अब अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट पर कई दशकों तक नहीं हो पाएगा वामपंथियों का क़ब्ज़ा

अमेरिका की सीनेट (जैसे हमारी राज्य सभा) ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा नियुक्त जज Brett Kavanaugh की नियुक्ति को सहमति दे दी है।

वहाँ जज ऐसे ही बनते है। स्वयं को नियुक्त नहीं करते जैसे हमारे यहाँ करते हैं।

राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति के बाद सीनेट की एक समिति में जज की पूरी जाँच होती है, फिर पूरी सीनेट की बैठक में वोटिंग होती है। वहाँ नेताओं व जजों के बच्चे ही जज नहीं बनते।

ख़ैर, लेख जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया के बारे में नहीं है।

जज Brett Kavanaugh के विचार वामपंथियों से मेल नहीं खाते। आतंकी के लिए दो बजे कोर्ट नहीं खोलेंगे वो, न सबरीमाला की परम्परा तोड़ेंगे।

इतना काफ़ी था वामपंथियों के लिए पागल होने के लिए। सीनेट की समिति में पूरा विरोध किया कि उनके विचार उन्हें जज बनाने लायक नहीं है।

फिर भी जब बात नहीं बनी तो एक महिला सामने आयी कि जब वो व जज स्कूल (स्कूल, कॉलेज नहीं) में पढ़ते थे तो जज ने उस महिला को molest किया था।

महिला को कुछ याद नहीं था कि कब, कहाँ, किस घर में पार्टी हुई थी। दो-तीन गवाहों के नाम लिए महिला ने उन्होंने कह दिया कि उन्हें ऐसा कुछ भी याद नहीं है।

लेकिन वामपंथियों ने और ज़ोर से छाती पीटनी आरम्भ कर दी, और बाल नोंचने आरम्भ कर दिए कि एक बलात्कारी को जज बनाया जा रहा है।

अंतत: जज ने अपने बचाव में सीनेट की समिति में बहस की व सीनेटर संतुष्ट हो गए कि जज सही है।

अमेरिका में जज सेवानिवृत्त नहीं होते सुप्रीम कोर्ट के, मरने तक जज रहते हैं। इसलिए अब अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट पर कई दशकों तक वामपंथियो का क़ब्ज़ा नहीं हो पाएगा। इसलिए पागल हो गए है वहां के वामपंथी।

पूरे मामले से एक ही बात सिद्ध होती है : वामपंथी सत्ता का महत्व ही नहीं जानते, वे ये भी जानते हैं कि सत्ता मिलनी चाहिए, कैसे मिली ये किसी को याद नहीं रहता, न ही इससे कोई अंतर होता है सत्ता के प्रकार में।

इसीलिए सत्ता के लिए वे बलात्कार कर भी सकते हैं व बलात्कार के झूठे आरोप विरोधियों पर लगा भी सकते हैं। सत्ता पाने के लिए कुछ भी ग़लत, अनैतिक करना पड़े, वामपंथी करेंगे।

क्योंकि वे जानते हैं कि सत्ता सब बदल देती है।

तुर्की के हर सुल्तान ने सुल्तान बनते ही अपने सारे सगे भाइयों का क़त्ल किया। हर नए सुल्तान के लिए युरोप के नगरों पर धावा बोलकर लड़कियाँ लाई जाती। फिर भी मुसलमानों ने सदा तुर्की के सुल्तान को ही ख़लीफ़ा माना।

औरंगज़ेब ने बादशाह बनते ही अपने सगे भाइयों का क़त्ल किया। लेकिन भारत के सारे मुसलमान उसे पूजनीय मानते हैं। क्योंकि मुसलमान जानते हैं कि सुल्तान, बादशाह अपना होना चाहिए, कैसे बना ये मायने नहीं रखता।

हिंदू तो हिंदू राजा से संत होने की मांग करेगा, आसमान मांगेगा उससे, ये नहीं होगा तो उसे हरा देगा, और फिर दास बनकर बिल में घुस जाएगा।

मध्यप्रदेश व राजस्थान देश के सबसे ग़रीब राज्यों में हैं। स्वतन्त्रता के बाद अधिकतर यहां किसका राज था? कांग्रेस का।

अब कह रहे है दोनो राज्यों के हिंदू कि भाजपा से चाँद मांगा, नहीं दिया इसलिए फिर कांग्रेस को लाएँगे। और कांग्रेस को राज्य पर थोपकर मुंबई व बंगलोर नौकरी करने निकल लेंगे।

कुछ नस्लों को राज करने के लिए पैदा करता है भगवान, व कुछ को दास होने के लिए। दास नस्ल को राज मिल भी जाये तो पाँच साल में ही उसे खोकर फिर दास बन जाती है दास नस्ल।

(एक मित्र की टाइमलाइन से सधन्यवाद कॉपी किया गया)

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