इतिहास निर्मोही है, निर्मम है, और निष्पक्ष भी

इतिहास के साथ एक समस्या है कि उसका वर्तमान समकालीन सत्ताधारी लिखता है, और वो स्वयं को महिमामंडित करने से नहीं चूकता।

लेकिन फिर इतिहास के पास एक विशेषता और भी है कि, इतिहास समय के साथ अपना मूल्यांकन करता रहता है। इस तरह से इतिहास का कचरा साफ़ होता रहता है।

प्रमाण के रूप में देख लीजिये, पिछली शताब्दी के अनेक नायकों का आज कोई नामलेवा नहीं।

विश्व-इतिहास, जो कि ले-दे कर दो से तीन हजार साल में सिमट जाता है, उसमें भी उनके कितने नायक हैं, जिन्हे इतिहास अब भी सर-आँखों पर बिठाये हुए है? गिनती के दो-चार।

जबकि हजारों हजार साल के सनातन इतिहास के पास अब भी अनगिनत महानायक हैं जिनके नाम सात सौ साल के गुलाम भारत के विदेशी सत्ताधारी भी मिटा नहीं पाए।

कहाँ से प्रारम्भ करूँ!

श्रीराम से लेकर श्रीकृष्ण, वाल्मिकी से लेकर वेदव्यास, महावीर से लेकर बुद्ध, चाणक्य से लेकर शंकराचार्य आदि आदि। यह सूची अंतिम नहीं, और इसका यहां अंत भी नहीं।

इतिहास की उपरोक्त शुद्धिकरण प्रक्रिया आधुनिक भारत में भी आज भी उतनी ही संदर्भित है, जितनी यह पूर्व में रही आयी है।

एक उदाहरण से इसे आसानी से समझ सकते हैं।

पिछले दिनों मैंने हिंदी के प्रतिष्ठित लेखक भगवान सिंह जी को पढ़ा और पाया कि वे नेहरू और भारतीय वामपंथियों को एक साथ कठघरे में खड़ा कर देते हैं, पूरे तर्क और तथ्यों के साथ, मगर गांधी जी के साथ मजबूती से खड़े नज़र आते हैं।

जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उन्हें एक दिन फोन किया था, और फिर लम्बी बातचीत में पहले उनके लिखे का समर्थन करता रहा, फिर धीरे से इजाज़त लेकर आदरपूर्वक गांधी जी पर अपनी असहमति दर्ज की।

जब मैंने पाया कि वे मेरी असहमति के लिए तैयार नहीं तो सिर्फ इतना ही कह कर बात ख़त्म की थी कि आप की पीढ़ी ने नेहरू का मूल्यांकन कर दिया था, हमारी पीढ़ी ने गांधी जी का कर दिया है।

मैं जानता हूँ वे मेरी बात से सहमत नहीं होंगे। ठीक उसी तरह से जिस तरह से मैं कई मुद्दों पर अगली पीढ़ी से असहमति रखता हूँ।

मेरी और उनकी टेलीफ़ोन की बातचीत तो उस दिन समाप्त हो गई मगर इतिहास अपनी सफाई का काम निरंतर जारी रखता है।

दावे से कह सकता हूँ कि भारत के सनातनी महानायक तो इतिहास के पटल पर ध्रुव तारे की तरह स्थिर हो चुके हैं मगर अगली पीढ़ी के आधुनिक नायक कोई और होंगे।

क्या करें, इतिहास निर्मोही है, निर्मम है, और निष्पक्ष भी।

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