किस चीज़ की उपलब्धता या कमी प्रभावित करती है देशों की विकास दर?

प्रधानमंत्री मोदी अपने विज़न और राजनीतिक पूँजी से राष्ट्र की जटिल समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

वह पहले कह चुके हैं कि वर्तमान की चुनौतियों के मुताबिक बदलाव की भी ज़रूरत अनिवार्य होती है और मानते हैं कि आर्थिक निर्णयों में आदर्शवाद और आइडियोलॉजी काफी नहीं है। इसकी जगह व्यवहारिकता और समझ से निर्णय लेना चाहिए।

सेक्‍टर चाहे कोई भी हो, लेकिन जब 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था की बात करते हैं तब उद्यम और इनोवेशन हम सभी को गाइड करे, हमारा ड्राइविंग फ़ोर्स हो।

अर्थशास्त्री यह मानते थे कि राष्ट्र के आर्थिक विकास के लिए श्रम (लेबर), कौशल (स्किल) और पूंजी का योगदान आवश्यक है। लेकिन कई देशों में इन तीनों चीज़ों की उपलब्धता के बावजूद उन देशों के विकास और जीवन स्तर में बड़ी असमानता पायी जाती है।

ऐसी किस चीज़ की उपलब्धता या कमी है जो देशों की विकास दर को प्रभावित करती है?

नोबल विजेता अर्थशास्त्री पॉल रोमर

अर्थशास्त्री पॉल रोमर के अनुसार वह ‘वस्तु’ है – ‘विचार’। उन्होंने यह प्रूव किया कि विचारों का विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण योगदान है। एक व्यक्ति के द्वारा विचार या ज्ञान का उपयोग दूसरों के उपयोग करने की क्षमता को कम नहीं करता है। उदहारण के लिए, हर व्यक्ति डोसा बनाने के ‘ज्ञान’ का प्रयोग करके डोसा खा सकता है, लेकिन हर व्यक्ति ‘उस’ डोसे को नहीं खा सकता।

अब प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा केन और बेतवा नदी को जोड़ने के प्रयासों के बारे में बताया गया है कि इन नदियों को जोड़ने के ‘विचार’ से बुंदेलखंड जैसे सूखे क्षेत्र में स्थित मध्य प्रदेश के छत्तरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना, तथा उत्तर प्रदेश के महोबा, बाँदा, ललितपुर और झाँसी जिले के निवासियों को पीने के पानी और सिंचाई की सुविधा मिलेगी, साथ ही बिजली का भी उत्पादन होगा। इस योजना को इसी वर्ष लांच कर दिया जायेगा।

बुंदेलखंड के पास नदियाँ पहले भी थीं। सूखा भी पहले से ही व्याप्त था। गरीबी भी स्वतंत्रता मिलने के 70 वर्ष बाद भी थी। श्रम, स्किल और पूंजी भी थी। कमी थी सिर्फ एक दूरदर्शी नेतृत्व की, उस एक ‘विचार’ की जो इस क्षेत्र का कायाकल्प कर दे।

प्रधानमंत्री मोदी का योगदान उस विचार को देने का है और उस विचार के पीछे राजनीतिक पूँजी लगाने का है।

पॉल रोमर प्रधानमंत्री मोदी की आधार योजना के प्रशंसक भी है। उनके अनुसार भारत की आधार प्रणाली विश्व में सबसे परिष्कृत पहचान पत्र है।

और हाँ, पॉल रोमर को अर्थशास्त्र के लिए इस वर्ष का नोबेल पुरुस्कार मिला है जिसे वे विलियम नॉर्डहौस के साथ शेयर कर रहे है।

क्या कमी थी हमारे देश में? सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी जैसे दूरदर्शी नेतृत्व की

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