जो हमने दास्ताँ ‘उनकी’ सुनाई, ‘आप’ क्यों रोए?

गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने पर लोग क्यों रोते हैं, समझ नहीं आता! गरीब रोए तो समझ आता है, पर अमीर और व्यापारी रोए ये समझ नहीं आता…

शुरुआत से शुरू करते हैं। एक जनवरी 2014, एलपीजी सिलेंडर का दाम 1241 रूपए हो चुका था, जिसमें से कितनों को सब्सिडी मिलती थी, कितनों को नहीं मिलती थी, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है।

मई 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। उनकी नीतियों के कारण सिर्फ एलपीजी क्षेत्र में क्या बदलाव हुए वो देखिए…

प्रधानमंत्री मोदी ने आते ही आपके गैस कनेक्शन को आधार और बैंक अकाउंट से जोड़ा, जिससे ब्लैक मार्केटिंग, जो अपने चरम पर थी, एक झटके में नीचे आ गई और सबको आसानी से गैस उपलब्ध होने लगी।

पहले लंबी लंबी लाइन घंटो तक लगती थी, बुकिंग के लिए भी और गैस सिलेंडर पाने के लिए भी, मोदी जी ने इस व्यवस्था को ऑनलाइन कर दिया। मतलब मोबाइल से जोड़ दिया, कॉल करिए और गैस बुक, अगले दिन गैस घर पर।

उज्ज्वला योजना की शुरुआत की, जिसमें 5 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन देने का निश्चय किया गया। आज लगभग 5.5 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन बांटे जा चुके है, और 5 करोड़ के लक्ष्य को अब 8 करोड़ कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा गिव इट अप, जो समर्थ व्यक्ति हैं वो अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दें, देखते ही देखते 1 करोड़ से अधिक परिवारों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी।

प्रधानमंत्री मोदी अपनी नीतियों से एलपीजी गैस का दाम नियंत्रित कर 750 से 850 रूपए के बीच ले कर आए। स्मरण रहे कि एक जनवरी 2014 को यही गैस 1241 रूपए का हो चुका था।

आज जब दुबारा गैस के दाम बढ़े है तो यह लगभग 950 रूपए पर मिल रहा है। आज किसी कारणवश दाम बढ़ा है, कुछ दिन में घट भी जाएगा, पर जिनको सब्सिडी मिलती है, उनको यह गैस 500 रूपए का ही पड़ रहा है, 450 रूपए सब्सिडी आ जाती है।

अब व्यापारी किस हिसाब से रोता है, ये मुझे नहीं समझ में आता… कल एक भाई साहब बोले कि गैस के दाम बढ़ गए है, मोदी जी कंट्रोल करो नहीं तो बहुत दिक्कत हो जाएगी। मैंने उनसे पूछा सब्सिडी तो मिलती है ना तो क्या दिक्कत है? तो वे बोले सब्सिडी नहीं मिलती, मिठाई की दुकान है, दुकान बंद करनी पड़ी आज क्योंकि गैस महंगा था।

गैस महंगा था तो मिठाई भी तो महंगी कर देते हो, पैसा अपनी जेब से तो दे नहीं रहे हो भाई, 120 रूपए किलो बूंदी का लड्डू 130/135 रूपए किलो में यह कह कर बेच देते हो कि भाई गैस महंगा हो गया है इसलिए दाम बढ़ाए है।

पर एक बात बताओ जब यही गैस सस्ता होता है तो क्या मिठाई के दाम कम कर देते है आप लोग? नहीं ना! मतलब 850 का गैस होने पर भी बूंदी का लड्डू आप 130/135 रूपए किलो ही बेचेंगे… फायदा अपनी जेब में भरेंगे और मोदी को गरियाएंगे कि मोदी जी गैस सस्ता करो!

और बर्फी इत्यादि दूध से बनी मिठाई की तो बात ही मत कीजिए, एक सामान्य, गरीब आदमी इस मिठाई को तो खरीद ही नहीं सकता, 400 रूपए प्रति किलो से ऊपर मिलती है।

और गैस सस्ता होने पर मिठाई के दाम तो कम नहीं होंगे, पर गैस अगर फिर महंगा हो जाए तो लड्डू के दाम झट से 135 रूपए किलो से बढ़ा कर 150 रूपए किलो कर देंगे और बर्फी 400 से 450 रूपए किलो हो जाएगी। फिर रोएंगे कि जनता बेहाल है, मोदी लूट रहा है… अब बताओ जरा कौन लूट रहा है?

और यह बात मिठाई, चाय, समोसा, टैक्सी, ट्रांसपोर्ट इत्यादि सभी पर लागू होती है। हम व्यापारी लोग कुछ भी अपनी जेब से नहीं देते। जब गैस/ पेट्रोल महंगा होता है तो प्रोडक्ट्स/ सेवाओं के दाम महंगे कर देते हैं, पर जब गैस/ पेट्रोल सस्ता होता है, तो दाम कम नहीं करते।

क्या होता है जब लोगों तक सीधे पहुँचने लगती है सरकार?

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