उपनिवेशवाद 2.0 : भारत विरोधी नैरेटिव के डेटा आधारित प्रतिकार की आवश्यकता

रांची में हुये लोकमंथन 2018 में मुझे शैलेन्द्र राज मेहता को सुनने का अवसर मिला।

श्री मेहता वैसे तो एक विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री है, जिन्होंने उद्यमिता, औद्योगिक संगठन, प्रयोगात्मक अर्थशास्त्र इत्यादि पर गहन शोध किया है, लेकिन अपने उद्बोधन में उन्होंने विश्व में भारत के विरुद्ध नकारात्मक कथानक (नैरेटिव) चलाये जाने का जो षडयंत्र किया जा रहा है उसको डेटा अर्थात आंकड़ों के आधार पर तोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने इस पर अफसोस जताया कि जब आज के इंटरनेट के युग में हर विषय व उससे सबंधित डेटा, नेट पर उपलब्ध है लेकिन फिर भी लोग इसके महत्व को नकारते है क्योंकि इसके लिये पढ़ना और अपने पक्ष के डेटा को खोजना पड़ता है।

मैं उनकी इस बात से शतप्रतिशत सहमत हूँ क्योंकि मैंने राष्ट्रवादियों को नकारात्मक नैरेटिव की हैडलाइन को उठाकर, सरकार विरुद्ध न सिर्फ प्रश्न खड़ा करते हुये पाया है बल्कि कई बार घोर अवसाद में वातावरण में नकारात्मकता फैलाते हुये देखा है।

अपनी बात समझाते हुये मेहता जी ने ‘विश्व में महिलाओं के लिये भारत सबसे खतरनाक व असुरक्षित राष्ट्र है’ सिद्ध करने के लिये गढ़े जाने वाले नैरेटिव का एक जीवंत उदाहरण सामने रखा।

विश्व की प्रसिद्ध समाचार एजेंसी रायटर्स के मालिक थॉमसन रायटर्स की जनकल्याण सेवा के लिये गठित ‘रायटर्स फाउंडेशन’ ने जब 26 जून 2018 को ‘विश्व भर में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित समझे जाने वाले राष्ट्र’ पर किये गये एक मतदान (perception poll) के परिणामो को घोषित किया तो पूरे विश्व ने उसका संज्ञान लिया।

उनका यह मतदान लगभग 550 सहायता व विकास कार्यो में लगे पेशेवर, बुद्धिजीवियों, स्वास्थ कर्मियों, नीतिकारों, एनजीओ कर्मियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर आधारित था, जिनकी इस विषय पर मत देने की योग्यता स्पष्ट नही की गई थी। इनसे यह पूछा गया था कि वे, ‘संयुक्त राष्ट्र के 193 राष्ट्र सदस्यों में से उन 5 राष्ट्रों का नाम बताएं जो महिलाओं के लिये सर्वाधिक असुरक्षित हैं’।

इस पोल के परिणाम अचंभित करने वाले थे। भारत प्रथम स्थान पर था व उसे ‘महिलाओं के लिये सर्वाधिक असुरक्षित राष्ट्र’ के रूप में घोषित कर दिया गया।

रायटर्स फाउंडेशन ने परिणाम के साथ यह भी जोड़ा कि, ‘भारत में बलात्कार की घटनाएं की बाढ़ आ गयी है। यहां हर 20 मिनिट में एक बलात्कार होता है। स्थिति साल दर साल बदतर होती जा रही है और आलोचक, इसके लिये नरेंद्र मोदी की सरकार को जिम्मेदार मानते है, जिसने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कुछ विशेष नहीं किया है’।

यह मतदान, भारत की मोदी सरकार को विश्व मे कलंकित करने व महिला विरोधी नैरेटिव गढ़ने के लिये भारतीय बुद्धिजीवियों की संलिप्तता से किया गया था। एक प्रभावशाली फाउंडेशन द्वारा मात्र 550 लोगों से कराये गये मतदान ने भारत को ‘विश्व का महिलाओं के लिये सबसे असुरक्षित राष्ट्र’ घोषित कर दिया और भारत के मीडिया व विपक्ष ने इसको लेकर मोदी सरकार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।

लेकिन क्या यह सत्य है? यदि आंकड़ों (डेटा) को देख जाय तो एक अलग कहानी सामने आती है। संयुक्त राष्ट्र के ‘ड्रग्स एंड क्राइम ऑफिस’ ने 2010-11 के लिये वृहद रूप से आंकड़े इकट्ठा किये और उसके अनुसार सबसे ज्यादा बलात्कार की घटना स्वीडन में 180.9 प्रति 1 लाख जनसंख्या, कनाडा में 77.4, जर्मनी में 57.3, फ्रांस में 37.8 और भारत का स्थान सबसे कम बलात्कार वाले राष्ट्रों में 5.9 दर से था।

आश्चर्यजनक रूप से अमेरिका के आंकड़े उसमें नही थे लेकिन अमेरिका के एफबीआई ने जो 2015 में अपराधों के आंकड़े दिये हैं उसके अनुसार वहां बलात्कार की दर 38.6 प्रति 1 लाख है।

