पाकिस्तान का मकसद : भारत में कांग्रेस सरकार की वापसी, मोदी का पतन

कश्मीर की नकारात्मक घटनाओं पर बड़े बड़े देशभक्त अक्सर गच्चा खा जाते हैं. उन्हें मोदी और मनमोहन सरकार में फर्क ही समझ नहीं आता. अपने देश की सेनाओं की मानवीय क्षति के मुद्दे आते ही लोग मोदी और भाजपा के पुराने बयान खोज खोज कर छाती पीटने लगते है कि देखो, विपक्ष में रहते तो भाजपा और मोदी ने ये कहा था ये वादा किया था… अब सरकार में आते ही मोदी कुछ नहीं कर रहे.

ये विषय उतना भी सरल नहीं है जितना देशभक्त समाज अक्सर समझ लेता है. इस विषय को समझने के लिए पाकिस्तान और कांग्रेस को समझना होगा.

भारत का विभाजन मुसलमानों की मांग पर हुआ, जिसे कांग्रेस और नेहरु-गाँधी ने सहमति दी और इसमें दोनों का फायदा हुआ. पाकिस्तान चाहने वालो को अपना अलग इस्लामी देश मिला और भारत की सत्ता की चाह रखने वाले गांधी-नेहरु परिवार को भारत की सत्ता मिली.

कांग्रेस कभी भी पाकिस्तान की कट्टर विरोधी नहीं रही. अब लोगों का तर्क होगा कि भारत ने पाकिस्तान को कई युद्ध कैसे हराए तो. इसका उत्तर है कि जब-जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया तो उसका उत्तर देना भारत की मज़बूरी भी थी और सरकार से अलग सेना तथा जनता का भी अपना अस्तित्व है इसलिए कांग्रेस युद्ध से इनकार भी नहीं कर सकती थी.

अब लोग तर्क देंगे कि कांग्रेस ने भारत के दो टुकड़े किये. तो इस विषय में भी जमीनी हकीकत यह कि पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में आज के पाकिस्तान ने इतने अत्याचार किये थे कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से कारोड़ों की संख्या में शरणार्थी भारत की अर्थब्यवस्था की रीढ़ तोड़ने लगे थे ऐसे में इंटेलिजेंस एजेंसियों तथा भारतीय मिलिट्री इस्टेबलिश्मेंट एवं आम जनता की भावनाओं को दरकिनार कर पाना इंदिरा के वश की बात नहीं थी. वरना ये वही इंदिरा थी जिसने शिमला समझौते की टेबल पर भारतीय सेनाओं के बलिदान को व्यर्थ कर दिया था.

जिन्हें इस बात पर भरोसा है कि कांग्रेस पाकिस्तान विरोधी रही है ऐसे लोग गूगल में कश्मीर का नक्शा देख सकते हैं. कांग्रेस के लम्बे राज में भारत की आम जनता को जम्मू कश्मीर का जो नक्शा दिखाया गया, उसका एक तिहाई से ज़्यादा हिस्सा आज भी पाकिस्तान और चीन के कब्ज़े में है.

और यहाँ आम भारतीय जनता भारत के नक़्शे में कश्मीर का पूरा हिस्सा भारत के साथ देख के मूर्ख बनते हुए हमेशा ही झूठ और गफलत में रही. पाकिस्तान के प्रति कांग्रेस और नेहरु-गांधी की पालिसी हमेशा ही नर्म रही है.

इस बात का ध्यान रखें कि कांग्रेस के दौर में पाकिस्तान के साथ भारत के जितने भी युद्ध हुए, भले ही अपनी सेना ने सारे युद्ध जीते. लेकिन भारत कभी भी पाकिस्तान के कब्ज़े वाले हिस्से वापस पाकिस्तान से नहीं ले पाया था.

आज़ादी के लम्बे समय बाद जब देश में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार बनी तो पाकिस्तान ने कारगिल में भारत की जमीन पर कब्ज़ा किया. कुछ समय बाद जैसे ही ये घटना अटल सरकार के संज्ञान में आई तो भारत ने कांग्रेस द्वारा विरासत में छोड़े गए जर्जर और कमजोर मिलिट्री ढांचे के बावजूद पाकिस्तान के कब्ज़े में गए भारत की ज़मीन के एक एक इंच हिस्से बापस छुड़ा लिया था. ऐसा पहले के इतिहास में कभी नहीं हुआ था.

