महाकवि निराला को प्रणाम : क्या यह मनुष्य की मेधा है!

छठी कक्षा का छात्र था, उन दिनों समसामयिक विषयों पर हिन्दी में एक पन्ने का लेख लिखना होता था । बिहार में वचनदेव कुमार की किताब लोकप्रिय थी ।अचानक बाढ़ पर लिखे उनके लेख को पढ़ते हुए पहली दो पंक्तियों में मेरी आंखें फंस कर रह गईं: शत घूर्णावत तरंग भंग उठते पहाड़ जल-राशि राशि-जल … Continue reading महाकवि निराला को प्रणाम : क्या यह मनुष्य की मेधा है!