देश को स्वीकार नहीं गांधियों के सवालों का वन-वे ट्रैफिक, ज़रा सोनिया-राहुल भी जवाब दें

पहले ज़रा यह समझिये कि…

प्रसार और प्रतिष्ठा में फ्रांस में 18वें क्रम वाले एक समाचार माध्यम (मीडिया पार्ट न्यूज़ पोर्टल) पर फ्रांस के भूतपूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का सन्दर्भ देकर एक खबर छपी।

उस खबर पर कांग्रेस ने प्रचण्ड ताण्डव शुरू कर दिया। कुछ ही घण्टों में फ्रांस की सरकार, भूतपूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद, दसॉल्ट कम्पनी तथा भारत की सरकार, भारत की रक्षामंत्री, भारत के वित्तमंत्री और भारत के कानून मंत्री ने तथ्यों और दस्तावेजों से उसे नकार दिया।

जवाब में वह न्यूज़ पोर्टल और कांग्रेस पार्टी सबूत के नाम पर एक चिट आज तक नहीं प्रस्तुत कर सके हैं।

लेकिन नवम्बर 1991 में, प्रसार और प्रतिष्ठा में स्विटज़रलैंड में प्रथम स्थान रखने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पत्रिका Schweizer Illustrierte ने एक रिपोर्ट छापी थी।

स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte की उस रिपोर्ट के अनुसार यूपीए अध्‍यक्ष सोनिया गांधी के अरबों रुपये स्विस बैंक के खाते में जमा है।

पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि इस खाते को राजीव गांधी ने खुलवाया था। लेकिन राजीव गांधी की मौत के बाद इस खाते को अब सोनिया गांधी संचालित करती है।

इस खाते में 2.5 बिलियन स्विस फ्रैंक जमा हैं, जो करीब 2.2 बिलियन डॉलर के बराबर है। आज के अनुसार यह रकम लगभग 1 लाख 58 हज़ार करोड़ रूपयों के बराबर होती है।

Schweizer Illustrierte में इस रिपोर्ट को प्रकाशित हुए लगभग 28 वर्ष बीत चुके हैं। लेकिन गांधी परिवार ने कभी इस रिपोर्ट का औपचारिक रूप से खंडन नहीं किया और ना ही Schweizer Illustrierte के खिलाफ कोई विधिक कार्रवाई की बात कही।

ध्यान रहे कि इस पत्रिका ने तीसरी दुनिया के चौदह ऐसे नेताओं के बारे में जानकारी दी थी, जिनके खाते स्विस बैंकों में थे और उनमें अरबों का काला धन जमा था।

राजीव गांधी परिवार से सम्बन्धित ऐसी खबर छापने वाली Schweizer Illustrierte कोई पहली या एकमात्र अपवाद नहीं है।

रूस की प्रख्यात पत्रकार, वहां की प्रतिष्ठित पत्रिका The New Times Magazine की चीफ एडिटर, रूसी पत्रकारों द्वारा ‘गोल्डन पेन’ अवार्ड से सम्मानित येवजेनिया मार्कोवना अलबॉट्स (Yevgenia Markovna Albats) ने 1994 में लिखी गयी अपनी किताब ‘The state within a state – The KGB hold on Russia in past and future’ में भी इस बात का खुलाया किया है कि राजीव गांधी और उनके परिवार को रुस के व्‍यवसायिक सौदों के बदले में लाभ मिले हैं।

इस लाभ का एक बड़ा भाग स्विस बैंक में जमा किया गया है। येवजेनिया मार्कोवना अलबॉट्स की बातों का भी गांधी परिवार ने कोई जवाब, कोई सफाई आजतक नहीं दी। ना ही येवजेनिया मार्कोवना अलबॉट्स के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की।

आखिर इतने गम्भीर आरोपों पर गांधी परिवार की बरसों लम्बी चुप्पी का कारण क्या है?

18वें क्रम की एक फ्रांसीसी वेबसाइट की खबर पर कांग्रेसी फौज के साथ उसके सुर में सुर मिलाकर जो न्यूज़ चैनल और पोर्टल्स बेसुध होकर झूमने नाचने गाने लगे हैं, उन्हीं सब न्यूज़ चैनलों और कांग्रेसी फौज को स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte तथा येवजेनिया मार्कोवना अलबॉट्स की किताब में प्रकाशित गांधी परिवार द्वारा की गयी अरबों-खरबों की लूट की कहानी पर पिछले 24-27 वर्षों से सांप क्यों सूंघा हुआ है?

लेकिन संचारक्रान्ति के सर्वाधिक सशक्त जनास्त्र/ ब्रह्मास्त्र सोशल मीडिया के वर्तमान दौर में गांधी परिवार की शातिर चुप्पी से काम नहीं चलेगा।

गांधी परिवार के सवालों का वन-वे ट्रैफिक भी देश अब स्वीकार नहीं करेगा।

सोनिया गांधी, राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस को स्विस पत्रिका Schweizer Illustrierte तथा येवजेनिया मार्कोवना अलबॉट्स की किताब में दर्ज गांधी परिवार से सम्बन्धित सनसनीखेज और शर्मनाक तथ्यों की सफाई उसी तरह देनी चाहिए, जिस तरह भारत की सरकार, उसके रक्षामंत्री, वित्तमंत्री, कानूनमंत्री तथा फ्रांस की सरकार ने दी है।

सबकुछ हार चुके किसी जुआरी से भी बदतर हो गयी है कांग्रेस की हालत

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