जिन्हें ये सब कोरी कल्पना लगे, वो राहुल गांधी को लाकर देश बचा लें

कांग्रेस और उसके समर्थकों को ये घमंड हमेशा रहा है कि सरकार चलाना केवल कांग्रेस को आता है।

कांग्रेस के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थक, सेक्युलर, प्रगतिशील इसी आधार पर मोदी सरकार का मजाक उड़ाते हैं उसे मूर्खो की सरकार कहते हैं जिसे विदेश नीति समझ नहीं, आर्थिक समस्याओं की समझ नहीं। इसी आधार पर विमुद्रीकरण और GST की आलोचना होती है।

आजकल डीज़ल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें सरकार को हंसी का पात्र बना रही हैं। तमाम मंत्रियों के 2014 पूर्व वीडियो प्रचलन में हैं जहाँ ये मंत्री तत्कालीन कांग्रेस सरकार की इन्ही मुद्दों पर आलोचना कर रहे हैं।

और आज वही मंत्री, पार्टी प्रवक्ता उसी प्रश्न पर मीडिया और जनता से कन्नी काट रहे हैं।

क्या वाकई मोदी सरकार के पास कोई उपाय नहीं? डीज़ल, पेट्रोल, डॉलर, महंगाई केवल सत्ता प्राप्त करने का बहाना था?

कुछ दिन पहले सौर ऊर्जा में कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की ओर से अवार्ड मिला। कुछेक साल पहले मोदी जी ने सौर अलायंस का गठन किया था जिसमें बहुत से देश शामिल हैं।

पूरे देश में बेहद तेजी से सोलर एनर्जी पर काम चल रहा है। सोलर पार्क बन रहे हैं। सरकारी बिल्डिगों की छत, पार्किंग एरिया सोलर पैनल से आच्छादित हैं। सोलर ऊर्जा उत्पादन पर सरकार आम नागरिकों को तमाम सब्सिडी दे रही है।

दो साल पहले सोलर एनर्जी से बनी बिजली की एक यूनिट 6-7 रूपये की थी आज ढाई रूपये हो रही है। ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट, खेतों में सोलर पम्प सेट हैं।

UN की तरफ से मिले अवार्ड के सम्मान समारोह में बोलते हुए मोदी जी ने कहा कि जिस तरह आज एनर्जी के क्षेत्र में तेल उत्पादक ओपेक देश हैं, सोलर एनर्जी में वही स्थिति भारत के लिए चाहते हैं।

कुल बिजली उत्पादन का 40% सोलर से। सोलर बिजली उत्पादन में विश्व के टॉप पांच देशों में भारत।

समय आ रहा है जब गाड़ियां तेल की जगह बैटरी से चलेंगी। इलेक्ट्रिक वाहन। इलेक्ट्रिक कारें और बसें, दुपहिया वाहन भी।

और ये वाहन बिजली कहाँ से पाएंगे?

सोलर एनर्जी से उत्पादित बिजली से।

इसके लिए देश भर में इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है। चार्जिंग स्टेशन बन रहे हैं। स्मार्ट सिटीज़ में स्मार्ट पोल बन रहे हैं जिससे कारें, दुपहिया वाहन चार्ज किये जा सकेंगे।

टाटा, महिंद्रा समझ रहे हैं कि आने वाला समय इलेक्ट्रिक गाड़ियों का है। इससे पहले की विदेशी कम्पनियाँ अपने अपने मॉडल डेवेलप करें और भारतीय बाजार पर छा जाएँ, उन्हें अपने मॉडल लांच करने हैं।

इस काम में मोदी सरकार टाटा, महिंद्रा की मदद कर रही है। टाटा, महिंद्रा को कामयाब होने के लिए बाज़ार चाहिए, वॉल्यूम चाहिए। और सरकारी क्षेत्र से बढ़िया शुरूआती बाज़ार क्या हो सकता है।

EESL जो एक सरकारी कंपनी है, वो विभिन्न सरकारी विभागों के लिए इलेक्ट्रिक कारों की खरीद कर रही है। पहला ऑर्डर टाटा और महिंद्रा दोनों को हजार हजार कारों का दिया जा चुका है।

कभी नितिन गडकरी ने कहा था कि 2030 तक पेट्रोल डीजल गाड़ियां बननी बंद हो जाएँगी, केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनेंगी, बिकेंगी, चलेंगी।

इलेक्ट्रिक एनर्जी में आत्मनिर्भर भारत, कम दामों में बनती बिजली, प्रदूषण रहित बिजली उत्पादन, और वाहन।

क्या फिर डीज़ल पेट्रोल के बढ़ते दाम किसी महत्त्व के रहेंगे?

बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत कितनी विदेशी मुद्रा बचा रहा होगा! डॉलर अपने आप रूपये के आगे कमजोर होता जायेगा।

और ये सब किसी क्षणिक फैसले का नतीजा नहीं है। कोई knee-jerk रिएक्शन नहीं है।

सुविचारित नीतियां हैं। दीर्घकालिक सोच के परिणाम हैं।

इसीलिए मुझे डीजल पेट्रोल के बढ़ते दामों से समस्या नहीं है। बेशक सरकार बढ़े टैक्स से अपना खज़ाना भरे और देश की तरक्की को सुनिश्चित करे।

जो इन सब बातों को कोरी कल्पना समझते हैं वो राहुल गाँधी को लाकर देश बचा लें।

कम से कम 15 साल के लिए आना चाहिए राहुल गांधी सरकार

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