करोड़ों-अरबों में एक ही मनुष्य क्यों होता है आजानुबाहु

अभी अवतारों को लेकर कई बातें चली हैं। अवतारों के साधारण मनुष्य होने पर ज़ोर दिया जा रहा है। इस बारे में डॉ वासुदेव शरण अग्रवाल का लिखा बहुत मायने रखता है। उन्होंने लिखा है कि ‘भारतीय वाङ्मय परम्परा में रामायण पहला काव्य प्रबन्ध है जिसके नायक मनुष्य हैं। वाल्मीकि का नायक पूर्णतः लौकिक मनुष्य … Continue reading करोड़ों-अरबों में एक ही मनुष्य क्यों होता है आजानुबाहु