Game Of Thrones Season 8 के बहाने

Game Of Thrones season 8 के रिलीज में अभी लंबा वक्त बाकी है। आज तक किसी मूवी, टीवी सीरीज का इतनी शिद्दत से इतनी बड़ी ऑडिएंस द्वारा ऐसा बेसब्र इंतज़ार नहीं किया गया। ये इतिहास है।

George R R martin की A song of ice and fire की पहली किश्त Game Of Thrones पहली बार 1991 में प्रकाशित हुई थी। तब इसे इतनी लोकप्रियता नहीं मिली।
इसे लोकप्रियता मिली Hbo पर tv series के रूप में। इसकी जायज वजहें भी हैं। tv series को जिस बारीकी से बनाया गया है, बनाने वालों का डेडिकेशन दिखता है।

छोटे से लेकर बड़े कैरेक्टर्स तक के लिये जिस सावधानी से actors, actresses का चयन किया गया है…. एक खामी निकालना असम्भव सा लगता है। बाकी R R martin की कारिस्तानी तो है ही।

कोई भी फ़िल्म हो, उसका नायक कभी नहीं कहता कि मैं नायक हूँ. लोग बस समझ जातें हैं। ऐसे ही लोग Game Of Thrones में भी समझ जाते हैं और हर बार गच्चा खाते हैं।

लोग दिमाग में किसी एक कैरेक्टर को मुख्य किरदार मान लेतें हैं या कहें कि R R Martin चाहता है कि लोग ऐसा सोचें. मन ही मन एक नायक गढ़ लें. और फिर अचानक से कुछ ज़्यादा ही आसानी से उस पात्र की मौत हो जाती है. लोग परेशान… अबे ये क्या था? मतलब मेन कैरेक्टर ही मर गया? अब क्या?

Martin फिर एक मुख्य किरादर गढ़तें हैं. लोग सोचते हैं ओह… तो ये है असली हीरो… लेकिन फिर अचानक वो भी मर जाता है…. लोग गरियाते हैं…. साला लिखने वाला बहुत बड़ा शातिर है और Goerge R R Martin लोगों का रिएक्शन देखकर अपनी शातिरता को शाबाशी देता हुआ ठठाकर हंस देता है।

खैर…. भोले भाले अभी भी सोच रहे हैं कि John Snow और Khalisi मिलकर White Walkers को हरा देंगे और शादी करके खुशी खुशी जिंदगी व्यतीत करेंगे। जैसा कि Ramsey Boltan ने कहा था If you think this has a happy ending, you haven’t been paying attention.

बात कहां की कहाँ पहुंची जाती है।

कहने का मतलब है कि Game Of Thrones के Makers ने किताब के साथ न्याय किया। यही चीज़ Harry Potter फ़िल्म बनाने वाले नहीं कर सके। इसकी मुख्य वजहों में एक J K Rolling की यह शर्त भी थी कि सारे कलाकर ब्रिटिश होने चाहिये। दूसरा कहानी के फैलाव को फ़िल्म के रूप के समेटना मुमकिन नहीं था। TV Series तब वैसी प्रचलित नही थीं।

और अब… आने वाले सालों में web series ही भविष्य है।

ऐसी गलतफहमी हमारे हिंदी फिल्म निर्माताओं को भी है जबकि इनकी हरकतें देखते हुये कहना गलत ना होगा कि ये बात अभी सिर्फ पश्चिमी दुनिया के लिये सही लगती है।

देखा देखी इन लोगों से ही Sacred Games बनवाई… अच्छी थी। इसमें  सेक्स दिखाया गया… न्यूड सीन थे… लेकिन एक छोटे हिस्से के रूप में… Sacred Games को लोगों ने सेक्स नहीं बल्कि कहानी की वजह से पसन्द किया…. मूर्खों ने सिर्फ सेक्स को पकड़ा…. सोचा सेक्स दिखाओ। दर्शक खुश होंगे… कहेंगे… क्लासिक है… कल्ट क्लासिक है। धड़ाधड़ हिंदी वेब सीरीज़ आना शुरू हुई, जिनमें कुछ है तो सेक्स… सेक्स के अलावा कुछ नहीं।

मानों चारों दिशाओं से, धरती आसमान से, ब्रम्हांड से, सारी कायनात से आवाजें आती हो…… Sex Sex Sex..

ऐसा नहीं है कि हिंदी के पास ऐसी फैंटेसी कहानियां नहीं जो अपना अलग ही संसार रचती हों…चन्द्रकान्ता, भूतनाथ…. Harry Potter या Game Of Thrones से कहीं कमतर नहीं। लेकिन हिंदी फिल्म निर्माताओं की औकात नहीं… कलात्मक ईमानदारी नहीं… ये सस्ती और आसान चीज़ों को कॉपी करते हैं… जिसमें मेहनत ना करनी पड़े। दुनिया के महानतम बौने Tyrian Lannister ने कहा है… Quality takes time…

अगर इन लोगों ने खुद में सुधार ना किया… भाई भतीजावाद खत्म कर प्रतिभा को अवसर देना शुरू नहीं किया… तो इनका अंत निकट है… जो कि मेरे लिये बहुत सुखद अनुभूति होगी।

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