“अभूतपूर्व, अप्रत्याशित, अकल्पनीय”

11 अक्टूबर को चतुर्थ औद्योगिक क्रांति सेंटर के उद्घाटन के समय प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को अपेक्षाकृत प्रचार नहीं मिला।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने एक ऐसे भारत की परिकल्पना की है जिसमे चतुर्थ औद्योगिक क्रांति की मदद से राष्ट्र की सामाजिक एवं आर्थिक व्‍यवस्‍था से जुड़ी अनेक कमज़ोरियों को हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाएगा।

इस क्रांति से भारत में गरीबी को समाप्‍त करने और समाज के उपेक्षित वर्ग के जीवन को बेहतर बनाया जा सकेगा।

जानकारी के लिए प्रथम औद्योगिक क्रांति स्टीम इंजन के अविष्कार के साथ 18वीं सदी के आखिरी सालों से शुरू हुआ, जब मशीनी ताकत ने मनुष्यों की शारीरिक क्षमता को कई गुना बड़ा दिया। मशीनों ने मांसपेशियों की सीमाओं को पार करना संभव किया।

द्वितीय औद्योगिक क्रांति ने बिजली की मदद से कारखानों में बड़े पैमाने पर उत्पादन और जन परिवहन के लिए रेलवे का विकास किया। तृतीय औद्योगिक क्रांति 1980 के दशक में शुरू हुई थी जिसमें डिजिटल तकनीकी ने सभी घरों में कंप्यूटर, लैपटॉप, इंटरनेट और सेल फोन ला दिया।

अब तक के अविष्कार मनुष्य की शारीरिक क्षमता बढ़ाते गए। लेकिन, गौरतलब बात यह है कि इन औद्योगिक गतिविधियों और शारीरिक श्रम को मनुष्य ही नियंत्रित करते थे।

लेकिन चतुर्थ औद्योगिक क्रांति भौतिक, डिजिटल और बॉयोलॉजिकल क्षेत्र के अंतर को समाप्त कर रही है, इस हद तक कि कुछ वर्षों में कई गतिविधियों के लिए मानवीय श्रम की ज़रुरत ही नहीं रहेगी।

उदहारण के लिए बिना ड्राइवर के कार और ट्रक चलेंगे, फैक्ट्री को इंटेलीजेंट रोबोट्स चलाएँगे, एकाउंटिंग और फाइनेंशियल डील कंप्यूटर करेंगे, रूटीन खबरें और विश्लेषण कंप्यूटर लिखेंगे, इत्यादि।

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि चतुर्थ औद्योगिक क्रांति को वे सिर्फ उद्योगों में परिवर्तन के तौर पर नहीं, बल्कि इसे सामाजिक परिवर्तन के आधार के तौर पर भी देख रहे हैं। इस क्रांति का अंतिम लक्ष्‍य समाज की आखिरी पंक्ति में बैठे व्‍यक्ति के जीवन को आसान बनाना है, उसमें बदलाव लाना है.

उन्होंने आगे कहा कि चतुर्थ औद्योगिक क्रांति, सामाजिक एवं आर्थिक व्‍यवस्‍था से जुड़ी अनेक कमज़ोरियों को हमेशा-हमेशा के लिए खत्‍म कर देगी।

इस क्रांति से, कृत्रिम बुद्धि के विस्‍तार से जहां एक तरफ देश के लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, वहीं इलाज पर होने वाला उनका खर्च भी कम होगा। कृषि क्षेत्र में इसका विस्‍तार होने से एक तरफ किसानों की उपज बढ़ेगी, अनाज की बरबादी रुकेगी तो दूसरी तरफ उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

ये तकनीक भारत के किसानों को मौसम, फसल और बीज बोने के चक्र के संबंध में सही फैसला लेने में मदद कर सकती है। ये स्मार्ट सिटी और भारत में 21वीं सदी के इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के साथ ही देश के गांव-गांव तक कनेक्टिविटी बढ़ाने में मदद करेगी।

ट्रांसपोर्टेशन और शहरों में जाम की समस्‍या से छुटकारा दिलाने में भी नई तकनीकों से भारत को सहायता मिलने वाली है। कृत्रिम बुद्धि की मदद से अलग-अलग बोलियों और भाषाओं में विचारों का आदान-प्रदान और आसान हो जाएगा। साथ ही भारत के दिव्‍यांग नागरिकों के सामर्थ्‍य को और मज़बूत करने में, उनके जीवन में आने वाली परेशानियों को कम करने में भी कृत्रिम बुद्धि की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

आपसे आग्रह है कि इस वाक्य को एक बार पुनः पढ़िए। कितने लोग हमारे दिव्यांग भाई-बहनों की बात करते हैं? यह अवसर तो चतुर्थ औद्योगिक क्रांति के समारोह का था। इसमें भी प्रधानमंत्री मोदी हमारे उन नागरिकों की बात कर रहे हैं जिन्हें हम सब के सहयोग की आवश्यकता है। यह उनके चरित्र में सदाशयता, सज्जनता और दयाभाव दिखाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ लोग चिंता करते हैं कि टेक्नोलॉजी का ये उत्‍थान रोज़गार कम कर देगा, लेकिन सच्चाई ये है कि मानव जीवन की जिन-जिन वास्‍तविकताओं को हमने आज तक छुआ तक नहीं है, उसके द्वार अब इस क्रांति से खुलने वाले हैं।

ये रोज़गार के स्वरुप को काफी हद तक बदलेगा, नए अवसर पैदा करेगा। इस वास्तविकता को समझते हुए ही उनकी सरकार स्किल इंडिया मिशन, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन जैसे कार्यक्रम चला रही है। देश के युवा बदलती हुई तकनीकों के लिए तैयार हो सके, उस पर पहले से काम किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि दस साल बाद ये दुनिया कहां होगी, कोई व्यक्ति नहीं बता सकता। ये भी कोई नहीं बता सकता कि पांचवी औद्योगिक क्रांति अब कितनी दूर है।

ठीक है, पहले की तीन औद्योगिक क्रांति लगभग 100 साल के अंतराल पर आईं, लेकिन पिछले एक-दो दशक को ही देखें तो अनगिनत चीज़ों का आविष्‍कार हुआ और वो लुप्त भी हो गईं। टेक्नोलॉजी ने समय को जैसे निचोड़ दिया हो…! पांचवी औद्योगिक क्रांति के लिए अब 100 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

अंत में, प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे महत्पूर्ण बात कही। जब पहली औद्योगिक क्रांति हुई तो भारत गुलाम था। जब दूसरी औद्योगिक क्रांति हुई, तब भी भारत गुलाम था। जब तीसरी औद्योगिक क्रांति हुई तो भारत स्‍वतंत्रता के बाद मिली चुनौतियों से ही निपटने में संघर्ष कर रहा था। लेकिन अब 21वीं सदी का भारत बदल चुका है।

उन्होंने विश्‍वास दिलाया कि भारत चौथी औद्योगिक क्रांति के लाभ से वंचित नहीं रहेगा, बल्कि चौथी औद्योगिक क्रांति में भारत का योगदान पूरे विश्‍व को चौंकाने वाला होगा; “अभूतपूर्व, अप्रत्याशित, अकल्पनीय” योगदान भारत का होगा.

क्या कमी थी हमारे देश में? सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी जैसे दूरदर्शी नेतृत्व की

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