निज़ाम ए मुस्तफा की ओर ‘अमार शोनार बांग्ला’

भारत के पूर्व में एक राज्य है, जिसे लोग मोमता-दी का बांग्लादेश कहते हैं।

वहाँ आधिकारिक मोमिन आबादी 28-30 प्रतिशत कही जाती है, लेकिन असल में यह आबादी 35-40 प्रतिशत से ज़्यादा है।

जब तक कम्युनिस्ट राज करते रहे… पश्चिम बंगाल को बांग्लादेशी अभ्यारण्य बनाते रहे… बची-खुची कसर ममता बनर्जी ने पूरी कर दी…

बंगाल और असम तो वो गेट हैं जिनसे घुसकर बांग्लादेशी घुसपैठिए पूरे देश में फैल गए हैं… कच्चा अनुमान है कि भारत में कई राज्यों की संयुक्त आबादी से ज़्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों की है।

अब अधिकांश के पास नागरिकता प्रमाणित करने के सभी दस्तावेज़ हैं… इनका अनेक व्यवसायों और अनेक श्रमिक कार्यों पर पूर्ण कब्ज़ा हो चुका है… अनेक के पास तो भारतीय पासपोर्ट तक पाए जाते हैं।

संपत्ति-संपदा है… भारतीय महिलाओं से विवाह भी किये हैं… प्रजनन क्षमता चूहों, सुअरों और दीमक से भी ज़्यादा है… रोहिंग्याओं को जोड़ लें तो 15-20 साल बाद भारत के मालिक यही लोग होंगे… हिन्दू कहाँ रहेगा? क्या खाएगा?

हिंदुओं की लगभग सारी प्रॉपर्टी छीनी जा चुकी होगी! मंदिरों के ऊपर गुम्बदें और मीनारें होंगी… पार्लियामेंट और देश की सभी विधानसभाओं में बड़ी-बड़ी मस्जिदे होंगीं…

उदाहरण के लिए पिछले साल कोलकाता के काली मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर राज्य सरकार के एक मुस्लिम मंत्री की नियुक्ति हुई है… मंदिर संचालन, मंदिर प्रॉपर्टी और मंदिर के खज़ाने पर मुस्लिम मंत्री काबिज़ हो गया…

शिकायत करने गए हिंदुओं को ममता बनर्जी ने दौड़ा लिया… मोहर्रम पर विसर्जन नहीं… रात दस बजे के बाद गणेश-दुर्गा पंडाल बन्द करने के आदेश हैं… आज भी एक पंडाल में गाय के अवशेष डाल कर अपवित्र कर दिया गया… दुर्गा और गणेश प्रतिमायें तो अब साल भर तोड़ी जाती हैं बंगाल में!

हिन्दू भी अब ज़्यादा बुरा भी नहीं मानते क्योंकि उन्होंने इसे अपनी नियति मान लिया है… राज्य में सिर्फ उर्दू शिक्षकों की नियुक्तियां होने का रिवाज़ है… शेष नौकरियों में उर्दू जानने वालों को प्राथमिकता दी जा रही है!

बहरहाल वाकया यह हुआ यह कि इस्लामपुर, प. बंगाल उच्चतर माध्यमिक स्कूल जहां उर्दू का एक भी छात्र-छात्रा नहीं है… अध्यापकों की कई वर्षों से कमी थी… छात्र सालों से गणित, अंग्रेज़ी और विज्ञान के अध्यापकों की नियुक्ति की मांग कर रहे थे… मगर ममता सरकार ने आलिम फ़ाज़िल जैसी मदरसा छाप डिग्रियां लिए तीन उर्दू अध्यापकों को विद्यालय में भेजने का शासनादेश निकाला… आदेश देखते ही छात्र हड़ताल पर बैठ गए… धरना शुरू हो गया…

विडंबना देखिए… बंगाल पुलिस मुस्लिम उर्दू अध्यापकों को जीप में बैठाकर स्कूल में जॉइन कराने लाई… जबरिया गेट खुलवाया गया… प्रदर्शन कर रही बालिकाओं पर बर्बर लाठी चार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई… जीप को नारे लगा रही छात्राओं पर उल्टा दौड़ा कर कुचलने की कोशिश हुई (वीडियो उपलब्ध हैं)…

अंततः योजनाबद्ध तरीके से गोली चलाकर दो युवकों की पुलिस गोली से हत्या कर दी गई…. इसमें एक वह भाई भी था जो अपनी घायल बहन को बचाने कालेज में आ गया था… इतनी हिंसा के बाद भी फ़िज़ूल के उन 3 उर्दू अध्यापकों की स्कूल से नियुक्ति रद्द नहीं की है, ममता सरकार ने…

यही निज़ाम ए मुस्तफा है… सब लोग इसके लिए तैयार रहे… यूपी, बिहार, असम, केरल, कश्मीर में भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं… बेशक आरएसएस मानता हो कि मुस्लिमों के बिना हिन्दू नहीं बचेंगे, परंतु… हाँ यह पक्का है… कि हिन्दू 35% से कम होते ही इस देश का नाम कम से कम भारत तो नहीं रहेगा…

कश्मीर घाटी को ‘जाफना’ बनाने की हिम्मत तो लाइये

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