हिंदू की उग्रता के ज़िम्मेदार आप हैं, माय लॉर्डशिप…

दूसरी तस्वीर तब की है, जब श्रीमती सोनिया गांधी इस देश की प्रधानमंत्री थीं (सरदार मनमोहन सिंह उनके शैडो-रिक्रूट भले थे)।

वेटिकन का राज पूरे देश में पसरा हुआ था और तब रामसेतु से लेकर राम तक के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न उठाया जा रहा था।

आज जब श्री राहुल गांधी गली-गली में जनेऊ धारण कर भटक रहे हैं, तो लोगों को यह जरूर याद दिलाया जाना चाहिए।

साथ ही, यह भी याद दिलाना चाहिए कि राहुल अधिक से अधिक पारसी हो सकते हैं, हिंदू तो कतई नहीं… बशर्ते उन्होंने स्व. दिलीप सिंह जूदेव के अभियान घर-वापसी के द्वारा हिंदुत्व में वापसी न की हो।

….पहली फोटो उसी जड़ता और मूर्खता का प्रतीक है, जिसे चहुंदिश हिंदुओं पर थोपा जा रहा है।

कृष्ण और राम का प्रमाण मांगनेवाले घामड़ों को क्या इतनी हिम्मत है कि वे जीसस और मुहम्मद का प्रमाण मांग सकें?

इस तरह की बकवास को आप कोर्ट में या कहीं भी प्रश्रय देकर हिंदू जन को आक्रामक और हिंसक बनने पर मजबूर कर रहे हैं, माय लॉर्डशिप।

एक कहावत है कि किसी को उतना भी न डराइए कि उसका डर ही खत्म हो जाए। हिंदुओं की आंख में भी उतनी उंगली न हो कि वह उंगली को ही तोड़ डाले…

…सोचने की बात है कि यह हिम्मत आती कहां से है?

दरअसल, ‘दुर्घटनावश हिंदू’ जवाहरलाल नेहरू ने इस देश की जड़ में वो मट्ठा डाल दिया, जिसके बाद अ-भारतीय मूल्यों और प्रतिमानों को धुर देशद्रोही वामपंथियों ने खूब सहेजा, जिनका एकमात्र उद्देश्य भारत के टुकड़े-टुकड़े करना है।

तथाकथित आज़ादी के बाद से ही गांधी और नेहरू के नेतृत्व में हिंदुओं को दीवार से सटाने का काम हुआ है। अब एकाध जगह और राज्यों में हिंदू पलटवार कर रहा है, तो आपको दिक्कत हो रही है… श्रीमंतों!

आप अगर अब भी नहीं सुधरे तो जनता आपको सड़क पर दौड़ा कर मारेगी। अपनी कुबुद्धि और दुर्बुद्धि अपनी जेब में रखिए और निकल लीजिए… यह देश आपके बाप का नहीं है।

….हिंदू धर्म किसी की बपौती नहीं है, न ही यह खेत और खलिहान का मसला है, न ही यह प्रमेय है जिसको सिद्ध करने का हम प्रमाण देते रहें। आप समझ रहे हैं न, माय लॉर्डशिप!

जेहाद हमारे घरों में घुसा है, हम उड़ा रहे हैं कबूतर

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