सारा भारत अगर आपको यहाँ न मिले, तो गुजरात अधूरा है

गुजरात और परप्रांतीय शब्द का कोई मेल नहीं है, परप्रांतीय?? गुजरात को कलंकित करने वाले ये लोग है कौन? गुजरात के गौरवान्वित संस्कार पर गंदा दाग लगाने वाले कुछ लोगों को कभी माफ नहीं किया जा सकता।

गुजरात धरती है संत शूरा ओर दातार ( दानवीर) की, जो कहती है सब भूमि गोपाल की. जब सब भूमि गोपाल की है और सारा विश्व गोपाल के बालक हैं तो ये तो पूरे विश्व की भूमि हुई फिर यह परप्रांतीय शब्द आया ही कहाँ से?

भारत माँ के सभी लाल की ये माँ है।

आज आपको कुछ अनसुनी बातें जो इतिहास के पन्नो में बड़े गर्व के साथ रेखांकित है उसे आपके सामने रख रहा हूँ।

द्वितीय विश्वयुद्ध में पोलेंड को लगा कि उसका देश बर्बाद हो जाएगा पोलेंड के राष्ट्रपति “Władysław Raczkiewicz” ने एक जहाज में 640 महिला और बच्चों को भर के समंदर में छोड़ दिया और कहा कि जो देश पनाह दे वहां रह लेना.

जहाज घूमता हुआ मुंबई आया, ब्रिटिश गवर्मेंट ने उसे पनाह देने से इनकार किया. ये बात जब जामनगर के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रंजितसिंहजी को पता चली तो उन्होंने तुरन्त ब्रिटिश गवर्मेन्ट पर दबाव बनाया और अपनी ज़िम्मेदारी पर उन 640 पोलेंड रेफ्यूजी को पनाह देने के लिए मना लिया.

और इस तरह वो जहाज जामनगर के रोज़ी बन्दर पे लाया गया, और उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि अपने आप को अब रेफ्यूजी न समझना अब आप नवनागरिक हैं और मैं बापू हूँ, सभी नवनागरीक प्रजा का पालक पिता हूँ, तो आपका भी पालक हूँ.

यहाँ से शुरु हुई कहानी the story of little Poland की.

जामनगर से 25 km दूर “बालाचडी” में इस पोलेंड के बच्चों और बहनों के लिए बिल्डिंग बनवाई गई Mr Wieslaw Stypula पोलेंड अधिकारी ने कहा है कि महाराजा ने हमारे खान पान का भी ख्याल रखा हमारे लिए 7 बावर्ची गोवा से मंगवाए और हमारे बच्चों को पोलेंड की पद्धति से शिक्षा मिल सके इसके लिए जरूरी सभी इंतजाम किए, अब हमारे लिए उन हालातों में जन्नत सा घर था जो एक हिसाब से पोलेंड से भी ज्यादा अपना हो गया था.

इस घटना ने काफी देश के राजा शासक राष्ट्रपति की आंखे खोल दी इस से प्रेरणा लेके सभी ने वर्ल्ड वॉर 2 के काफी पीड़ितों को पनाह देना शुरू किया।

आज भी पोलेंड में the story of little Poland और the good maharaja square की कहानी हर पोलेंड के बच्चों को बड़े गर्व से सुनाई जाती है

ई 925 में देवायत बोदर आहिर ( यादव ) ने अपने राज्य के वारिस को आसरा दिया पाल पोस के बड़ा किया ओर अपने बेटे तक की बली देकर उसे बचाया।

इतना अप्रतिम पनाह का इतिहास रहा हो वहां किसी को परप्रांतीय बोलके अत्यचार हो तो इस धरती के साथ इस से बड़ी गद्दारी और कोई हो ही नहीं सकती, शर्म से डूब मरो वो लोग जो किसी भी भारतीय को परप्रांतीय बोलता हो.

और हाँ, आखिर में एक बात ये भी सुन लो अगर किसी एक भी इंसान को आपने परप्रांतीय कहा तो भगवान द्वारिकाधीश भी परप्रांतीय ही हुए उन्हें भी कह दो, और मोहम्मद अली जिन्हा भी गुजराती हुआ।

सारा भारत अगर आपको न मिले यहाँ तो गुजरात अधूरा है।

वंदे मातरम जय जय गरवी गुजरात।

 – भगिरथ सिंह

विरोधियों के बहकावे में मत कीजिए पूरे गुजरात को बदनाम

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