महात्मा गांधी : जो भगवान न बन सके

एक बहुत ऊंचे आदर्शों वाला व्यक्ति भी अगर राजनीति में दखल देता है - और अगर उसके फैसले देश या समाज के लिए संकट ले आये, दुर्भाग्य ले आये तो समय बेशक लग जाये - लेकिन जनता उस व्यक्ति की असल कीमत ज़रूर पहचान जाती है।

राजनीति बहुत गन्दी चीज़ है। राजनीति में आपका मूल्यांकन अक्सर आपकी मृत्यु के बाद भी होता रहता है। जितने बड़े आप नेता होते हैं – उतना ही अधिक जनता से सम्मान भी मिलता है, पर कोई गलती होने पर गालियां भी उतनी ही मिल सकती हैं।

महात्मा गांधी एक ऊंचे आदर्शों का पालन करने वाले व्यक्ति थे, इसीलिये उनके जीवन काल में ही वह विश्व के सबसे सम्मानित व्यक्ति बन गये थे। और इसीलिए आज तक उनका देश विदेश में बहुत सम्मान होता है।

पर एक बहुत ऊंचे आदर्शों वाला व्यक्ति भी अगर राजनीति में दखल देता है – और अगर उसके फैसले देश या समाज के लिए संकट ले आये, दुर्भाग्य ले आये तो समय बेशक लग जाये – लेकिन जनता उस व्यक्ति की असल कीमत ज़रूर पहचान जाती है।

महात्मा गांधी जी के अच्छे काम, अच्छे आंदोलन तो आप दिनभर सुनते-पढ़ते रहेंगे पर हम बात करेंगे उनके उन फैसलों की जिनकी वजह से देश व समाज को बहुत नुकसान उठाना पड़ा।

1. विभाजन को पहले किसी कीमत पर न स्वीकारना, और बाद में चुप बैठ जाना। दोनों तरफ के पचास लाख से अधिक लोग इसी वादे पर मारे गये कि महात्मा गांधी ने कहा है तो विभाजन हो ही नहीं सकता।

महात्मा गांधी जी, उन 50 लाख लोगों का खून अपना हिसाब सदियों तक मांगता रहेगा।

2. हर हिन्दू मुस्लिम दंगे या झगड़े में हर बार मुस्लिमों का ही पक्ष लेना, हिन्दुओं को हर बार ‘सेकुलर’ बनने की शिक्षा देकर उन्हें मरने के लिए अकेले छोड़ देना।

इसी का असर 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या के बाद इस रूप में सामने आया कि हिन्दू समाज हमेशा के लिए दब्बू और ‘झूठा’ सेकुलर बनके रह गया।

झूठा सेकुलर – मतलब जो दूसरे धर्मों की इज्ज़त करे पर अपने धर्म का अपमान करे. जो दरगाहों या चर्च में जाकर तो पूजा करे लेकिन मंदिर जाने को ढकोसला माने।

3. अधिकतर सांसदों की पहली पसंद सरदार वल्लभ भाई पटेल होने के बावजूद ज़िद करके अपने प्रिय – लेकिन अदूरदर्शी – सही निर्णय लेने में अक्षम जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनवाना।

नेहरू ने ही राष्ट्रसंघ की सदस्यता ठुकराकर चीन को उसका सदस्य बनने में मदद की। नेहरू ने ही कश्मीर समस्या को जन्म दिया। नेहरू ने ही चीन को अपना ‘भाई’ मानकर सेना रखने की जरूरत से ही इंकार करके सेना को बहुत कमजोर कर दिया।

उसी का फल था कि चीन ने भारत को युद्ध में बुरी तरह हराया और पूरे भारत को कई वर्ष के लिए उदासी और निराशा के दलदल में ढकेल दिया।

यहां यह भी याद रखा जाये कि सरदार पटेल प्रधानमंत्री न बन सके पर फिर भी पूरे देश को एक करने का कार्य उन्हीं के संकल्प व समझदारी की वजह से ही हो पाया। वह ऐसा न करते तो नेहरू का भारत कम से कम 5 छोटे छोटे देशों को अपने बीचोबीच बैठाये होता।

4. बहुमत से सुभाष चन्द्र बोस के कांग्रेस का अध्यक्ष बनने पर भी ज़िद करके उनको इस्तीफा देने को मजबूर करना। अगर यह बेतुकी ज़िद न की गई होती तो शायद देश के पहले प्रधानमंत्री भी सुभाष चन्द्र बोस होते और आज चीन नहीं, बल्कि भारत एशिया का सबसे मजबूत व शक्तिशाली देश होता।

5. भगतसिंह को फांसी दिये जाने का विरोध न करना। पूरा देश गांधीजी से यह चाहता था कि वह अंग्रेज सरकार से भगतसिंह को फांसी न देने की अपील करें।

अंग्रेजी सरकार मानसिक रूप से गांधीजी की अपील पर भगतसिंह को फांसी न देने के लिए तैयार भी थी। पर गांधीजी ने ऐसी अपील करने से साफ मना कर दिया। काश, गांधीजी ने वह अपील कर दी होती तो अमर शहीद भगतसिंह आज़ाद भारत में भी बीसियों वर्ष तक सुख की सांस ले पाते।

6. बुढ़ापे में अपने अजीबोगरीब प्रयोगों के लिए पोतियों की आयु की लड़कियों के साथ नग्न सोना। पत्नी कस्तूरबा भी अपने अन्तिम वर्षों में इस बात से परेशान रहीं। डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार पटेल व अन्य सभी साथी इस बात पर बहुत परेशान व गुस्सा थे, पर गांधीजी ने किसी की न सुनी…

हिन्दू धर्म के अनुसार भी एक पाप। और शायद ‘सत्य के प्रयोग’ के नाम पर अपनी अजीबोगरीब ‘दबी’ हुई इच्छाओं को पूरा करना महात्मा गांधी के जीवन की एक और बड़ी गलती।

‘महात्मा’ गांधी, आप एक महान इंसान थे। आपके आदर्श ऊंचे थे। पर काश, काश आपने ऊपर लिखी बहुत भयानक गलतियां न की होतीं तो शायद हर 2 अक्टूबर को हम ‘भगवान गांधी’ का जन्मदिन मनाया करते। अफसोस, अपनी इन 6 और शायद कुछ और गलतियों की वजह से आप सिर्फ ‘महात्मा’ कहलाकर रह गये।

काश, आप महात्मा गांधी की जगह ‘भगवान’ गांधी बन पाते तो देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू न होते, कश्मीर की समस्या न होती, भारत संयुक्त राष्ट्रसंघ का हिस्सा होता और अब तक एक विकसित देश बनने वाला होता।

काश…

खैर, आप जहां भी हों, आज आपका जन्मदिवस है सो जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

और हां,

जय हिंद।

वे पंद्रह दिन : 15 अगस्त के बाद…

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