एक हाथ में कम्प्यूटर, दूसरे हाथ में कुरान और दिल में जिहाद!

जम्मू कश्मीर में मन्नान वानी नामक आतंकवादी मारा गया। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का रिसर्च स्कालर था।

वह भारतीय सेना के सैनिक स्कूल में शिक्षित था। NCC का कैडेट रहा था। 15 अगस्त और 26 जनवरी की परेडों में हिस्सा लिया था। एक भाई लेक्चरर और दूसरा भाई सरकारी अफसर है।

किसी भी व्यक्ति को यह सब विशेषताएँ देशभक्त बना सकती हैं मग़र जेहादी हरे रंग पर कोई रंग नहीं चढ़ता, सो मन्नान वानी पर भी नहीं चढ़ा।

गौर करिएगा, मन्नान वानी की समस्त शिक्षा लगभग नि:शुल्क भारत सरकार द्वारा पोषित थी। बाद के वर्षों में पीएचडी स्कॉलर के रूप में 25 हज़ार रूपए प्रति माह स्टाइपेंड भी मिलता रहा होगा।

दरअसल मामला एक हाथ में कम्प्यूटर, दूसरे हाथ में कुरान और दिल में जिहाद वाला है। यह निश्चित है कि केंद्र में बैठे लोग सच्चाई को जानते हुए भी आंखे मूंदे बैठे हैं।

कश्मीर में यह सीन 1932 से बर्दाश्त किया जा रहा है। कश्मीरियों को आज भी भारत के सभी उच्च प्रतिष्ठा वाले शैक्षिक संस्थानों में पढ़ने, रहने और खाने के लिए मोटा केंद्रीय बजट दिया जा रहा है और मन्नान वानी जैसे आतंकी पैदा हो रहे हैं।

पीडीपी-बीजेपी सरकार गिरने के बाद राज्यपाल शासन में यह निर्णय हुआ था कि किसी आतंकी की शवयात्रा नहीं निकाली जाएगी। फिर गवर्नर सतपाल मालिक ने कुपवाड़ा में 50 हज़ार से ज़्यादा की भीड़ के साथ मन्नान वानी की शवयात्रा निकलने की अनुमति क्यों दी?

खबरें यह है कि 50000 की इस भीड़ में अनेक आतंकी शामिल थे। भारत मुर्दाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद, आज़ादी के नारे लगे। एक आतंकी की शवयात्रा… दर्जन भर आतंकियों के बनने का नया रास्ता प्रशस्त करती है। सतपाल मालिक जैसे औसत जुगाड़ू राजनीतिज्ञ से इससे ज़्यादा क्या उम्मीद की जा सकती है?

सतपाल मालिक के बयान चिंतित करने वाले हैं। हालांकि यह बयान मूलतः केंद्र सरकार के ही माने जाने चाहिए… यानी केंद्र की कश्मीर में वहीं लाचार-लुंज-पुंज… आई.के गुजराल वाली – आत्मसमर्पण वाली नीति चलती रहेगी!

सतपाल मालिक का मानना है कि ’35 A पर कोई भी निर्णय, सुप्रीम कोर्ट को घाटी में किसी चुनी हुई सरकार के समय में लेना चाहिए’ अर्थात आने वाले उमर अब्दुल्ला या महबूबा मुफ्ती के शासनकाल में! कठुआ कांड पर भी नए राज्यपाल CBI जांच के खिलाफ हैं।

35 (A) पर अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी 2019… नए राज्यपाल के इस बयान और केंद्र के इस हलफनामे के बाद आई कि पंचायत चुनाव प्रक्रिया के बाद 35 A पर सुनवाई की जाए… प्रक्रिया आगामी एक हफ्ते में पूरी हो रही है… नवम्बर के आखिरी सप्ताह में सुनवाई की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में संबंधित NGO… ‘We the Citizen’ को तुरंत डालनी चाहिए थी।

केंद्र सरकार, मीडिया चैनलों और भाजपा के चुनाव प्रबंधकों को चाहिए कि प्रत्येक आतंकी के मरने पर चुनावी जीत जैसा जश्न मनाने का लोभ छोड़ दें… कश्मीर समस्या का हल यों एक-एक आतंकी को मारने में नहीं, बल्कि 35 (A) और 370 हटाने में छुपा हुआ है।

ऐसे ही प्रत्येक सैनिक की मौत पर सियापा करने का नाटक छोड़ें… सेना को भी अपने प्रत्येक ऑपरेशन, बचाव और कूटनीति को मीडिया के सामने उदघाटित करने से बचना चाहिए। सेना, BSF और CRPF कश्मीर में एक कठिन युद्ध मे व्यस्त हैं… किसी भी पार्टी को इसका चुनावी फायदा उठाने के लालच से बचना चाहिए।

किसी की समझ में आये तो अवश्य बताएं कि जम्मू-कश्मीर जैसे प्रदेश में सतपाल मालिक जैसे व्यक्ति को क्यों राज्यपाल बनाकर भेजा गया होगा? एक प्रश्न और है कि आज AMU में, मन्नान मालिक की नमाज़े जनाज़ा और आज़ादी-आज़ादी के नारे लगाने वालों के खिलाफ क्या करवाई हो रही है? कश्मीर के छात्र जिस तरह यह आज़ादी की मुहिम देश के सभी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में सफलतापूर्वक चला रहे हैं… यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण मजबूरी है।

हिन्दू टेरर : काँग्रेस को बेनक़ाब करती आर वी एस मणि की पुस्तक

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