पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ने का क्या कारण है?

देखो भईया… अभी 5 रूपए कम करने के बाद पेट्रोल 83 – 85 रूपए से 78 – 80 रूपए प्रति लीटर हो गया।

मोदी सरकार ने 5 रूपए कम करवाए हैं, पर इसके बाद भी यदि दाम 50 पैसे, 30 पैसे कर के बढ़ता रहेगा और फिर वही रोज़ की हाय-हाय किच-किच, जीएसटी में लाओ, जीएसटी में लाओ का रोना शुरू, जीएसटी में लाने के बाद पेट्रोल/ डीज़ल के दाम नहीं बढ़ेंगे क्या?

सीधी भाषा में समझता हूं सिम्पल अर्थशास्त्र…

“जब किसी वस्तु की मांग अधिक होती है, और मांग के अनुसार उस वस्तु की सप्लाई या उत्पादन नहीं होता है तो कीमत में वृद्धि होती है।”

पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ने का क्या कारण है?

आपको लगता होगा कि मोदी सरकार तेल के दाम बढ़ाती है, कई तरह के टैक्स वसूलती है इसलिए पेट्रोल के दाम बढ़ते है! जबकि ऐसा नहीं है।

क्या आपने पिछले दिनों कभी सुना कि मोदी सरकार ने पेट्रोल/ डीज़ल पर एक्सर्साइज़ बढ़ा दिया या वैट बढ़ा दिया? नहीं सुना होगा, या 5 वर्षो में 1 या 2 बार सुना होगा…

एक्सर्साइज़ टैक्स केंद्र सरकार लगाती है, जबकि वैट राज्य सरकार।

लेकिन क्या सच में यही कारण है पेट्रोल/ डीज़ल के दाम बढ़ने का?

जवाब है – नहीं…

क्या जीएसटी के दायरे में लाने से पेट्रोल/ डीज़ल के दाम बढ़ना बंद हो जाएगा?

जवाब है – नहीं… तब भी बढ़ेगा क्योंकि तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित किए जाते है।

जब भी सरकार बढ़ते हुए पेट्रोल/ डीज़ल पर राहत देने के लिए टैक्स की दर में कटौती करती है तो देश का राजकोषीय घाटा बढ़ जाता है। क्या आप में से कोई ये चाहेगा कि देश घाटे में रहे? नहीं ना…

सरकार टैक्स के पैसों से क्या करती है?

ये सबको पता है कि सरकार विभिन्न तरह के टैक्स वसूल कर विभिन्न तरह की कल्याणकारी योजनाएं चलाती है, गरीबों, मध्यम वर्ग के लोगों के लिए। देश का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करती है। विकास करती है।

क्या सरकार की वजह से पेट्रोल/ डीज़ल के दामों में वृद्धि होती है?

नहीं, इसके पीछे तेल उत्पादक देशों और संगठनों का हाथ होता है। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 80 से 90 प्रतिशत तेल आयात करता है ईरान इत्यादि तेल उत्पादक देशों से। भारत में तेल की मांग दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन मांग के अनुसार ईरान जैसे तेल उत्पादक देश उत्पादन नहीं कर रहे हैं, सप्लाई नहीं कर रहे हैं। तो ज़ाहिर सी बात है ज्यादा तेल खरीदने के लिए कीमत ज्यादा चुकानी होगी। इसका असर पूरे विश्व पर पड़ रहा है।

एक कारण और है, अमेरिका लगातार ओपेक देशों पर तेल उत्पादन बढ़ाने का दबाव बना रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि इससे अधिक तेल उत्पादन नहीं किया जा सकता, यही ईरान और अमेरिका के बीच झगड़े की वजह भी है।

भारत ने आबू धाबी में लोअर जैकम तेल कंपनी में 10% हिस्सेदारी भी खरीदी है, पर उस कंपनी ने भी अब तक उत्पादन नहीं बढ़ाया है।

ईरान से ही अधिकतर तेल क्यों खरीदता है भारत?

क्योंकि ईरान से तेल खरीदना सस्ता पड़ता है, या यूं कह लीजिए ईरान कम दाम में तेल बेचता है।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम कम होने के बावजूद भारत में पेट्रोल की बढ़ती कीमत के पीछे यही डिमांड एंड सप्लाई सबसे बड़ी वजह है। इसी कारण तेल महंगा हो रहा है रोज़ रोज़।

साथ ही साथ भारत ऐसी ही आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए क्रूड ऑयल रिज़र्व भी बना रहा है। वर्तमान में 14.8 मिलियन मीट्रिक टन क्रूड ऑयल रिज़र्व है, जबकि भारत 17.83 मिलियन मीट्रिक टन के नए क्रूड ऑयल भंडार 2 चरणों में बना रहा है जिसमें से 11.83 एमएमटी की मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट द्वारा दी जा चुकी है।

अभी तक तेल की कीमत कम न हो पाने का एक कारण और भी है। 2 लाख करोड़ से अधिक का ऑयल बॉन्ड रूपी ऋण जो कांग्रेस सरकार ने लिया था, उसको मोदी सरकार ने ब्याज सहित चुकाया है। साथ ही साथ कांग्रेस सरकार ईरान पर 6.5 अरब डॉलर का तेल बकाया छोड़ कर गई थी, जो आज भी भारत की तेल कंपनियां चुका रही हैं।

कांग्रेस सरकार ने पेट्रोल/ डीज़ल पर लगभग 2012-13 और 2013-14 में 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक सब्सिडी के रूप में उड़ाए है तब जा कर उस वक़्त पेट्रोल हमको 73 – 75 रूपए प्रति लीटर मिलता था। नहीं तो असली कीमत तो कुछ और ही होती। मनमोहन सिंह ने तो बयान भी दिया था कि कीमत बढ़ानी ज़रूरी है क्योंकि पैसे पेड़ पर नहीं लगते.

मोदी सरकार के हाथ में जितना है, मोदी सरकार देशवासियों के लिए कर रही है। साथ ही साथ पेट्रोल के विकल्प पर भी तेजी के नीतियां बना रही है और उसको लागू कर रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, बायो फ्यूल, एथेनॉल, सीएनजी इत्यादि के रूप में।

यदि आपको इस समस्या से बचना है और आप नई गाड़ी लेने की योजना बना रहे है तो हाइब्रिड व्हीकल बाज़ार में आने तक कुछ दिन रुक जाइए। या फिर इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदिए। क्योंकि न्यू इंडिया का भविष्य ग्रीन एनर्जी ही है।

ISPRL क्या है, Crude Vault क्या है, नहीं पता, लेकिन चुटकुलों पे खिलखिला रहे हैं

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