प्रो-मोदी राष्ट्रवादी ही क्यों हैं इस फेसबुकिया गिरोह के निशाने पर

प्रखर राष्ट्रवादियों और कट्टर हिन्दूवादियों का एक गिरोह पिछले कुछ दिनों से, जब से नवरात्रि पर्व शुरू हुआ है… एक ऑडियो वायरल कर रहा है, जिसमें एक कट्टर हिन्दू, प्रखर राष्ट्रवादी मेरी बेटी, बहन, माँ, और परिवार को धाराप्रवाह… एक सांस में, बिना रुके… ठीक वैसे जैसे शंकर महादेवन ने वो Breathless गाना गाया था… उसी तरह गालियाँ दे रहा है।

मेरे कुछ शुभचिंतकों, मित्रों ने वो ऑडियो मुझे भी भेजा है।

एक मित्र ने पूछा है, बाकायदा सार्वजनिक मंच से पूछा है… कि आपके मुंह में दही जमी थी… आपने क्यों नही दी गालियाँ… आप तो उस्ताद हैं गालियों के… आपसे बड़ा गालीबाज कौन है? आपने तो PhD किया है गालियों में।

मैंने कहा कि भैया… वो प्रखर राष्ट्रवादी मेरी बेटी, बहन, माँ को गालियाँ दे के नवरात्रि मना रहा है… अब मैं भी उसकी 10 साल की मासूम बेटी को गाली दूं? उसकी जवान बहन को गाली दूं? क्यों दूं? उसकी बूढ़ी माँ को गाली दूं? क्यों दूं?

प्रखर राष्ट्रवादी उस कट्टर हिन्दू की माँ, बहन, बेटी से मेरा क्या झगड़ा है भाई? मैं क्यों उसके परिवार की महिलाओं को गाली दूं?

बेशक़ आपकी बात सच है कि गाली देने में तो हम भी उस्ताद हैं… हाँ… हम भी बहुत बुरी बुरी गाली देते हैं… पर Prestitutes को, ख़बरंडियों को देते हैं, दोगले राष्ट्रद्रोही कांग्रेसियों को देते हैं, देश के दुश्मन Urban Naxal, खालिस्तानी आपियों को देते हैं… Seculars को सेक्युल@# लिखते हैं।

पर इतना याद रखिये कि हमने कभी किसी व्यक्ति को गालियां नहीं दीं… हमने वर्गों को गालियाँ दी… संस्थाओं Institutions को गालियाँ दीं… मेरे लिए पंजाब का खालिस्तानी आपिया कोई व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था है… दिल्ली का Urban Naxal आपिया एक संस्था है… हाँ, हमने इन समूहों को गालियाँ दी हैं… पर हमने कभी भी अरविंद केजरीवाल की बेटी, पत्नी, माँ, बहन को गालियां नही दीं।

आप सारे फेसबुक, Twitter या सोशल मीडिया में एक भी स्क्रीन शॉट दिखा दीजिये जहां किसी भी व्यक्ति ने केजरीवाल की माँ, बेटी, बहन को गाली दी हो… मैंने नहीं, किसी भी आदमी ने… क्योंकि हमारा विरोध केजरीवाल से है, उसकी माँ, बेटी, बहन, पत्नी से नहीं… इसी तरह हम रवीश को गालियां देते हैं, उसकी माँ को नहीं।

मैं इसके अलावा भी कुछ वर्गों संस्थाओं के लिए बहुत कड़े शब्दों का इस्तेमाल करता हूँ… ट्रेन की टोंटी चुराने वालों के लिए, देश को गंदा करने वालों के लिए, दहेज़ लेने वालों के लिए, राजा भैया, मुख्तार अंसारी और आनंद पाल जैसे अपराधियों को हीरो बनाने वालों के लिए… पर ये लोग व्यक्ति नही संस्थाएं हैं… They are Institutions.

व्यक्तियों और संस्थाओं में अंतर होता है…

जहां तक मुझे याद है, मैंने कभी किसी व्यक्ति को पर्सनल गालियाँ नहीं दीं… दी भी होंगी तो वो personal न हो के भाव या अभिव्यक्ति ही रही होगी…

हमको दुश्मनी करनी होगी तो दुश्मन से करेंगे, उसकी मासूम बेटी, बहन या निरीह माँ से नहीं…

पर हमारे प्रखर राष्ट्रवादी कट्टर हिंदुओं की बात अलग है… ये उनका नवरात्रि मनाने का तरीका है… नवरात्रि में वो मेरी बेटी, बहन, पत्नी, माँ को गालियां दे के नवदुर्गा मना रहे हैं।

हाँ… एक बात और… मैंने इस प्रखर राष्ट्रवादी कट्टर हिंदुओं के गिरोह को कभी भी किसी Commi, Congi, खालिस्तानी, Naxal या मीमटे भीमटे से लड़ते नहीं देखा।

इनकी बंदूक हमेशा हम मोदी भक्त राष्ट्रवादियों पर ही तनी रहती है। पिछले 5 साल की इनकी लड़ाइयों, गालीबाज़ी की सूची बनाइये। ये हमेशा राष्ट्रवादियों से ही लड़ते मिलेंगे।

इनके निशाने पर हमेशा हम ही लोग रहते हैं। क्यों?

मैंने इनको कभी दिचूम से लड़ते नहीं देखा। या फिर किरण जादो के खिलाफ झंडा उठाए नहीं देखा।

अलबत्ता ये पूरा गिरोह एक दिन एक मित्र अविनाश श्रीवास्तव को गरिया रहा था… वो अविनाश जो कभी किसी विवाद में नही रहे। वो जो दिन रात एक किये हैं और मोदी सरकार की पिछले 4 साल की उपलब्धियों को पूरे facts and figures के साथ, एकदम सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाते हैं।

मैंने जानने की कोशिश की कि ये आखिर अविनाश को क्यों गाली दे रहे हैं। बताया गया कि आज से सिर्फ 3 महीने पहले अविनाश को कोई जानता न था। आपने सबने मिल के उसे प्रमोट किया इसलिए अब उसे भी गालियां दी जा रही हैं। अविनाश इस व्यक्तिगत गालीबाज़ी से इस क़दर क्षुब्ध थे कि फ़ास्बुक छोड़ने जा रहे थे।

सवाल ये है कि पुष्कर अवस्थी, रंजय त्रिपाठी, आनंद शर्मा और अविनाश श्रीवास्तव जैसे हम प्रो-मोदी राष्ट्रवादी ही इस गिरोह के निशाने पर क्यों हैं?

Modi Fans को Sexually frustrated indians कहनेवाले अंग्रेज भगत को GF तो पूरी मिली नहीं!

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY