राफेल : शहज़ादे से पूछिए कि कैसे मिल गया इन निजी कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट?

यूं जांचिए राफेल पर काँग्रेसियों के ‘तथ्य’ :

1. क्या प्रधानमंत्री मोदी ने दास्सो से अनुबंध किया?

उत्तर : नहीं। कॉन्ट्रैक्ट फ्रेंच राष्ट्रपति के साथ साइन हुआ था और भारत का पैसा फ्रांस के सरकारी खजाने में गया था।

2. क्या ऑफसेट क्लॉज़ में केवल रिलायंस को कॉन्ट्रैक्ट मिला?

उत्तर : नहीं।

3. अगर काँग्रेस का आरोप सही है, तो क्या प्रधानमंत्री मोदी ने बाकी की 71 ऑफसेट कंपनियों – जिनमें एल एंड टी, महिंद्रा समूह, रिलायंस, कल्याणी समूह, गोदरेज एंड बॉयस, टाटा समूह सम्मिलित है – के लिए भी पैरवी की?

उत्तर : नहीं।

4. फिर इन निजी कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट कैसे मिल गया?

उत्तर : शहज़ादे से पूछिए।

5. क्या एल एंड टी, महिंद्रा समूह, कल्याणी समूह, गोदरेज एंड बॉयस, टाटा समूह को डिफेन्स क्षेत्र में कार्य का अनुभव है?

उत्तर : नहीं।

6. क्या DRDO – जो एक सरकारी उपक्रम है – को कॉन्ट्रैक्ट मिला?

उत्तर: हाँ। ऑफसेट की एक तिहाई रकम।

7. रिलायंस को अमेरिका से उनकी नौ सेना के जहाजों की मेंटेनेंस के लिए 15 हज़ार करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला। क्या यह कॉन्ट्रैक्ट भी प्रधानमंत्री मोदी की पैरवी से मिला?

उत्तर : नहीं।

8. क्या प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के पहले रिलायंस के मालिक सड़क पर चाट बेचते थे?

उत्तर : नहीं।

9. राडिया टेप में मुकेश अम्बानी किस सरकार के लिए कह रहे थे कि वह सरकार उनकी जेब में है?

उत्तर : सोनिया सरकार।

रफाल और राजनीति का पप्पू काल

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