भागवत जी को तो सबसे पहले छाती पर बना हनुमान का टैटू दिखाना चाहिये था!

मोहन भागवत जी के बयान की जितनी निंदा की जाये उतनी कम है।

उन्हें सबसे पहले शर्ट निकालकर छाती पर बना हनुमान जी का टैटू दिखाना चाहिये था उसके बाद अपना संबोधन शुरू करना चाहिये था।

उन्हें कहना था कि – “अब वक्त आ गया है कि एक एक शांतिदूत को घर से निकाल निकाल मारना चाहिये, जितनी भी मस्जिदें हैं, मदरसे हैं सबको बुलडोज़र से गिरा दिये जाएं।

कल से कोई स्वयंसेवक लाठी लेकर शाखा में नहीं आयेगा, सब खाली हाथ आयेंगे, सभी को एक एक तलवार तथा एक एक 80 किलो का भाला सौंपा जायेगा। दक्षिण के राज्यों के शांतिदूतों को महासागरों में फेंका जाये, देश के भीतरी राज्यों में बैठे शांतीदूतों को ढकेलते हुये सरहदी राज्यों में लाया जाये ताकी उन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, भुटान, नेपाल, बर्मा में फेंका जा सके।

अब यहाँ सिर्फ और सिर्फ हिन्दू रहेंगे।”

लेकिन हाय रे मूर्खता, कहते हैं कि “अगर मुसलमान नहीं रहेगा तो हिन्दुत्व भी नहीं रहेगा ”

हाँ हाँ मैं जानता हूँ कि उन्होंने न ऐसा कहा न उनका आशय यह था। उनका मतलब था कि भाई हमारा हिन्दुत्व वसुधैव कुटुम्बकम को मानने वाला है, कट्टरता हमारा चरित्र नहीं है, हम हर किसी को हिन्दू मानते हैं चाहे फिर वह किसी भी धर्म में पैदा हुआ हो। अगर हम यही चरित्र छोड़ देंगे तो हम हिन्दू कैसे?

लेकिन न्यूज वालों ने हेडिंग कुछ और छाप दी।

लेकिन भागवत जी, अब हिन्दू पहले की तरह मूर्ख नहीं रहा है कि किसी की पूरी बात समझे, पूरी खबर पढ़े, आशय को भाँप कर मत बनाये। अरे अब हिन्दू भी ज्ञानी हो गया है भाई, वह सिर्फ अखबार की हेडलाइन पढ़ कर फैसले करता है। वह जमाना गया, अब हिन्दुओं को बेवकूफ बनाने की जो सोचेगा वही सबसे बड़ा मूर्ख है।

खैर, सबसे हास्यास्पद तो तब लगता है जब कुछ तथाकथित संघी हम कट्टर हिन्दुओं को यह समझाते हैं कि भैया संघ तो हमेशा ही समरसता की बात करता है, संघ जानता है कि 25-30 करोड़ शांतीदूतों को रातों रात लापता तो नहीं किया जा सकता। रहना इनके साथ ही है, तो इन्हें जोड़ने की कोशिश की जाये। इसलिये संघ को समझना है तो संघ से जुड़ो, शाखा में आओ, स्वयंसेवक बनो।

बताओ मतलब अब हम कट्टर हिन्दू फेसबूक पर पोस्ट लिखने जैसा घोर मेहनती कार्य छोड़कर जमीन पर उतर कर कार्य करेंगे? क्या इतने बुरे दिन आ गये हैं कि अब हम संघ की पोशाक पहनकर आदिवासी क्षेत्रों में जाकर अपना दलित तथा महादलित हिन्दू भाईयों को जोड़ने की कोशिश कर ईसाई मिशनरीयों से लोहा लें? क्या इतने खलीहर हो गये हैं कि बंगाल, कर्नाटक, त्रिपुरा और केरल जैसे राज्यों में जाकर हिन्दुत्व की रक्षा के लिये प्राण त्याग दें? घर परिवार को देश के लिये छोड़ने जैसा तुच्छ कार्य करें?

अगर सब संघ से जुड़कर देश सेवा के कार्य में लगने जैसा आसान कार्य करने लगे, तो फेसबुक पर पोस्ट लिखने जैसे कठिन कार्य के लिये हिन्दू क्या नेपाल से आयेंगे?

इसलिये भैया हमें मूर्ख मत बनाओ!

अब हिन्दू जाग गया है!

जय श्री राम + जय श्री परशुराम

जय हिंदुत्व!!!

– अभिनव पाण्डेय

मैं आपको पहचानता नहीं, क्या ये मेरी गलती है?

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