इतिहास के पन्नों से – 6 : षटकोण यंत्र Vs स्टार ऑफ डेविड

यहूदियों का रिलीजियस सिंबल ‘सिक्स पॉइंटेड स्टार’! .. हिंदी में बोले तो ‘षटकोण’ ! .. यहूदी लोग इसे ‘स्टार ऑफ डेविड’ कहते हैं। और पूरी दुनिया में भी अब ये इसी नाम से जाना जाता है।

डेविड यूनाइटेड किंगडम ऑफ इजरायल एंड जुडाह का सेकंड किंग होता है। इनका शासनकाल 1010-970 BCE होता है। ये यहूदियों के लिए बहुत ही यशस्वी और प्रतापी राजा होता है। और इन्हीं के नाम ये ‘सिक्स पॉइंटेड स्टार’ का नाम रखा गया है याने कि ‘स्टार ऑफ डेविड’।

इस स्टार का यहूदियों में चलन 3री से 4थी शताब्दी में ज्यादा होने लगा। इससे पहले बहुत कम था। लेकिन जब ये आम व्यवहार में आया तो इनका नाम किंग डेविड पे रखा गया। और आज हालत ये है कि इसे ‘स्टार ऑफ डेविड’ के ही नाम से जाना जाता है। और इसका महत्व कुछ इस प्रकार है कि ये ‘स्टार ऑफ डेविड’ इजरायल के राष्ट्रीय झंडे में भी स्थान पाया हुआ है।

लेकिन इस डेविड के स्टार की जरा और खोजबीन करते हैं।

डेविड तो हुए ईसा पूर्व 1000 के आस पास के। लेकिन क्या इनके पूर्व इस स्टार का चलन अन्य जगह नहीं था ?? किन्हीं अन्य सभ्यता में इसकी मौजूदगी नहीं थी ?? क्या डेविड के जन्म के बाद ही ये अस्तित्व में आया ?
नहीं.. ऐसा बिल्कुल भी नहीं है .. इसके पूर्व भी ये अस्तित्व में था और बहुत बृहत स्तर में था।

उधर की ही बात करे तो सुमेरियन,बेबिलोनियन,आकडियन सभ्यता में भी इसका अस्तित्व था। सुमेरियन सभ्यता की बात करे तो इसका समय 4500-1900 BCE का है। मतलब कि डेविड के लगभग 3500 साल पहले। इसमें एक देवी थी नाम ‘इश्टर'(Ishtar)! अन्य नाम इनन्ना(Inanna) भी।
इनकी एक सील मिली जिसमें देवी इश्टर ‘सिक्स पॉइंटेड स्टार’ को पकड़ी हुई है। याने कि ‘स्टार ऑफ डेविड’ को। मतलब कि सुमेरियन सभ्यता में इस स्टार का चलन था और ये देवी इश्टर से संबंधित था। देवी इश्टर याने गोडेज ऑफ हैवेन! देवी इश्टर को भारतीय परिपेक्ष्य में देखे तो देवी दुर्गा से ढेरों समानताएं हैं।

खैर यहाँ ये बात स्पष्ट है कि ‘स्टार ऑफ डेविड’ का अस्तित्व किंग डेविड से बहुत पहले का है। हजारों वर्ष पहले का है। सो इट इज नोट रिलेटेड तो ज्युज, इट इज अडॉप्टेड फ्रॉम समव्हेर.. बट फ्रॉम व्हेर?

अगर इन्होंने सुमेरिया से अडॉप्ट किया तो सुमेरियन लोगों ने फिर कहाँ से अडॉप्ट किया? क्या सुमेरियन के अलावा कहीं और भी इसका चलन था?
हां जी.. बिल्कुल था और अब भी है और बहुत है.. और वो जगह है भारत।
भारत में ये ‘षटकोण यंत्र’ के नाम से जाना जाता है। और ये ‘द्वैतवाद’ को निरूपित करता है। याने ‘स्त्री और पुरूष’.. ‘पुरुष और प्रकृति’.. ‘शिव और शक्ति’।

दो त्रिभुज मिल के षटकोण का निर्माण करते है। एक उर्ध्वगामी (अपवर्ड) त्रिभुज और दूसरा डाउनवर्ड त्रिभुज। .. और जब ये इन्टरसेक्ट करते है तो बाहर छः त्रिभुज बनते है और अंदर एक हेक्सागोन(Hexagon). इसे ही ‘सिक्स पॉइंटेड स्टार’ कहते है।

डाउनवर्ड ट्राइएंगल ‘स्त्री’ को निरूपित करता है (मॉडर्न साइंस सिंबल में भी) याने ‘शक्ति’ को और अपवर्ड ट्राइएंगल ‘पुरुष’ को याने ‘शिव’ को। और जब ‘स्त्री और पुरुष’ मिलते है तो निर्माण होता है। शिव-शक्ति का मिलन याने क्रिएशन।

जब ये दो त्रिभुज (शिव-शक्ति) लॉक्ड होते है तो बनता है शानमुख (Shanmukha) या अरुमुगन(Arumugan/Arumuhan) याने छः मुख वाला याने सिक्स फेस वाला। और ये छः मुख वाले कौन? तो नाम ही है अरुमुहम/शानमुखम याने मुरुगन स्वामी।

शिव और शक्ति के मिलन से उत्पन्न हुए मुरुगन स्वामी याने कार्तिकेय।

सिक्स पॉइंट्स प्रतीक है शिव और शक्ति के मिलन का और भगवान मुरुगन स्वामी का।

यहीं से ये सिंबल सुमेरिया गया (किंग मर्दुक और मुरुगन स्वामी के बीच संबंध बता चुके है) और फिर सुमेरिया से इजरायल। डेविड के बाद किंग सोलोमन ने इसे मुहर के रूप में इसे अपने राज्य में चलन में लाया और अब यहूदी तो इससे चिपक ही गए है और नाम भी ‘स्टार ऑफ डेविड’ ही कर दिए और इसे अपने राष्ट्रीय झंडे में स्थान भी दे दिए है।

फिर भी कुछ तथाकथित अंग्रेज छाप हिन्दुस्तानी ताने मारते रहेंगे कि हमने दुनिया को दिया क्या??

अबे दुनिया इधर से ही फैली हुई है।

बस जरा आँख-कान खुले रखो.. माइंड ब्रॉड करो.. सब कुछ दिखाई सुनाई देने लगेगा।

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1 COMMENT

  1. मानव की पूरी सभ्यता भारत से ही आगे बढ़ी है । उसके इतने सारे साक्ष्य संस्कृत साहित्य में है कि सबको बोलती बंद हो सकती है , लेकिन वो विदेशी मानने को तैयार नहीं , शायद हममें से कुछ ‘ भारतीय ‘ भी नहीं ?!!!!

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