अपनी सुविधा से ‘चलता है’ कहकर समझौता कर लिया, अपनी सुविधा से बन गए पीड़ित!

‘मी टू’ आंदोलन के समर्थन में बहुत बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, कुछ लोग तो ऐसे हैरान दिख रहे हैं कि जैसे उन्हें अंदाज़ ही न हो कि फ़िल्म, मीडिया, साहित्य सहित तमाम जगहों पर इस तरह के कुंठित लोग हैं!

पिछले साल ‘बिग बॉस’ में सेकंड रनर अप रहे विकास गुप्ता पर बिग बॉस शो के दौरान ही शिल्पा शिंदे ने कई तरह के आरोप लगाए थे। शिल्पा का एमएमएस बनाने से लेकर उसको बैन करवाने तक के फैसलों के पीछे किस तरह विकास गुप्ता का हाथ था इस पर शिल्पा ने बहुत हंगामा किया था, पर शो खत्म होते-होते शिल्पा विकास फिर से दोस्त बन गए। उनकी रिबॉन्डिंग भी एक इमोशनल ड्रामा थी।

इसी विकास गुप्ता पर अभिनेता पार्थ समंथान ने भी यौन प्रताड़ना का आरोप लगाया था, जिसके बारे में टीवी की मशहूर ताकतवर प्रोड्यूसर एकता कपूर ने कहा कि विकास और पार्थ गे रिलेशन में लिव इन पार्टनर थे, विकास ने ही पार्थ समंथान को एमटीवी और वीटीवी के कई नामी सीरियल्स में काम दिलवाया था। फिर पार्थ के हाथ से कुछ प्रोजेक्ट्स मिस हो गए तो पार्थ ने ब्रेकअप कर लिया और विकास पर यौन शोषण का आरोप लगा दिया।

हालांकि बिग बॉस के बाद पार्थ, विकास और एकता फिर एक हो गए और अभी पार्थ समंथान ‘कसौटी ज़िन्दगी की’ में बतौर अनुराग बासु लीड रोल में हैं और सब को पता है कि ‘कसौटी ज़िन्दगी की’ की प्रोड्यूसर एकता कपूर हैं।

स्थिति यह है कि राजकपूर के ज़माने से लेकर आज तक इंडस्ट्री में यह सब होता ही रहा है, आज ज्यादा खुले रूप में हैं। आम दर्शक की भावनाओं का सिर्फ इस्तेमाल किया जाता है इन लोगों द्वारा, अपना दुखड़ा रोकर, आरोप-प्रत्यारोप लगा कर खुद को पीड़ित दिखाओ और फिर जनता, शिल्पा और विकास जैसों को वोट देकर विजयी बना देगी तो लड़कियां पार्थ समंथान जैसे चिकन -चुपड़े लड़कों की क्यूटनेस पर फिदा हो जाएंगी, और भूल जाएंगे टीवी इंडस्ट्री के भीतर मची गन्दगी को।

अपनी देह का इस्तेमाल कर काम और नाम बनाने वाले लोगों में लड़कियां ही नहीं लड़के भी शामिल है। इंडस्ट्री में गे – लेस्बियन प्रवृत्ति के लोग डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, फैशन डिजायनर से लेकर तमाम ओहदे पर काबिज़ हैं, तो ऐसे शार्ट कट न्यू कमर बड़ी संख्या में सदा से रहे हैं जो हर स्तर पर समझौता करने को तैयार हैं।

फिलहाल 15-20 साल बाद सामने आ कर खुद को पीड़ित बताने वाली ये भीड़ भी इसी श्रेणी की है। कुछ ने तो स्वीकारा भी है काम पाने के लिए हमने यह सब सहा, आर्थिक तंगी में आकर समझौता किया।

अब इनसे कोई ये तो पूछे कि भैया समझौता करके तुमने ही तो इंडस्ट्री में ऐसे लोगों को फलने-फूलने दिया? तुम जैसे ‘समझौता’ करने वालों के चलते कितने मेहनती, ईमानदार और आदर्शों पर जीने वाले लोग बेकार हो गए क्योंकि उन्होंने समझौता नहीं किया, इसका कोई हिसाब है?

सब तरह से रुपया, नाम, शौहरत, पुरस्कार कमाकर तुम लोग खुद को विक्टिम कहते हो? जबकि तुम जैसे शॉर्ट कट वालों की समझौता प्रवृत्ति ने ना जानें कितने मेहनती, ईमानदार लोगों से सबकुछ छीन लिया?

अगर तुम लोग समझौता नहीं करते तो क्या आलोक नाथ से लेकर विकास गुप्ता जैसे लोग इतने ताकतवर बनते? नहीं… तब तो तुम्हें काम और पैसा चाहिए था… आज भी तुम जैसे लोगों को काम और पैसा ही चाहिए जिसका सबूत है विकास गुप्ता और पार्थ समंथान जैसे लोग आज भी तुम्हारी इंडस्ट्री में मजे से काम कर रहे हैं!

तुम जैसे समझौता करने वालों के चलते जिसने जीवन में सच मे पीड़ा भोगी होगी वो आज भी कहीं गुमनामी में पड़े होंगे। पाप करने वाले से बड़ा दोषी है पाप सहने वाला, तुम लोगों के मौन समर्थन ने ही पापियों को इतना ताकतवर और लोकप्रिय बनाया है।

ऐसी ही एक स्वघोषित पीड़ित और ब्लैकमेलर महिला के चलते हाल ही में एक वरिष्ठ पत्रकार ने आत्महत्या भी की थी। इस समझौता प्रवृत्ति के सबसे ज्यादा लोग कला और साहित्य जगत में ही हैं, जो अपने ऐसे छिछले शॉर्ट कट हथकंडों से दूसरों का रास्ता रोक देते हैं और काम निकल जाने पर झुंड बनाकर ब्लेम गेम खेलते हैं।

अतः ऐसे स्वघोषित पीड़ितों से कोई सहानुभूति नहीं। अपनी सुविधा है तो “सब चलता है” कहकर समझौता कर लिया और अपनी सुविधा से पीड़ित बन गए!

ME TOO : बिना तैयारी के यह ओढ़ी हुई आधुनिकता बहुत भारी पड़ गई

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY