एक थी नीरा : नेताजी की जान बचाने, पति की हत्या करने से भी ना घबराई

नीरा आर्या का जन्म – 5 मार्च 1902 में तब के संयुक्त प्रान्त खेकड़ा नगर में हुआ था। मृत्यु – 1998, हैदराबाद में हुई।

आजाद हिंद फौज में रानी झांसी रेजीमेंट की सिपाही थी, जिन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप भी लगाया था।

इन्हें नीरा नागिनी के नाम से भी जाना जाता है। इनके पिता सेठ छज्जुमल अपने समय के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे।

नीरा के भाई बसन्त कुमार भी आजाद हिंद फौज में थे। इनकी शिक्षा – दीक्षा कलकत्ता में हुई। इनकी शादी ब्रिटिश भारत मे सी. आई. डी. इंस्पेक्टर श्री कांत जय रंजन दास के संग हुई थी।

इन्होंने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जान बचाने के लिये अंग्रेजी सेना में अफसर अपने पति श्रीकांत की हत्या कर दी।

आजाद हिंद फौज के समर्पण के बाद जब लाल किले में मुकदमा चला तो सभी बन्दी सैनिकों को छोड़ दिया गया, लेकिन नीरा को पति की हत्या के आरोप में। कालेपानी की सजा हुई थी। जहां इन्हें घोर यातनाएं दी गई।

आज़ादी के बाद इन्होंने फूल बेच कर जीवन यापन किया, लेकिन कोई सरकारी सहायता या पेंशन स्वीकार नहीं की।

आत्मकथा का एक अंश

जब मैं कोलकाता जेल में थी, एक दिन जेलर ने कहा –

“तुम्हें छोड़ दिया जायेगा, यदि तुम बता दोगी कि तुम्हारे नेताजी सुभाष कहाँ है”।

“वे तो हवाई दुर्घटना में चल बसे सारी दुनिया जानती है” – मैंने कहा।

“नेताजी ज़िन्दा है” झूठ बोलती हो तुम।

“हाँ नेताजी ज़िन्दा हैं”

“तो कहां है”

“मेरे दिल में ज़िन्दा है वे”

जैसे ही मैंने कहा तो जेलर को गुस्सा आ गया और बोले – “तो तुम्हारे दिल से हम नेताजी को निकाल देंगे”

और फिर उन्होंने मेरे आंचल पर हाथ डाल दिया और मेरी अंगिया को फाड़ते हुए लुहार की ओर संकेत किया।

लुहार ने एक बड़ा सा जंबुड़ औजार से मेरे दांये स्तन को उसमें दबाकर काटने लगा।

स्तनों को दबाकर असहनीय पीड़ा देते हुए दूसरी तरफ से जेलर ने मेरी गर्दन पकड़ते हुए कहा – “अगर फिर जुबान लड़ाई तो तुम्हारे ये दोनों गुब्बारे छाती से अलग कर दिए जायेंगे।”

फिर उसने चिमटा नुमा हथियार मेरी नाक पर मारते हुए कहा – शुक्र मानो महारानी विक्टोरिया का कि इसे आग से नहीं तपाया, आग से तपाया होता तो तुम्हारे दोनों उभार पूरी तरह उखड़ जाते।

– सोशल मीडिया से प्राप्त

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