आवश्यक है सोनिया और रिलायंस के मध्य संबंधों को समझना

व्यक्तिगत रूप से मैं अम्बानी परिवार का प्रशंसक हूँ।

यह अब लोक कथाओं का हिस्सा है कि कैसे धीरूभाई अम्बानी ने समाजवादी भ्रष्ट सरकार के समय अपनी कंपनी को उस दौर में खड़ा किया, जब इंदिरा, राजीव और सोनिया सरकार का शासन था।

कैसे सरकारी बाधाओं को ‘बहला-फुसला’ के पार किया; कैसे बजट में घोषित किये जाने वाले टैक्स और सरकारी नीतियों की उन्हें पहले से जानकारी होती थी।

मैं उनका प्रशंसक इसलिए हूँ कि खानदानी या धनी परिवार से ना होने के बावजूद, कैसे अम्बानी ने टाटा-बिड़ला-गोयनका के ज़माने में सफलता प्राप्त की, कैसे उनसे भी आगे निकल गए।

अम्बानी की सफलता का एक रहस्य यह भी है कि सोनिया रिलायंस के प्लेन में कई बार सफर करती थीं। उदाहरण के लिए, 13 जून 2005 में सोनिया रिलायंस के विमान से रूस गयी थी।

[Gandhi’s Moscow flight raises questions in India]

यह प्रश्न स्वाभाविक है कि वे रूस क्यों गयी थी? वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के एक निजी अतिथि के रूप में चार दिवसीय यात्रा पर रूस गयी थीं।

रिलायंस का निजी प्लेन सदैव सोनिया की सेवा में उपलब्ध रहता था।

वैसे सोनिया इस वर्ष दो बार रूस घूम आयी हैं। पहली ट्रिप एक प्रदर्शनी के लिए थी जिसे कर्नाटक सरकार ने फण्ड किया था। इस समय वे फिर रूस में है जिसमें वे ‘The Positive Energy of Young People’ विषय पर बोलेंगी।

यद्यपि ऐसा बतलाया जाता है कि स्वास्थ्य ठीक ना होने के कारण सोनिया यात्रा करने से बचती हैं। लेकिन फिर भी इस वर्ष वे दो बार रूस घूम आयीं। मामला कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

राफ़ेल सौदे पर ओलांद, भ्रष्ट मीडिया, कांग्रेस व रूस का षडयंत्र

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY