नि:संदेह यौनकर्म विवाह का आधार है, किंतु केवल यही सर्वस्व नहीं

सामूहिक सामाजिक भोज एक सांस्थानिक ‘चरना महोत्सव’ है! कृषि एक सांस्थानिक ‘बीज प्रकीर्णन’ मात्र है! युद्ध एक सांस्थानिक ‘पाशविक द्वंद्व’ है! शिक्षा एक सांस्थानिक ‘अनुभव स्थानान्तरण प्रक्रिया’ है! उत्सवादि एक सांस्थानिक ‘मनोरंजन’ है! सभाएं सांस्थानिक ‘झुंड संवाद’ है! वस्तुतः मानवता ही ‘सांस्थानिक पशुता’ है! मनुष्य एक सामाजिक पशु है, वह अपनी चेतना, बुद्धि एवं स्मृति … Continue reading नि:संदेह यौनकर्म विवाह का आधार है, किंतु केवल यही सर्वस्व नहीं