ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहन : मोदी सरकार की एक पहल

भारत में आज के काल में ईमानदारी इतनी दुर्लभ हो गयी है कि यह मान ही लिया गया है कि जब तक आप अपने को ईमानदार प्रमाणित नहीं करते, तब तक लोगों के लिए आप बेईमान ही हैं।

यहां मनुष्य की ईमानदारी और बेईमानी को तो उसके व्यक्तिगत गुण और अवगुण के तराजू में समाज तौल लेता है लेकिन सरकार के लिये आप ईमानदार हैं या बेईमान हैं उसके लिए सिर्फ एक ही मापदंड होता है कि आप सरकार को अपने देय कर देने में कितने ईमानदार है।

21वीं शताब्दी के भारत का यह एक विचित्र विरोधाभास है कि जहां कल तक समाज व सरकार के लिये जनमानस का ईमानदार होना सर्वग्राह्य था, वहां अब बेईमान होना सर्वग्राह्य हो गया है।

इसलिये आज सरकार के लिये ईमानदार व्यक्ति को चिह्नित करना व समाज में उदाहरण बनाना इतना आवश्यक हो गया है कि ऐसे लोगों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता आ पड़ी है। यह शायद इसलिये है ताकि शेष समाज से वे अलग दिखें और लोगों के लिये प्रेरणा बनें।

मैंने इतना सब कुछ इस लिये लिखा है क्योंकि मोदी सरकार ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) के अंतर्गत एक समिति का गठन किया है जो सरकार को ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहन देने के लिये योजना प्रस्तावित करेगी।

वैसे तो पूर्व में आयकर विभाग में ‘सम्मान’ नाम से एक योजना थी लेकिन 2004 के बाद से तत्कालीन यूपीए की सरकार ने ईमानदारी को बोझ समझ कर उसे बन्द कर दिया था।

साल 2014 के बाद से ही सरकार ने कर वसूलने व काले धन की जमाखोरी को रोकने के लिये कई कठोर निर्णय लिये हैं और इसमें पकड़े जाने पर लोगों को दंडित भी किया है लेकिन अब सरकार को यह लग रहा है कि दण्ड देने की आवश्यकता के साथ, ईमानदारों को इनाम देने की भी आवश्यकता है।

यह समिति विभिन्न राष्ट्रों में इस तरह की योजनाओं की सफलता व असफलता का अध्ययन करेगी और भारत की परिस्थितियों को देखते हुये अपनी संस्तुति देगी। इस प्रोत्साहन योजना के लाभार्थी का चयन इस आधार पर नहीं होगा कि किस करदाता ने अपना कर कितना ज्यादा दिया है बल्कि इस बात पर होगा कि वह अपने कर देने में कितना नियमित है, उस पर कोई अर्थदंड नहीं लगा है, कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं हुई है, कोई छापा नहीं पड़ा है और कभी सर्वे में चिह्नित नहीं हुआ है।

आज अभी यह कहना बड़ा मुश्किल है कि मोदी सरकार ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिये खुद में क्या विचार रखती है लेकिन अन्य राष्ट्रों में इस तरह की प्रोत्साहित करने वाली योजनायें कैसी हैं, यह जानना रोचक होगा।

जापान में करदाताओं के लिये आदर्श बने करदाताओं को जापान के राजा के साथ फोटो खिंचवाने का सौभाग्य मिलता है, फिलीपींस में ऐसे करदाताओं के नाम वहां की राष्ट्रीय लॉटरी में छापा जाता है। दक्षिण कोरिया में उनको प्रशस्ति पत्र मिलने के साथ एयरपोर्ट में वीआईपी लाउन्ज में प्रवेश व मुफ्त में कार पार्किंग के लिये जगह मिलती है।

अपने पड़ोसी पाकिस्तान में हर वर्ष 100 बड़े करदाताओं को एयरपोर्ट में वीआईपी लाउन्ज में प्रवेश मिलता है। इनको इमिग्रेशन काउंटर पर प्राथमिकता, बिना किसी शुल्क के पासपोर्ट व ज्यादा सामान ले जाने की छूट मिलती है।

अब भारत में किस प्रकार का प्रोत्साहन दिया जाएगा, यह तो भविष्य ही बतायेगा लेकिन मैं यह उम्मीद करता हूँ कि इसी बहाने कहीं मोदी जी के साथ चाय पीने का मौका हाथ लग जाये तो मज़ा आ जाये! मेरी तो सोच मोदी जी तक ही है लेकिन अब आप भी लगे हाथ यह बता दें कि आप क्या उम्मीद करते हैं?

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