गरीबों के लिए दुआ कीजिये, राहुल जी को लाइए

मोदी सरकार के पहले भारत में रामराज्य था जिसमें गरीब आदमी बड़ा सुखी रहता था।

कारण था कि भारत में महान सरकारों का शासन था जो रॉबिनहुड थीं। अमीरों को लूटकर उनका पैसा गरीबों में बांटा करती थीं। साधारण शब्दों में क्रॉस सब्सिडी करती थीं।

जैसे मालगाड़ियों में माल भेजने का किराया ज़्यादा रखकर यात्री किरायों को सब्सिडाइज़ किया जाता था। ठीक है कि धीरे धीरे उद्योगों ने मालगाड़ियों की जगह ट्रकों से माल भेजना शुरू कर दिया। रेलवे की आमदनी कम होती गयी। घाटा बढ़ता गया।

सरकारें इतनी महान थीं कि जितना माल कम होता गया वो मालगाड़ियों का किराया उतना बढ़ाती गयी। यात्री किराये गरीबों की वजह से कम बने रहे। बुरा हो मोदी सरकार का जिसने यात्री किराये चार सालों में दुगुने से ज़्यादा कर दिए।

इसी तरह घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली 4 – 6 रूपये की दर से मिलती है जबकि व्यावसयिक प्रतिष्ठानों को लगभग दुगुने दर से। बेसिकली उनका बढ़ा टैरिफ गरीब उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने के काम आता है।

अब ठीक है कंपनियों, उद्योगों की लागत बढ़ती है, एक्सपोर्ट में खासतौर पर जहाँ एक एक प्रतिशत मार्जिन के लिए संघर्ष होता है वहां भी कम्पनियां पहले गरीबों का बिजली बिल चुकाती हैं।

दिल्ली में सब्सिडी सरकार ही बन गयी जो लगातार रिसर्च कर रही है कि सब्सिडी और कहाँ कहाँ दी जा सकती है।

और एक दुष्ट मोदी सरकार है!

ऐन चुनावों से पहले नया इलेक्ट्रिसिटी एक्ट आ रहा है जिसमें क्रॉस सब्सिडी को तीन सालों में खत्म किया जाना है। सरकार कह रही है कि सब्सिडी देना सरकारों का काम है। अगर गरीब उपभोक्ताओं को सब्सिडी देनी है तो वो राज्य या केंद्र सरकार देगी, व्यवसायिक प्रतिष्ठान नहीं।

बड़े उद्योगों के लिए क्रॉस सब्सिडी एक तरह से फीस उगाही है डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी से जुड़े रहने के लिए। अगर ये सब्सिडी ख़त्म हो गयी तो बड़े उद्योग ओपन मार्किट से किसी भी बिजली उत्पादन कंपनी से डायरेक्ट बिजली ले सकेंगे। डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी जिनमें बहुत सी सरकारी हैं उन पर असर पड़ेगा। और बिजली बनाने वाली कम्पनियां, सही डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क वाली कम्पनियां अधिकतर निजी हैं। या कहिये अम्बानी अडानी हैं।

सरकारी डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनियां घाटे में चल रही हैं। बिजली चोरी की समस्या से ग्रसित हैं। जनरेशन पिछले कई सालों में बढ़ा है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनियां बढ़े जनरेशन को उपयोग नहीं कर पा रही हैं। सरकार पूर्ण बिजली उपलब्धता के दावे कर रही है लेकिन आम जनता के लिए बिजली कटौती जारी है।

ऐसे में अगर बड़े बिजली उपभोक्ता और पावर जनरेशन कंपनियों में सीधा कांट्रैक्ट होता है तो बिजली बनाने वाली कम्पनियां प्रॉफिट में आएँगी।

केंद्र सरकार को बिजली बनाने वाली कम्पनियां रेवेन्यू ज़्यादा देती हैं। डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनियाँ स्टेट गवर्नमेंट को।

मोदी जी राज्यों को क्षति पहुंचा रहे हैं। मोदी सरकार निजी कंपनियों को बढ़ावा दे रही है।

गरीब लुट जायेंगे।

सब्सिडी मुख्यमंत्री केजरीवाल ने सभी विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर मोदी सरकार के खिलाफ सावधान किया है।

ये सरकार 2019 दुबारा आयी तो गरीब का क्या होगा। गरीबों के लिए दुआ कीजिये राहुल जी को लाइए।

कम से कम 15 साल के लिए आना चाहिए राहुल गांधी सरकार

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