्म से डॉल्बी डिजिटल म्यूजिक का उद्घाटन हुआ। दर्शकों ने हॉल में पहली बार ऐसा म्यूज़िक सुना। बड़े-बड़े सिनेमा हॉल को तोड़कर उसमें मल्टीप्लेक्स बना दिए गए, जहां एक से डेढ़ हजार दर्शक एक साथ फिल्म देखते थे, अब मुश्किल से 200 से 400 दर्शक एक बार में बैठते हैं।

पहले सारी फिल्में 3 घंटे के आसपास होती थी। अब 2 घंटे कुछ मिनट की फिल्में बनने लगी हैं। फायदा यह हुआ कि पहले दिन में 4 शो होते थे। बहुत हिट फिल्म हुई तो 5 शो लगा दिए। अब मल्टीप्लेक्स के एक थिएटर में में 6 से 7 शो चलाये जा सकते हैं।

भारत का रिटेल बाज़ार प्रति वर्ष 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और अगले दो वर्षो में यह 80 लाख करोड़ रुपये (1.1 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुँच जाएगा। बढ़ती आय और मध्यम वर्ग की जीवनशैली में बदलाव और डिजिटल कनेक्टिविटी में वृद्धि जैसे कारकों का इसमें प्रमुख योगदान होगा। ऑनलाइन रिटेल अगले पांच सालों में भौतिक रिटेल बाज़ार के बराबर पहुँच जाएगा।

वर्ष 2009 में ग्रामीण भारत में 9 बिलियन डॉलर का कंज्यूमर गुड्स बिका था जो 2013 में 15 बिलियन डॉलर (80000 करोड़ रुपये) पहुँच गया। यह संख्या अगले 3 वर्षों में बढ़कर 30 बिलियन डॉलर (160000 करोड़) हो गई। यह प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा गरीबों को सीधे धन ट्रांसफर करने का परिणाम है। आप इससे अनुमान लगा सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद ग्रामीण भारत की समृद्धि में कितनी बढ़ोत्तरी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ठीक कहते है कि दस साल बाद ये दुनिया कहां होगी, कोई व्यक्ति नहीं बता सकता।

समय के साथ बदलिए और इस उभरते हुए भारत में मिल रहे नए अवसरों का लाभ उठाइए।

मोदी के प्रयासों का एक लक्ष्य है, और वह है गरीबों का सशक्तिकरण

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