इसका सीधा अर्थ है कि फ्रांस व अमेरिका में भारत से 6 गुना, जर्मनी में 10 गुना और स्वीडन में 30 गुना ज्यादा बलात्कार या यौन हिंसा होती है! वास्तव में 95 राष्ट्रों के आंकड़ों की सूची में भारत का स्थान 73 था और वह महिलाओं के लिये सर्वाधिक सुरक्षित राष्ट्रों में से एक है।

अब यदि दो सबसे बड़े लोकतंत्र अमेरिका व भारत के वास्तविक यौन हिंसा व बलात्कार की संख्याओं को लें तो ‘क्राइम इन इंडिया’ की नवीनतम रिपोर्ट कहती है कि 2013 में 33 हज़ार 707, 2014 में 36 हज़ार 735 और 2015 में 38 हज़ार 947 इस सम्बंध में रिपोर्ट दर्ज हुये है।

अब अमेरिका में, जहां की जनसंख्या भारत की जनसँख्या की लगभग एक चौथाई है वहां यह घटनाएं भारत के सापेक्ष लगभग तीन गुनी है। एफबीआई के अनुसार यह 2013 में 1 लाख 13 हज़ार 695, 2014 में 1 लाख 18 हज़ार 027 और 2015 में 1 लाख 24 हज़ार 047 यौन हिंसा हुई है। अर्थात दूसरे शब्दों में अमेरिका में हर 4 मिनिट में यौन हिंसा को लेकर एक घटना होती है।

अमेरिका की ‘सेंटर्स फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ जो वहां की पब्लिक हेल्थ की सबसे प्रमुख संस्था है, के 2015 के सर्वे के अनुसार अमेरिका में एक महिला को अपने जीवनकाल में यौन हिंसा होने की 43.6% संभावना है और 21.3% (हर 5 अमेरिकी महिला में से एक) का बलात्कार होने या उसका प्रयास किये जाने की संभावना है। जबकि भारत में 2015-16 में हुए ‘नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे’ के अनुसार भारत के शहर मे महिला पर यौन हिंसा की 4.7% संभावना व ग्रामीणांचल में 6.4% है।

यह सारे आंकड़े यही सिद्ध कर रहे है कि रायटर्स फाउंडेशन द्वारा किया गया मतदान एक फर्ज़ी मतदान था, जिसका उद्देश्य भारत की सरकार को कलंकित करना था। इन्हीं आंकड़ों को लेकर शैलेन्द्र राज मेहता ने Colonialism 2.0 (उपनिवेशवाद 2.0) नाम से लेख लिखा जो इंडियन एक्सप्रेस में 18 जुलाई 2018 को प्रकाशित हुआ था जिसमें उन्होंने रायटर्स फाउंडेशन पर जानबूझ कर भारत को बदनाम करने का आरोप लगाया।

इस तरह के प्रयास को मेहता जी ने उपनिवेशवाद भाग दो या उपनिवेशवाद 2.0 का नाम दिया है। उपनिवेशवाद में तो एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र पर भोगौलिक रूप से कब्ज़ा जमाता है लेकिन उपनिवेशवाद 2.0 में लोगों के अवचेतन मन मे मनगढ़ंत बातों या फिर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर के अपने नैरेटिव को जमाया जाता है और उनके सोचने व समझने की शक्ति पर कब्ज़ा कर लिया जाता है।

उनका यह मानना पूरी तरह से सत्य है कि इस पूरे प्रकरण में भारत के बुद्धिजीवियों की भूमिका सबसे नकारात्मक व दयनीय है क्योंकि उन्होंने भारत के विरुद्ध गढ़े जा रहे नैरेटिव का प्रतिकार तथ्यों व आंकड़ों के आधार पर प्रभावी ढंग से कभी नहीं किया है।

रायटर्स फाउंडेशन के मतदान को आंकड़ों से झूठा सिद्ध करने के इस प्रयास का यह परिणाम हुआ कि इस लेख का संज्ञान, भारत की मोदी सरकार की आलोचक ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को भी लेना पड़ा और यह स्वीकार करना पड़ा कि उपलब्ध डेटा, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भारत का एक दूसरा ही पक्ष दिखाता है।

इतना बड़ा लेख लिखने के पीछे मेरा उद्देश्य वही है जो मेहता जी का है। शत्रुओं द्वारा भ्रमित करने वाले व नकारात्मक नैरेटिव (कथानक) का प्रतिकार करने में, राष्ट्रवादियों के लिये नारेबाज़ी, अधकचरा ज्ञान या गाली गलौज काम नहीं आयेगा। इसके लिये उन्हें न सिर्फ पढ़ना पड़ेगा बल्कि जवाब देते हुये ज्यादा से ज्यादा तथ्यों व आंकड़ों को खोज कर समाहित करना पड़ेगा।

आप लोग यह याद रखिये कि शत्रु आपसे इस क्षेत्र में बहुत आगे है लेकिन वह अविजित नहीं है, आप जीतेंगे क्योंकि उसका नैरेटिव झूठ पर आधारित होता है और आपका प्रतिकार सत्य पर आधारित होगा।

‘द सैटरडे क्लब’ के अदृश्य अभिजात्य, और भारत का व्याधिग्रस्त तंत्र

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