इस वीडियो का हमारी-आपकी ज़िंदगी से क्या संबंध हो सकता है?

आप से एक निवेदन है। इस छोटे से वीडियो को कृपया ध्यान से देखें। आप के लिए, देश के लिए बहुत आवश्यक है कि आप इस बात को अच्छे से समझें।

यह बिलियर्ड्स का खेल है। न न, मैं आप को यह खेल खेलने को नहीं कह रहा।

इसमें आप को केवल इतना देखना है कि जिस गेंद को पॉकेट में डालना है उसको तो सीधा छुआ ही नहीं जा रहा। क्यू स्टिक किसी और ही गेंद को किसी और ही दिशा में धकेलती है।

वह गेंद या तो टेबल की दीवारों से टकराकर किसी और गेंद से टकराती है, जो किसी और से, जो किसी और से… अंततोगत्वा कोई ऐसी गेंद, जिसका आप को अंदाजा ही नहीं है, उस वांछित गेंद को पॉकेट में धकेलती है।

साथ साथ यह भी हो रहा है कि इस पूरी गति प्रक्रिया के चलते कोई और गेंद गति पा कर किसी और भी वांछित गेंद को किसी दूसरे पॉकेट में धकेलती हैं। कुल मिलाकर खिलाड़ी का स्कोर बढ़ता है।

यहाँ आप को एक बात समझ में आई होगी कि खिलाड़ी को, बिसात को समझकर यह निर्णय लेना होता है कि किस गेंद पर कैसे और कितनी ताकत से प्रहार करना है। यहाँ यह भी देखा जाता है कि आप एक ही प्रहार से अपना लक्ष्य पा सकते हैं या नहीं, या कितनी बार आप को अलग अलग स्थानों से प्रहार करने पड़ते हैं।

फिल्म में कुछ ही समय में दूसरे खिलाड़ी की भी एंट्री होती है। वो भी उन्हीं गेंदों को अपने हिसाब से छेड़ता है। लेकिन उसके लिए उन गेंदों की स्थिति वो होती है जो आप के प्रहार से उत्पन्न हुई है। या फिर आप भी वह दूसरा खिलाड़ी हो सकते हैं जिसे पहले खिलाड़ी के निर्मित परिस्थिति को अपने फ़ेवर में लाना है। आप यह भी देखिये कि खिलाड़ियों को अपनी पोजीशन भी बार बार बदलनी होती है।

राजनीति यही होती है। बिसात को पहचानना, मोहरों की स्थिति, सीमाओं का आंकलन, कुल क्षेत्र की समझ – क्षेत्र क्षेत्रज्ञ योग – कहीं पढ़ा तो होगा – और अपने प्रहार की क्षमता।

इंटरनेशनल हो या लोकल हो, राजनीति यही होती है। खिलाड़ी की स्किल की लेवल बढ़ती जाती है। प्राइज़ वैल्यू भी।

इस लेख का उद्देश्य केवल इतना बताना है कि इंटरनेशनल लेवल पर कई सारी बातें होती हैं जिनका दूर दूर से हमें कोई संबंध नहीं लगता। इसलिए हम जब कोई मोदी जी को भारत का NRI प्रधान मंत्री कहता है तो कहकहे लगाते हैं। या फिर अगर किसी अन्य देशों की भारत सहायता करता है तो कोसते हैं कि यहाँ के गरीबों का क्या?

हमें यह समझना चाहिए कि कुछ खिलाड़ियों के लिए हम तो सालों तक एक गेंद ही रहे थे, यहाँ से वहाँ धकेले जानेवाले, जिसे ये इंटरनेशनल मल्टी प्लेयर गेम में हर प्लेयर ने अपने पॉकेट में डालना चाहा है।

आज मोदी जी एक ऐसे व्यक्ति हैं जो भारत को गेंद से बदलकर खिलाड़ी बना रहे हैं। लेकिन यह आसान नहीं होता और कहीं न कहीं गेंद भी बनाया जाता ही है। इसको भी स्वीकार करना होता है और परिस्थिति और मौके की प्रतीक्षा करनी होती है।

भारत भी गेंद बनता है जब मार्केट गिराए जाते हैं, आयातित चीजों के सप्लाई या दाम में आकस्मिक और बड़े परिवर्तन होते हैं।

यह अपरिहार्य है, देश ने उड़ान भरी है यह आप देख ही रहे हैं, इसलिए कुर्सी की पेटी बांध रखिए और धैर्य बनाए रखिए। सफर लंबा है, हो सकता है आप की अगली पीढ़ी ही गंतव्य स्थान पर पहुंचेगी – अगर आप ने धैर्य नहीं छोड़ा तो।

जय हिन्द।

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