सशक्त देश में ही खेल और खिलाड़ी पनपते हैं, मरे हुए देश का खेल भी मर जाता है

यूं तो पाकिस्तान जब से बना है तभी से धरती का प्रिय चिरांद रहा है। तथापि, पिछले कुछ वर्षों में उसकी अधोगति हुई है। राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद, दुनिया के पटल पर घोर बदनामी, दरिद्री ने उसे और नीचे धकेला है। लगभग रसातल में।

वहां श्रीलंकाई टीम पर हमले के बाद क्रिकेट सीरीज़ का आयोजन बंद हो गया और पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का पतन शुरू हुआ। चार साल पहले अंतरराष्ट्रीय चिरांद इमरान खान ने कहा था कि इतने झंझावातों के बीच खेल मर जाता है। तब, हमारे प्रज्ञ पत्रकारों ने कहा था कि इमरान ने कितनी सही बात कही है। मैंने भी यही कहा था बस भाव बदल दिए थे कि मोदीयुग में भारत खेल में भी ऊपर उठेगा।

मैंने भी यही कहा था कि खेल में विजय की संभावना और खिलाड़ियों में राष्ट्र के प्रति सम्मान का भाव तब और बढ़ जाते हैं जब खिलाड़ी देखते हैं कि देश एक सुदृढ़, कर्तव्यनिष्ठ, महान जुझारू नेता के हाथों में है जो न सिर्फ़ स्थिरता और सुरक्षा प्रदान कर रहा, न सिर्फ़ दुश्मनों को उनकी ही भाषा में जवाब दे रहा, न सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ा रहा, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित भी कर रहा है, अक्सर ट्वीट कर, उनसे मिलकर विश्व में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का आह्वान भी कर रहा है।

यकीन न हो तो इस देश के खिलाड़ियों और सैनिकों से पूछ लीजिए कि मोदी ने उनके लिए क्या किया है। मेरे ऐसा कहने पर कुछ महाविद्वानों को लगता है कि मैं मोदी का चमचा हूँ।

मैं साफ़ कर दूं कि चमचा तो सिर्फ इस भारत का हूँ और नरेन्द्र मोदी भारत माता के प्रतीक्षित पुत्र हैं। मैंने बचपन से इस देश को एक महान देशभक्त और कर्त्तव्यनिष्ठ नेता के हाथों में देखना चाहा है। एक ऐसा नेता जो सर्वांगीण विकास को प्रतिबद्ध हो।

मोदी ऐसे ही नेता हैं बल्कि मेरी कल्पना से भी बड़े कर्मठ हैं। उन्होंने निजदेश के प्रति गौरव का भाव भरा है। जो भारतीय उदासीन और हताश हो रहे थे, जिन्हें लगने लगा था कि राजनीति तो बस ठगविद्या है उन्होंने एक नई दृष्टि से देश को देखना शुरू किया। धमनियों में रक्त का ताप बढ़ा। हृदय में विजय की भावना जागी और भुजाओं में बल का अनुभव हुआ।

सिहरा तन क्षण भर भूला मन लहरा समस्त
हर धनुर्भंग को पुनर्वार ज्यों उठा हस्त .. राम की शक्तिपूजा

जैसे वन में सीता के वियोग में डूबा राम का मन जय पराजय के मध्य सहसा धनुर्भंग को जाग उठा वैसे ही विश्वविजय की भावना जागी है। इसे महाविद्वान मोदीविरोधी नहीं समझेंगे। उनको समझाना भी नहीं चाहता।

पूरा विश्व एक प्रमाण है कि सशक्त देश में ही खेल और खिलाड़ी पनपते हैं। भारत में भी यह राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान का समय है। खिलाड़ी उठेंगे और यूं ही ध्वस्त करेंगे चुनौतियां जैसे पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाजों से खेल खेल में किया कि जैसे खेल नहीं खेल कर रहे हों……

हां, मैं भक्त हूं!

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