56 इंच की ही है प्रधानमंत्री मोदी की छाती

लेख के मुद्दे पर आने से पहले यह समझना जरूरी है कि…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र एवं रणनीति के तहत एक सुसंगठित दुष्प्रचार अभियान अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहुत लम्बे समय से चल रहा है कि ट्रम्प झक्की है, ट्रम्प सनकी है, ट्रम्प आधा पागल है… ट्रम्प को यह नहीं आता… ट्रम्प को वह नहीं आता… आदि आदि।

इसके ठीक विपरीत मेरा मानना है कि डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी हितों के प्रति शत प्रतिशत समर्पित एक अत्यन्त कुशल कठोर और बहुत अहंकारी शासक है।

केवल 3 वर्ष के अपने कार्यकाल में ट्रम्प ने अपनी आर्थिक रणनीति से आज डॉलर को उस स्थिति पर पहुंचा दिया है जहां पाउंड, यूरो, येन, रूबल, चाइनीज़ युआन समेत दुनिया के सभी शक्तिशाली देशों की करेंसी डॉलर के मुकाबले काफी कमज़ोर हुईं हैं। सम्भवतः कई दशकों बाद अमेरिकी डॉलर का ऐसा जलवा देखने को मिल रहा है।

राजनीतिक/ कूटनीतिक/ सामरिक मोर्चे पर डोनाल्ड ट्रम्प ने उस उत्तर कोरिया को घुटनों पर ला दिया है जिस उत्तर कोरिया को लाख प्रयासों के बावजूद पिछले लगभग 50 वर्षों से अमेरिका काबू नहीं कर पा रहा था।

ऐसे सफल, शातिर, शक्तिशाली और अहंकारी डोनाल्ड ट्रम्प ने बहुत साफ और कठोर शब्दों में रूस को अपना घोर शत्रु घोषित करते हुए भारत को रूस के साथ कोई रक्षा सौदा या किसी भी प्रकार का वाणिज्यिक सौदा नहीं करने की कड़ी चेतावनी दी थी।

इस चेतावनी के बाद, 1 अक्टूबर को डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से उद्दंडतापूर्वक यह दम्भी दावा कर के भारत पर अपने दबदबे का सन्देश देने की कोशिश की थी कि “भारत मुझे खुश करने के लिए अमरीका के साथ व्यापार करार करना चाहता है।”

एक भारतीय होने के नाते मुझे डोनाल्ड ट्रम्प का उपरोक्त दावा बहुत चुभा था। मैं यही प्रतीक्षा कर रहा था कि भारत इसका क्या और कैसा जवाब देगा।

इसके कुछ ही दिन बाद भारत ने डोनाल्ड को मुंहतोड़ उत्तर दिया है। ट्रम्प की चेतावनी को किनारे कर भारत ने रूस के साथ 39,000 करोड़ रुपये के एयर डिफेंस सिस्टम S-400 खरीदने समेत लगभग 70 हज़ार करोड़ के अन्य सामरिक वाणिज्यिक सौदों के समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

साथ ही साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूस और राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को भारत का घनिष्ठ मित्र घोषित करते हुए अगले 7 वर्षों में वर्ष 2025 तक रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर लगभग सवा दो लाख करोड़ रूपये तक पहुंचाने की घोषणा भी की।

इन सौदों और समझौतों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बहुत स्पष्ट सन्देश दिया है कि भारत एक संप्रभुता सम्पन्न स्वतन्त्र राष्ट्र है जो अपने फैसले स्वयं करने में पूरी तरह सक्षम है और ऐसे फैसले करते समय वह यह चिन्ता नहीं करता कि उसके फैसले से कौन खुश नहीं होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी दर्शा दिया है कि उनकी छाती 56 इंच की ही है, क्योंकि अमेरिका के दबाव को इस तरह अनदेखा और उपेक्षित करने के लिए 56 इंच की छाती होना ही ज़रूरी है।

इसे एक तथ्य से समझने में आप मित्रों को आसानी होगी कि अपने साढ़े 4 वर्ष के अबतक के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग साढ़े 4 लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदे किये हैं। जबकि मनमोहन सरकार अपने 10 वर्ष के कार्यकाल में एक भी बड़ा रक्षा समझौता नहीं कर सकी।

जिस राफेल युद्धक विमान समझौते को केवल 2 वर्ष में (2016 में) पूर्ण कर मोदी सरकार उसे अगले वर्ष 2019 में भारतीय वायुसेना को सौंप देगी उस राफेल युद्धक विमान को खरीदा जाए, या नहीं खरीदा जाए? मनमोहन सिंह की सरकार अपने 10 वर्ष के कार्यकाल में यह फैसला तक नहीं कर पायी थी। क्योंकि भ्रष्टाचार के साथ ही साथ उसपर अमेरिकी F-16 खरीदने का भारी अमेरिकी दबाव भी था। ऐसे दबावों को निष्प्रभावी करने के लिए 56 इंच की छाती की ही ज़रूरत होती है।

कल मैंने लिखा था कि जिसके हाथ में देश की बागडोर है उसकी छाती 56 इंच की है या नहीं, इसे अगले 36 घण्टों में देश के साथ दुनिया भी देखेगी।

मैंने 36 घण्टे की समयावधि इसलिए लिखी थी क्योंकि मुझे अमेरिकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा थी जो S-400 डील पर हुए हस्ताक्षरों के तत्काल बाद ही आ गयी है कि… अमेरिका की अपने सहयोगी देश की क्षमता में वृद्धि पर आघात करने की कोई मंशा नहीं है।

यह अमेरिकी प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समझ और संभावनाओं के दोहन की विलक्षण योग्यता को दर्शा गयी है।

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