शीघ्र ही देखने को मिल सकता है एक और लंकादहन

मैं दो बातें प्रायः कहता रहा हूँ जो किसी ने कभी नहीं मानीं।

1. कमर को मोड़ते हुए झुक कर भार मत उठाओ। कमर सीधी रख घुटने मोड़ कर उठाओ। कोई नहीं मानता और कटि पीड़ा से दुखी रहता है।

2. गाड़ी कच्चे में फंस जाय तो उसे जबरन आगे बढाने का हठ मत करो। फंसते ही तुरन्त उसे वापस पीछे की ओर करो। नहीं मानते, आगे बढ़ाने के चक्कर में उसे और अधिक फंसा बैठते हैं।

इतना भी नहीं सोचते कि आगे बढ़ने का जितना जोर लगाओगे, बाधा और ऊंची, और बढ़ती जाएगी। पहिये पीछे के मार्ग को समतल करते आए हैं और बैक गेयर में सदैव अधिक शक्ति होती है। फंसते ही तुरन्त रुक कर पीछे हटना चाहिए, पर नहीं!

केरल नन काण्ड में यही भीषण भूल वेटिकन के चेलों ने कर दी और वेटिकन भी बैक गेयर लगाने को तैयार नहीं।

भारत में दीर्घकाल से अप्रत्यक्ष रूप से और गत दस बरस तक लगभग प्रत्यक्ष सत्ता के अधिकार भोगते वेटिकन को समझ में ही नहीं आया कि अब शनै: शनै: भारत की सत्ता बदल रही है। वह अपनी पुरानी हेकड़ी में तना रहा।

पीड़ित नन को घुटने मोड़ कर उठा कर पुचकार लेता, अरे रेरेरे! मेरी बच्ची! इस नालायक मुलक्कल को तो मैं अभी ठीक करता हूँ। थोड़ा कार्रवाई का दिखावा कर देता, बस बात खतम। चर्च की सबसे कनिष्ठ कर्मचारी- नन तुरन्त पिघल जाती। प्रकरण का Happy the End हो जाता।

चर्च ने घुटने नहीं मोड़े। अब आरोप थे संगीन संज्ञेय अपराध के। केरल-पंजाब की सरकारें भी कब तक बचातीं। मुख्यमंत्री पिनयन को भी हथियार डालने पड़े। मीडिया पर काबिज़ स्वाभाविक सेवकों ने भी वांछित सहयोग नहीं दिया।

सबरीमला आदि में हाथ जलाने के पश्चात् अब न्यायपालिका भी फिरन्ट हो चुकी है। चर्च की गाड़ी न्यायिक दलदल में आ फंसी, चर्च ने फिर भी रिवर्स गियर नहीं लगाया।

अब चर्च जो योजनाएं बना रहा है, वे गाड़ी को दलदल में और गहरे फंसाने वाली वाली सिद्ध होंगी। ननों को चरित्रहीन घोषित किया जा रहा है। उनकी नौकरियाँ समाप्त करने की धमकियां दी जा रही हैं। चर्च की इन हरकतों से चुप रह कर सबकुछ झेलने वाली ननों में भी आक्रोश फैल रहा है। शीघ्र ही एक और लंकादहन देखने को मिल सकता है।

बिशप, नन और ब्राइड ऑफ द क्राइस्ट

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