घिसी हुई चप्पल चुराने की सोच से ऊपर उठिये

हमारे भाई गांव में होमियोपैथी की प्रैक्टिस करते हैं। लोगबाग दवाई लेने आते हैं, तो चप्पल जूता बाहर ही निकाल देते हैं।

ये गांव गिरांव का संस्कार होता है। वैसे मुझे तो इसमें पुराने सामंतवाद की बू भी आती है क्योंकि जूता चप्पल उतारने वाले ज़्यादातर लोग दलित दबे कुचले समाज से ही होते हैं।

मैंने किसी बाऊ साहब, पंडी जी या राय साहब या जादो जी को जूता उतारते नहीं देखा… बहरहाल, इस विषय पर अब एक लाइन भी और लिखी तो विषयांतर हो जाएगा और गणेश जी बनते बनते चूहा बन जाएगा…

तो मूल विषय पर लौटते हैं। लोगबाग जूता चप्पल उतार तो देते पर फिर होता बवाल… “हमार चप्पल हेरा गइल… हमार जूता केहू चोरा लिहलस…”

अब ई रोज रोज साला कौन सुने मुकदमा? सो हमने सख्त standing order जारी किया। बाकायदा लिख के लगाया कि ‘जूता चप्पल उतारने की कौनो जरूरत नइखे… अउर अगर उतार दिए तो अपना जूता चप्पल की सुरक्षा स्वयं करें… हेरा जाने पे या चोरा लिए जाने पे डागदर साहेब जिम्मेवार नहीं होंगे…’

जब भी किसी का जूता चप्पल हेराता चुराता तो ज्जो चिहाड़ मचती जैसे माल्या इनका 9000 करोड़ ले के भग गया… तो डागदर साहेब का एक्के जवाब होता… “अब हम दवाई देईं या तोहार जूता चप्पल अगोरीं?”

मैं जब भी गांव जाता हूँ, एकाध जोड़ी नई हवाई चप्पल जरूर ले के जाता हूँ, क्योंकि पक्की बात है कि पिछली हेरा गयी होगी… गांव में हमारी माँ की आधी जिनगी तो यही जूता, चप्पल, गोबरहिया खांची, खुरपी, हंसुआ, कुदाल, यही सब अगोरने में बीत गयी… गांव में ऐसी petty thefts बहुत होती हैं।

तो फिर हुआ ये कि मैं पिछले साल गया बंगलूरू… वहां अपने एक मित्र के घर रुका… एक highrise building में उनका फ्लैट था। देखा कि सब लोगों ने अपने जूते चप्पल घरों के बाहर ही उतार रखे थे।

मुझे तुरंत अपना गांव याद आ गया। मेरी माँ यहां होती तो उनका तो ये देख के हार्ट फेल हो जाता। सारी जिनगी इसी दहशत में जीतीं कि मेरे बेटे का Nike Reebok का महंगा जूता कोई चुरा न ले जाए…

मैने अपने मित्र से मज़ाक में कहा कि अगर कोई ग़ाज़ीपुरिया यहां आ जाए तो उसे तो ये देख बिजनस opportunity दिख जाए… जूता चप्पल चोर को इस तरह घर से बाहर जूता निकला देख बिजनिस opportunity दिखना स्वाभाविक है। हर आदमी की अपनी सोच होती है और उसके सोचने की हद होती है… उस हद के आगे वो सोच नहीं सकता।

‘आयुष्मान भारत’ में भी लोगों को भ्रष्टाचार की असीम संभावनाएं दीख रही हैं।

SC ST Act पर हंगामा करने वालों ने फिर तेवर बिगाड़ लिए हैं… लगे पूछने, “हमरा भी इलाज होगा इसमें या सिर्फ उदित राज, चिराग पासवान और टीना धाबी का ही होगा… हमरा तो दुइये ठो लरिका बच्चा है, ओकरा तो 4 मेहरारू 44 बच्चा है… मूडी जी सवर्ण उत्पीड़न को जोजना बनाये हैं।”

जबकि हक़ीक़त ये है कि आयुष्मान योजना के लाभार्थी चुनने का आधार सिर्फ और सिर्फ आर्थिक है।

UPA सरकार ने 2011 की जनगणना में Socio Economic Caste Survey कराया था। उसमें भारत के प्रत्येक परिवार का आर्थिक सर्वेक्षण हुआ था।

परिवार में कितने लोग हैं। क्या करते हैं। कितना पढ़े हैं। क्या रोजी रोज़गार है। घर कैसा है, कितना बड़ा है, पक्का है, कच्चा है, झोपड़ी है, या मिट्टी की दीवारों पे खपरैल है, कितनी खेती है, कौन से पशु हैं, गाय भैंस भेड़ बकरी ऊंट गधा घोड़ा, खच्चर, खरगोश तक गिने गए थे। घर में क्या साधन संसाधन हैं, फोन है, मोबाइल है, फ्रिज कूलर पंखा AC, washing मशीन, Credit card, साइकिल, स्कूटर, बाइक, car, SUV, एक एक साधन संसाधन गिना गया।

उस 2011 के survey को आधार बना के मोदी जी ने गरीबों की सूची बनवाई है। उसमें कुछ पैमाने रखे गए हैं…

• कच्चा घर, जिसपे घास, फूस या खपरैल की छत हो
• जिस घर में 16 से 59 वर्ष की आयु का कोई पुरुष न हो
• महिला गृहस्वामिनी जिसके घर 16 से 59 आयु का कोई कमाने वाला न हो
• विकलांग जिसके घर कोई कमाने वाला न हो
• भूमिहीन कृषि मजदूर
• बेघर लोग
• याचक, भिखारी, कूड़ा बीनने वाले
• आदिवासी बंधुआ मजदूर

शहरी क्षेत्र में – फेरी लगाने वाले, सड़क किनारे जीवन यापन करने वाले, सड़क किनारे बैठे मोची, नाई, सब्जी फल वाले, रिक्शा चालक, घरों में काम करने वाली Maids…

ऐसे वर्गों के लोगों को आयुष्मान भारत ModiCare में शामिल किया गया है। कुल लगभग 10.5 करोड़ गरीब परिवारों को चिह्नित कर शामिल किया गया है।

प्रथम चरण में डेढ़ करोड़ कार्ड बनाये जाएंगे और जल्दी ही (3 से 5 साल में) सभी 10 करोड़ परिवारों के स्वास्थ्य बीमा कार्ड बना दिए जाएंगे। सरकार इसके लिए डेढ़ लाख से ज़्यादा स्वास्थ्य केंद्र, उप केंद्र और स्वास्थ्य मित्र नियुक्त करने जा रही है। हर बीमारी के लिए रेट तय किया गया है।

इस योजना में किसी किस्म का कोई आरक्षण नहीं है। इसमें सवर्ण, दलित, राजनीति खोजने वाले घटिया सोच के लोग हैं।

सोच बड़ी कीजिये। घिसी हुई चप्पल चुराने की सोच से ऊपर उठिये।

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