पाकिस्तान के लिए भारत में सबसे मुफीद रहती है कांग्रेस की सरकार या फिर मिलीजुली कमज़ोर सेक्युलर सरकार. ऐसी सरकारों में पाकिस्तान अपने एजेंडों को बहुत आसानी से पूरा करता रहा है.

अब मुद्दा यह कि पिछली सरकारों के दौर में पाकिस्तान से लगती सीमा में भारतीय सैनिकों की शहादत और मोदी सरकार के दौर में सीमा पर भारतीय सैनिको की शहादत में आखिर अंतर क्या है?

इस विषय को कुछ इस तरह समझा जा सकता है –

भारत की सेना पाकिस्तान के लिए पहले भी दुश्मन थी आज भी दुश्मन है कल भी दुश्मन ही रहेगी, लेकिन भारत के राजनैतिक परिद्रश्य में कांग्रेस पाकिस्तान के लिए उतनी बड़ी समस्या नहीं है जितनी भाजपा.

कांग्रेस का इतिहास रहा है कि कांग्रेस और नेहरु-गांधी परिवार हमेशा से पाकिस्तान के प्रति बहुत नरम रहे हैं लेकिन भाजपा पाकिस्तान के प्रति हमेशा कठोर ही रही है. ये अलग बात है कि भाजपा की हर सरकार ने हमेशा यही चाहा कि पड़ोसी देश के साथ सम्बन्ध सामान्य रहे. लेकिन जब भी पाकिस्तान ने भारत को हेकड़ी दिखाई तो भारत में भाजपा की सरकारों ने पकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से ही दिया है.

जब भारत में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार सत्ता में आई तो, कांग्रेस के तमाम नेता तथा समर्थक पाकिस्तान में जा कर मोदी सरकार के खिलाफ पाकिस्तान से मदद मांगते पाए जा चुके हैं. सिर्फ इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने भारत में मोदी सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस नेताओं को तमाम टिप्स भी दिए जिससे भारत में मोदी सरकार को कमज़ोर करने के साथ अगले चुनाव में मोदी को हराया जा सके.

अब मुद्दा यह कि आखिर मोदी सरकार के दौर में पाकिस्तान सीमा पर मारे गए भारतीय सैनिकों के मामले को किस नज़रिये से देखा जाए, तो इस विषय में भारत के देशभक्त समाज को यह जान लेना चाहिए कि भारत में कांग्रेस की सरकारे पाकिस्तान के लिए ज़्यादा आरामदायक है और कांग्रेस विरोधी भाजपा की सरकार पाकिस्तान के जिस्म के कांटे या ज़हर के समान.

कांग्रेस मोदी सरकार को विरासत में बहुत जर्जर और कमज़ोर मिलिट्री ढांचा दे कर गयी है और भारत पाकिस्तान सीमाओं पर सुरक्षा पंक्ति भी जर्जर हालातों वाली. पाकिस्तान से लगती सीमाएं आपके शहर कस्बे या कॉलोनी जैसी सरल और साधारण नहीं है. ये बहुत असाधारण दुरूह तथा दुर्गम है.

मोदी ने सत्ता में आते ही इन मसलों पर दिन रात मेहनत की है. एक नहीं सैकड़ों कदम उठाये है. सुरक्षा साजसामान की सैकड़ों डील की है. पिछले चार वर्षो में सत्तर सालों के कमज़ोर मिलिट्री ढांचे को मजबूत करने के हाड़ तोड़ प्रयास किये हैं और ये प्रयास आज भी जारी है.

लेकिन याद रहे चूँकि भारत में मोदी जैसी सरकार पाकिस्तान के लिए ज़रा भी मुफीद नहीं है इसलिए पाकिस्तान आगे भी अपनी हरकतें जारी रखेगा. पाकिस्तान का मकसद है भारत में कांग्रेस सरकार की वापसी और मोदी सरकार का पतन.

मोदी और कांग्रेस में अंतर, और मोदी की मजबूरियां

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY