क्यों और किसके लिए लिखी गई ‘वैदिक सनातन हिंदुत्व’

संलग्न फोटो के मध्य में दिख रही पुस्तक मैंने दिल्ली के हवाई अड्डे से खरीदी थी। यह पुस्तक अंग्रेज़ लेखक ने 1882 में लिखी थी और यह आज तक बिक रही है।

यही नहीं, हिंदुत्व पर अनेक पुस्तकें आजकल खूब बिक रही हैं और जो भी जहां भी मिलती है मैं ले लेता हूँ, मगर उनमें तकरीबन सभी अंगरेज़ी में किसी अंग्रेज़ द्वारा लिखी हुई होती है। और इसे कौन अधिक खरीदता है? काले अंग्रेज़ अर्थात पढ़े-लिखे उच्चवर्गीय भारतीय।

आप कह सकते हैं इसमें दिक्कत क्या है?

जिस भाषा के पास ‘ॐ’ शब्द नहीं, जिसके पास ‘धर्म’ के लिए सार्थक और समर्थ शब्द नहीं, वो हिंदुत्व की व्याख्या कितनी कर पाता होगा समझा जा सकता है।

और फिर माइथोलॉजी शब्द मिथ से बना है, और मिथ बना है मिथ्या से, लेकिन हिंदुत्व मिथ्या नहीं है। क्या सूर्य और अग्नि मिथ्या है? इंद्र प्रतीक हो सकते हैं, मिथ्या वो भी नहीं हैं।

आप शायद अब भी नहीं मानेगे, तो फोटो के दायें भाग को देखिये, पार्ट-तीन का नाम है इन्फीरियर देवता (THE INFERIOR DEITIES). क्या कभी देवता भी इन्फीरियर या सुपीरियर हो सकते हैं? यह ना केवल हास्यास्पद है बल्कि अनेक प्रश्न भी खड़ा करता है। यह है दृष्टि और दृष्टिकोण का महत्व। जहां हर शब्द महत्वपूर्ण बन जाता है।

हज़ारों वर्ष पुरानी, वैदिक काल से चली आ रही सनातन संस्कृति के साथ यही मुश्किल है कि उसका सम्पूर्ण साहित्य, ज्ञान, सूचना काव्यात्मक शैली में है। जहां काव्य का शब्दार्थ होता है तो भावार्थ भी और उसके माध्यम से ही सन्देश। लेकिन अधिकांश शब्दार्थ पर ही अटके रहते हैं और उसी के प्रस्तुतिकरण को हिंदुत्व मान कर परोसते हैं।

ऐसा ही कुछ कुछ पौराणिक कथाओं के साथ भी किया जाता है। हिन्दुओं के व्रत त्योहारों के संदर्भ में उपहास के भाव पैदा होने का कारण भी यही है। जबकि अगर कर्मकांड को विश्लेषित करें तो इसके सामाजिक, आर्थिक, प्राकृतिक, पर्यावरण से संबंध साफ़ नजर आते हैं। इसी का प्रयास किया गया है, इस पुस्तक ‘वैदिक सनातन हिंदुत्व’ में।

आज का पढ़ा लिखा भारतीय वर्ग हिंदुत्व से दूर हो रहा है, तो उसके लिए ये अंगरेज़ी की किताबें और कॉन्वेंट की शिक्षा पद्धति ज़िम्मेवार है। और जो भारतीय हिंदुत्व पर लिख भी रहे हैं वे भी चश्मा अंगरेज़ी का ही पहनते हैं, फिर चाहे पटनायक हो या अमीश त्रिपाठी।

ऐसे में पुस्तक को पुस्तक से, विचारधारा को विचारधारा से ही जवाब दिया जा सकता है, जो यहां करने का प्रयास किया गया। और चूंकि आज हर बात में विज्ञान की बात की जाती है इसलिए विज्ञान के भयावह पक्ष का संदर्भ बना कर पुस्तक को लिखा गया। युवा पीढ़ी हॉलीवुड के गिरफ्त में है तो अंगरेज़ी फिल्मों को भी पुस्तक में माध्यम बनाया गया है।

हिंदुत्व धर्म है, जीवन शैली है, जीवन संस्कृति है, जीवन दर्शन है। इसमें सिर्फ कर्मकांड नहीं बल्कि भक्तिमार्ग के साथ साथ ज्ञान मार्ग भी है। ये ज्ञान मार्ग कठिन माना जाता है लेकिन उसे ही यहां सरलतम रूप में संक्षिप्त में रखने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में हिंदुत्व के व्यवहारिक और प्राकृतिक पक्ष की ओर विशेष ध्यान दिया गया है।

और अंत में, पुस्तक के शीर्षक से भी बहुत कुछ समझा जा सकता है, जो है ‘अगली सदी का एकमात्र प्रवेशमार्ग – वैदिक सनातन हिंदुत्व’। यकीन मानिये, आधुनिक युग की सभी समस्याओं का समाधान है वैदिक काल से चली आ रही सनातन संस्कृति के पास, जिसको आजकल हिंदुत्व कहा जाता है।

मेरा लेखन तभी सफल होगा जब यह पुस्तक उन लोगों के हाथ में पहुंचेगी जो धीरे धीरे हिंदुत्व से दूर हो रहे हैं। हिंदी के पास अंगरेज़ी की तरह मज़बूत नेटवर्क नहीं, इसलिए आप सब माध्यम बनें, ऐसा आग्रह है।

सनातन को तो जीना है, सृष्टि के साथ, सृष्टि के अंत तक, निरंतर

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY